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PM मोदी बोलते हैं तो दुनिया सुनती है...भारत की बढ़ती ताकत पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, क्यों कहा कि लोगों से हुई देरी?

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने वैश्विक मंच पर बढ़ती भारत की ताकत और बदलती छवि पर बड़ी बात कही है. उन्होंने पीएम मोदी को लेकर भी कहा कि जब भी वो बोलते हैं तो दुनिया उन्हें गंभीरता से सुनती है. उन्होंने इसकी वजह भी बताई कि भारत ने दुनिया को मजबूर कर दिया है कि उसे हमारी बात सुननी होगी, ध्यान देना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की ताकत अब उन जगहों पर प्रकट होने लगी है, जहां उसे कायदे से, सही मायनों में प्रकट होना चाहिए.

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पीएम मोदी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जो भी कहते हैं तो पूरी दुनिया उन्हें ध्यान से सुनती है. संघ प्रमुख ने इसकी वजह भी बता दी. उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव ने विश्व नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अधिक ध्यान देने और गंभीरता से लेने पर मजबूर कर दिया है. आपको बता दें कि डॉ. भागवत पुणे में RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक आभार समारोह में बोल रहे थे.

'प्रकट होने लगी है भारत की ताकत'

उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती ताकत और वैश्विक छवि को लेकर कहा कि आज दुनिया प्रधानमंत्री की बात सुन रही है क्योंकि भारत की ताकत वहां प्रकट हो रही है, जहां उसे प्रकट होना चाहिए, भारत ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है.

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'देरी से संघ नहीं आया, देरी से सुनना शुरू हुआ'

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उन्होंने एक और किस्से को याद करते हुए कहा कि एक बार उन्हें बताया गया था कि संघ "30 साल देरी से पहुंचा है", जिस पर उन्होंने जवाब दिया था कि हम देरी से नहीं आए, आपने हमें देरी से सुनना शुरू किया. इसके अलावा उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा सक्रिय रहा है, लेकिन उसकी बात सुनी ही नहीं गई. उन्होंने कहा कि लोग दबाव से नहीं, बल्कि "संवाद और सामूहिक कार्य की शक्ति" से आकर्षित होते हैं.

उन्होंने संघ की स्ट्रैटेजी पर बात करते हुए कहा कि जब संघ संवाद और सामूहिक कार्य की ताकत की बात करता है, तो इसका तात्पर्य पूरे समाज से होता है. भागवत ने आगे कहा कि भारत की, भारतीय समाज की नींव विविधता में एकता के भाव में निहित है. उन्होंने जोर दिया कि हमें साथ मिलकर चलना होगा और इसके लिए धर्म आवश्यक है.

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चुनौतियों-तूफानों के बावजूद बढ़ा संघ: मोहन भागवत

भागवत ने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा उपलब्धियों का जश्न मनाने के बारे में नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने के बारे में है. उन्होंने कहा, "यद्यपि संघ ने चुनौतियों का सामना करते हुए और कई तूफानों का सामना करते हुए 100 साल पूरे कर लिए हैं, फिर भी यह आत्मचिंतन का समय है कि पूरे समाज को एकजुट करने के कार्य में इतना समय क्यों लगा."

भारत का उदय वैश्विक समस्याओं के कम होने की गारंटी: भागवत

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वैश्विक स्थिरता में भारत के उदय के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि "इतिहास गवाह है कि जब भारत का उदय होता है, तो वैश्विक समस्याएं कम जाती हैं और शांति कायम होती है. वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां भी भारत से यही मांग करती हैं, और संघ के स्वयंसेवक पहले दिन से ही इसी संकल्प के साथ काम कर रहे हैं."

संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि संगठन के शुरुआती स्वयंसेवकों ने घोर विपरीत परिस्थितियों में काम किया, बिना यह जाने कि उनके प्रयास सफल होंगे या नहीं. उन्होंने कहा, "उन्होंने सफलता के बीज बोए और परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया. हमारी कृतज्ञता उनके प्रति बनी रहनी चाहिए."

भारत में सभी दर्शनों के स्रोत एक ही: भागवत

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विविधता में एकता पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि भारत में सभी दर्शन एक ही स्रोत से उत्पन्न हुए हैं. उन्होंने कहा, "हमें साथ मिलकर चलना चाहिए, और इसके लिए धर्म आवश्यक है. चूंकि सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है, इसलिए हमें सद्भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए."

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