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योगी सरकार का बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों को मिलेगी सरकारी सुविधाओं की सौगात

CM Yogi: यह फैसला सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सम्मान, सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लंबे समय तक न्याय सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले जजों को अब घरेलू सहायता और संचार सुविधाओं के लिए सरकार की ओर से निश्चित आर्थिक सहयोग मिलेगा.

Image Source: Social Media
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UP Retired Judge Facilities: उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. न्याय विभाग की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है. इस नए आदेश के तहत अब सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को घरेलू सेवक (नौकर/ड्राइवर) रखने और टेलीफोन खर्च के लिए हर महीने तय राशि दी जाएगी. इस फैसले से सेवानिवृत्ति के बाद भी न्यायाधीशों को दैनिक जीवन की जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी.

कितना मिलेगा घरेलू सेवक भत्ता


जारी शासनादेश के अनुसार, सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और उनकी पत्नी को घरेलू सेवक रखने के लिए 50 हजार रुपये प्रति माह का भत्ता दिया जाएगा. वहीं, अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए यह राशि 45 हजार रुपये प्रति माह तय की गई है. यह भत्ता घरेलू सहायक, ड्राइवर या अन्य जरूरी सेवाओं के लिए दिया जाएगा, ताकि सेवानिवृत्त जजों को रोजमर्रा के कामों में किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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टेलीफोन भत्ते की भी सुविधा


घरेलू सेवक भत्ते के अलावा सरकार ने सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को टेलीफोन भत्ते की भी सुविधा दी है. इसके तहत सभी पात्र सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह टेलीफोन खर्च के लिए दिए जाएंगे. इसमें लैंडलाइन, मोबाइल और अन्य संचार सेवाओं का खर्च शामिल माना जाएगा.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ फैसला


यह व्यवस्था अचानक नहीं की गई है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को यह सुविधा दी जाए। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में न्याय विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. अब प्रमुख सचिव न्याय उदय प्रताप सिंह की ओर से इस संबंध में औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया गया है. साथ ही राज्यपाल की भी इस पर स्वीकृति मिल चुकी है.

कितने कर्मचारी रख सकते हैं सेवानिवृत्त

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जज
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश, अथवा उनके पति या पत्नी, हाईकोर्ट की अंतिम ग्रेड सेवा के अधिकतम दो कर्मचारियों की सेवाएं ले सकते हैं. इनमें से एक कर्मचारी चालक (ड्राइवर) हो सकता है. इसका मतलब है कि जरूरत के अनुसार घरेलू सहायक और ड्राइवर दोनों की सुविधा मिल सकेगी.
इसके अलावा, हाईकोर्ट के मौजूदा कर्मचारियों को भी उनकी इच्छा के अनुसार सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से जोड़ा जा सकता है. हालांकि, ऐसा जुड़ाव कर्मचारी की सेवानिवृत्ति तक ही मान्य रहेगा.

कर्मचारी न मिलने पर भत्ते का नियम

सरकार ने भत्ते को लेकर कुछ शर्तें भी तय की है.  जब तक संबंधित कर्मचारी की तैनाती नहीं हो जाती, तब तक सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को यह भत्ता नहीं मिलेगा. यदि हाईकोर्ट की ओर से केवल एक कर्मचारी उपलब्ध कराया जाता है, तो ऐसे में सेवानिवृत्त न्यायाधीश को तय भत्ते का केवल 50 प्रतिशत ही दिया जाएगा.

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सम्मान और सुविधा दोनों का ध्यान


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यह फैसला सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सम्मान, सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लंबे समय तक न्याय सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले जजों को अब घरेलू सहायता और संचार सुविधाओं के लिए सरकार की ओर से निश्चित आर्थिक सहयोग मिलेगा. जिससे उनका जीवन और अधिक सहज और सुरक्षित बन सकेगा.

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