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योगी फैक्टर से बदला बिहार का चुनावी गणित... जिन 31 सीटों पर पहुंचे 'बाबा बुलडोजर', वहां विपक्षियों का उखड़ गया किला
Bihar Election Result 2025: बिहार चुनाव में एनडीए को जबरदस्त जीत मिली और इसमें योगी आदित्यनाथ की रैलियों का बड़ा असर माना जा रहा है. जिन 31 सीटों पर उन्होंने प्रचार किया, वहां माहौल स्पष्ट रूप से एनडीए के पक्ष में बदला. दानापुर में 2020 की हार को 2025 में 29133 वोटों की बड़ी जीत में बदल दिया.
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बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य की राजनीति में नीतीश कुमार एक भरोसे का नाम हैं. जनता ने वोट के रूप में एनडीए को खुलकर आशीर्वाद दिया और यह समर्थन इतना जबरदस्त रहा कि सत्ता पक्ष को ऐतिहासिक जीत मिली. दिलचस्प बात यह रही कि इस चुनाव में केवल सीटें ही नहीं बदलीं, बल्कि 2020 और 2025 के आंकड़ों में हार और जीत का अंतर भी बड़े पैमाने पर उलटफेर दिखाता है. इस बदलाव की एक खास वजह उन 31 सीटों को माना जा रहा है, जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धुआंधार प्रचार किया था.
दरअसल, बिहार चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ ने बिहार में रैली करके न सिर्फ एनडीए को बढ़त दिलाई, बल्कि 2027 के यूपी चुनाव का होमवर्क भी 2025 में ही पूरा कर लिया. उनके भाषणों की शैली. बुलडोजर एक्शन का जिक्र. और कानून व्यवस्था के मॉडल की गूंज बिहार के मतदाताओं को प्रभावित करती दिखी.
दानापुर समेत कई सीटों के परिणामों ने चौंकाया
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सबसे बड़ा उलटफेर उन सीटों पर देखने को मिला जहां योगी आदित्यनाथ ने रैली की थी. दानापुर इसका बड़ा उदाहरण बना. 2020 में इस सीट पर आरजेडी के रीतलाल यादव ने 15924 वोटों से जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार बीजेपी के रामकृपाल यादव ने 29133 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि रीतलाल यादव के प्रचार के लिए बीमारी की अवस्था में भी लालू यादव पहुंचे थे. यह अंतर बताने के लिए काफी है कि माहौल किस ओर बहा. अगिआंव सीट पर भी योगी फैक्टर के असर की चर्चा रही. 2020 के उपचुनाव में सीपीआई उम्मीदवार शिवप्रकाश रंजन ने 48550 वोटों से बड़ी जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार योगी की रैली के बाद बीजेपी ने यहां केवल 95 वोटों से जीत दर्ज की. भले अंतर छोटा रहा हो, लेकिन राजनीतिक संदेश गहरा था.
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परिहार, बक्सर और सिवान में जीत का अंतर बढ़ा 10 गुना
सबसे ज्यादा चर्चा परिहार विधानसभा सीट की रहती है. 2020 में बीजेपी की गायत्री देवी ने यहां सिर्फ 1569 वोटों से जीत हासिल की थी. जबकि 2025 में उनका जीत का अंतर 15690 वोटों तक पहुंच गया. यह सच में दस गुना छलांग थी. बक्सर में कांग्रेस के संजय तिवारी ने 2020 में 3892 वोटों से जीत हासिल की थी. लेकिन 2025 आते-आते बीजेपी के आनंद मिश्रा ने इस अंतर को 28253 तक पहुंचा दिया. यही कहानी सिवान में भी देखने को मिली. 2020 में आरजेडी के अवध बिहारी चौधरी ने 1973 वोटों से जीत दर्ज की थी. वहीं इस बार बीजेपी के मंगल पांडेय ने 9370 वोटों के अंतर से सीट अपने नाम कर ली. इस प्रकार देखा जाए तो जिन-जिन सीटों पर योगी आदित्यनाथ की सभाएं हुईं, वहां एनडीए को स्पष्ट बढ़त मिली. माहौल बदला. और हवा एनडीए के पक्ष में घूम गई.
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मुजफ्फरपुर और अतरी में भी दिखा सीधा असर
मुजफ्फरपुर सीट के आंकड़े भी इस असर को मजबूत करते हैं. 2020 में यहां कांग्रेस के विजेंद्र चौधरी ने 6326 वोटों से जीत दर्ज की थी. लेकिन 2025 के चुनाव में बीजेपी के रंजन कुमार ने 32657 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की. अतरी में भी लगभग यही कहानी नजर आई. 2020 में यहां आरजेडी के अजय यादव ने 7931 वोटों से जीत दर्ज की थी. जबकि 2025 में एचएएम उम्मीदवार रोमित कुमार ने 25777 वोटों के भारी अंतर से विजय हासिल की. यह नतीजे साफ संकेत देते हैं कि रैलियों के दौरान योगी आदित्यनाथ जिस अंदाज में कानून व्यवस्था, विकास और माफिया पर सख्ती की बात कहते दिखे, उसे जनता ने गंभीरता से लिया और वोटों में तब्दील किया.
31 में से 26 सीटों पर एनडीए की जीत
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2020 के चुनाव में इन 31 सीटों में से 20 सीटें एनडीए के खाते में आई थीं. लेकिन योगी आदित्यनाथ के प्रचार और बीजेपी-जेडीयू के संयुक्त रणनीतिक अभियान के बाद 2025 में यही संख्या बढ़कर 26 हो गई. यह परिणाम केवल जीत का आंकड़ा नहीं था, बल्कि इस बात का संकेत था कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का प्रभाव अब सीमाओं के पार भी दिखने लगा है.
कुछ सीटों पर चुनौती भी मिली
हालांकि ऐसी तीन सीट भी रहीं जहां योगी की रैली के बावजूद एनडीए को हार का सामना करना पड़ा. इनमें रघुनाथपुर, गरखा और बिस्फी शामिल हैं. रघुनाथपुर में जेडीयू के विकास सिंह आरजेडी के ओसामा शहाब से हार गए. गरखा में आरजेडी के सुरेंद्र राम ने लोजपा उम्मीदवार सीमांत मृणाल को मात दी. वहीं बिस्फी में बीजेपी के हरिभूषण ठाकुर आरजेडी के आसिफ अहमद से चुनाव हार गए. इन सीटों पर आए विपरीत परिणाम ने यह भी संकेत दिया कि चुनाव के नतीजों में कई स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
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बहरहाल, बिहार का विधानसभा चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं था, बल्कि कई मायनों में यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी शैली का भी परीक्षण था. 31 सीटों पर उनके प्रचार ने जनता की सोच और चुनावी गणित दोनों को प्रभावित किया. एनडीए की 26 सीटों की जीत इसका बड़ा सबूत है. आने वाले चुनावों में यह मॉडल एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है.