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क्या संभल का नाम बदला जाएगा, नया नाम क्या होगा ?

उत्तर प्रदेश का संभल सुर्खियों में हैं, मस्जिद के सर्वे के विरोध में शुरु हुए बवाल के बाद सीएम योगी एक्शन में हैं, जामा मस्जिद के बगल पुलिस चौकी बनाई जा रही, जिसका नाम सत्यव्रक न

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संभल। उत्तर प्रदेश का वो जिला जो पिछले कई महीनों से चर्चाओं के केंद्र में हैं, यूपी विधानसभा से लेकर संसद तक संभल की ही चर्चा हो रही है, मस्जिद विवाद के बाद शुरु हुए बवाल के बाद संभल का कायाकल्प करने की तैयारी योगी सरकार ने कर ली, इसी बीच अब बात चलने लगी है कि, क्या संभल ज़िले का नाम बदलने की तैयारी है ?

दरअसल, हर युग में उत्तर प्रदेश के संभल जिले का जिक्र मिलता है, संभल को राजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी भी कहा जाता है, ऐसे में संभल की धरती फाड़कर सनातन धर्म से जुड़े कई सबूत मिल रहे हैं,  प्राचीन मंदिर, बावड़ी, कूप मिलने के बाद अब संभल का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, संभल ही वो जगह है, जिसको लेकर मान्यता है कि यहीं भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे।

ऐसे में अब योगी सरकार और प्रशासन के एक फ़ैसले ने इस ओर कहीं न कहीं इशारा कर दिया है कि, संभल का नाम बदला जा सकता है।


बता दें कि, पहले हरिहर मंदिर के दावे को लेकर जामा मस्जिद के सर्वे का ऑर्डर मिल, फिर सर्वे के विरोध में भड़की हिंसा ने संभल का माहौल गर्म कर दिया, ऐसे में सरकार और प्रशासन ने फ़ैसला लिया कि, जामा मस्जिद के बगल में एक पुलिस चौकी बनेगी, जिसका निर्माण तेज़ी से हो रहा है, ताकि दोबारा ऐसा बवाल दंगाई न कर पाएंगे, जैसा सर्वे के विरोध में किया था, हालांकि चौकी बनने का भी विरोध शुरु हो गया, ओवैसी जैसे नेता विरोध पर उतारु हो गए, लेकिन चौकी बनने उसके विरोधी से ज़्यादा जिस बात कि चर्चा है वो है चौकी का नाम। जी हां, संभल जामा मस्जिद के बग़ल बन रही चौकी का नाम सत्यव्रत पुलिस चौकी रखा गया, इसके पीछे तर्क दिया गया किया है  जिले का पौराणिक नाम था, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि, क्या योगी सरकार अब संभल ज़िले का भी नाम बदल सकती है। 

कहां से आया 'सत्यव्रत नगर' नाम ?


सतयुग में इस जगह का नाम सत्यव्रत था, वहीं त्रेतायुग में इसे महदगिरि, द्वापर में पिंगल के नाम से जाना गया, कलयुग में इसका नाम संभल पड़ गया है, इसमें 68 तीर्थ और 19 कूप हैं, मान्यता है कि कलियुग में कल्कि अवतार शंबल नामक गांव में होगा, पिछले दशक में संभल जिला बनाया गया, हालांकि तब नाम अलग था, तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मुरादाबाद से हिस्सा काटकर एक नया जिला बनाया था, 28 सितंबर 2011 को ये जिला बनाया गया, तब इसका नाम भीमनगर था, लेकिन अखिलेश सरकार में 23 जुलाई 2012 को भीमनगर का नाम बदलकर संभल किया गया।


मतलब, जिला बनाने, नाम बदलने का चलन सिर्फ योगी सरकार में ही नहीं रहा, सपा और बसपा सरकारों में भी यही होता था, ऐसे में अब जब चौकी का नाम सत्यव्रत नगर चौकी रखा गया है तो ऐसे में नाम बदलने की उस मांग का भी ज़िक्र होने लगा है, जब 2021 में संभल के चंदौसी विधानसभा सीट से विधायक रही और सरकार में राज्यमंत्री रही गुलाब देवी ने की थी। 


संभल का नाम बदलने की उठी थी मांग।

संभल का नाम पृथ्वीराज नगर करने की मांग की गई थी, गुलाब देवी ने ये मांग की थी, कहा गया था कि, 12वीं सदी में राजपूत शासक पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली से लेकर अजमेर तक फैले अपने राज्य की राजधानी संभल को बनाया था।

ऐसे में अब देखना होगा कि, योगी सरकार संभल के नाम को लेकर आगे क्या फ़ैसला करती है, फ़िलहाल संभल में खुदाई के दौरान पुराने कूप, तीर्थ और मंदिर मिल रहें हैं, तो इसपर आपकी क्या राय हैं संभल का नाम बदला जाना चाहिए या नहीं और अगर नाम बदला जाए तो पृथ्वीराज नगर हो या सत्यव्रत नगर कमेंट में अपनी राय जरुर बताएं
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