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योगी सरकार का बड़ा कदम, किरायेदारी एग्रीमेंट पर शुल्क कम, झंझटों से मिलेगी मुक्ति
इस नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों सस्ते में रजिस्ट्री करवा सकेंगे किरायेदारी पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित होगी किसी भी विवाद की स्थिति में लिखित और रजिस्टर्ड दस्तावेज होने से मामला तुरंत सुलझ सकेगा
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UP Rent Agreement Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने किरायेदार और मकान मालिक दोनों के लिए एक बड़ा और आसान कदम उठाया है. पहले कई लोग किरायानामा लिखित रूप में नहीं बनाते थे या रजिस्ट्री नहीं कराते थे, क्योंकि इस पर लगने वाला स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस बहुत ज्यादा होती थी. लेकिन अब सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसमें 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामों पर शुल्क बहुत कम कर दिया गया है. इसका मकसद है कि लोग बिना डर और बिना अधिक खर्च के किरायानामा लिखित रूप में तैयार करें और कानूनी रूप से रजिस्ट्री भी कराएं. इससे आगे चलकर झगड़े और विवाद कम होंगे.
नई व्यवस्था क्यों ज़रूरी थी?
अभी तक नियम यह था कि यदि किरायेदारी एक साल से ज्यादा की हो, तो उसकी रजिस्ट्री कराना जरूरी है. लेकिन ज़मीन पर क्या होता था.... अधिकतर लोग या तो मौखिक किरायेदारी करते थे, या अगर लिखित एग्रीमेंट बनता भी था, तो रजिस्ट्री नहीं कराते थे। इसका नुकसान यह होता था कि बाद में जीएसटी विभाग, बिजली विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों की जांच में ऐसे मामले पकड़े जाते थे. फिर उन पर कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती थी, जो मकान मालिक और किरायेदार, दोनों के लिए मुश्किल बन जाती थी. सरकार का कहना है कि जब शुल्क बहुत ज़्यादा होता है, तब लोग रजिस्ट्री से बचने की कोशिश करते हैं. इसलिए सरकार ने निर्णय लिया कि यदि शुल्क बहुत कम कर दिया जाए, तो आम लोग आसानी से रजिस्ट्री कराएंगे और किरायेदारी व्यवस्था साफ़ और पारदर्शी बन सकेगी.
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नई छूट व्यवस्था क्या है?
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नई प्रणाली में यह तय कर दिया गया है कि किरायेदारी विलेख पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और अधिकतम रजिस्ट्री शुल्क कितने होंगे. इन शुल्कों को किराया कितना है और किरायेदारी कितने वर्षों की है, उसके आधार पर फिक्स किया गया है. सरकार ने औसत वार्षिक किराए की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये तय की है. ध्यान देने वाली बात यह है कि टोल से जुड़ी लीज और खनन पट्टे इस छूट में शामिल नहीं हैं, ताकि सरकार को राजस्व का नुकसान न हो। नई सीमा तय होने से आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. अब उन्हें भारी-भरकम शुल्क नहीं भरना पड़ेगा और वे आसानी से किरायानामा रजिस्टर्ड करवा पाएंगे.
नए शुल्क -
नीचे अलग-अलग किराए और अवधि के अनुसार अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री फीस दी गई है:
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1) औसत वार्षिक किराया – ₹2,00,000 रुपये तक अवधि अधिकतम शुल्क 1 वर्ष तक ₹500 1 से 5 वर्ष ₹1500 5 से 10 वर्ष ₹2000
2) औसत वार्षिक किराया – ₹2,00,001 से ₹6,00,000 तक अवधि अधिकतम शुल्क 1 वर्ष तक ₹1500 1 से 5 वर्ष ₹4500 5 से 10 वर्ष ₹7500
3) औसत वार्षिक किराया – ₹6,00,001 से ₹10,00,000 तक अवधि अधिकतम शुल्क 1 वर्ष तक ₹2500 1 से 5 वर्ष ₹6000 5 से 10 वर्ष ₹10,000
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लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा?
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इस नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों सस्ते में रजिस्ट्री करवा सकेंगे किरायेदारी पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित होगी किसी भी विवाद की स्थिति में लिखित और रजिस्टर्ड दस्तावेज होने से मामला तुरंत सुलझ सकेगा सरकार की नजर में किरायेदारी व्यवस्था पारदर्शी बन जाएगी इससे पूरे किरायेदारी सिस्टम में एक तरह से पारदर्शिता और व्यवस्था आएगी, और सभी पक्षों को राहत मिलेगी.