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क्या केशव से पहले ब्रजेश पाठक पर गिरेगी गाज, मोदी-योगी की मीटिंग में क्या हुआ

यूपी बीजेपी में कथित कलह के दावों के बीच समाजवादी पार्टी ने नया दावा किया है. इस दावे के मुताबिक मनोज पांडेय, डिप्टी सीएम बन सकते हैं।

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योगी को दिल्ली हटाना चाहता है, शाह के इशारे में ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य योगी के खिलाफ एक लॉबी तैयार करने में लगे है, योगी को दलित पिछड़ा विरोधी घोषित करने के लिए कैंपेन चलाया जा रहा है।क्योंकि योगी स्वर्ण है, और अब दलित पिछड़ों को बीजेपी की तरफ वापस लाने के लिए किसी पिछड़ी जाति के नेता को सीएम बनाया जा सकता है।ऐसी खबरों को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक का बाजार गर्म है।लेकिन असल हकिकत ये है कि दिल्ली से भीतर इतना माद्दा नहीं है कि वो योगी को हटा सकें।क्योंकि मोदी के बाद देश में अगर किसी की लोकप्रियता चरम पर है तो वो नाम योगी ही है।

लेकिन फिर भी योगी को हटाने की खबरें क्यों चल रही है वो समझ से परे की बात है और ऐसी खबरें चल रही है उनही की वजह से समाजवादी पार्टी अब बीजेपी के और उसके नेताओं के मजे लेने लगी है।तंज मारने लगे है अखिलेश के नेता कभी केशव प्रसाद पर सवाल उठाते है तो कभी पाठक को हटाने की बात कर देते है।समाजवादी पार्टी के नेता आई पी सिंह ने तो भविष्यवाणी कर दी कि ब्रजेश पाठक को हटाकर मनोज पांडेय को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा।आई पी सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा - राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि मनोज पांडेय की भाजपा से जो डील हुई उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया जायेगा।ब्रजेश पाठक बसपा से भाजपा में 2017 में गये और मनोज पांडेय ने 2024 में सपा से दगा करके शामिल हुए हैं।

ब्रजेश पाठक केशव गैंग के सदस्य के रूप में योगी जी को हटाने की मुहिम का हिस्सा हैं।जानकारी जो दिल्ली से आ रही है दोनों उप मुख्यमंत्री गुजरात और बिहार के तर्ज पर हटाये जा सकते हैं।पाठक ने भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ0 दिनेश शर्मा को निबटा कर कुर्सी हासिल की अब मनोज पांडेय इन्हें निबटाने जा रहे हैं।ये रस्साकशी बीजेपी को पाताल में ले जायेगी।

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एक और ट्वीट में आई पी सिंह लिखते है -ऐसे हालात में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करता हूँ।लाचार बेबश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी अपने दो कैबिनेट मंत्री केशव प्रसाद मौर्या व ब्रजेश पाठक को अनुशासनहीनता में बर्खास्त क्यों नहीं कर देते?जो मंत्री, कैबिनेट मीटिंग का लगातार बहिष्कार कर रहे हों अपने विभागीय कार्यों से दूर हैं उन्हें अपने कैबिनेट में क्यों रखे हुए हैं?पाठक और केशव ने तय कर लिया जो घर फूंके आपने चलो हमारे साथ।उत्तर प्रदेश में नयी सरकार के गठन के पूरे आसार हैं।इतना ही नहीं अखिलेश यादव तो केशव प्रसाद को दिल्ली के वाईफाई का पासवर्ड तक बता देते है।

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जिस अनुशासन की बीजेपी कभ दुहाई दिया करती थी, आज उसी अमुशासन की धज्जिंया खुद बीजेपी के नेता उड़ा रहे है और हैरानी की बात ये है कि दिल्ली खामोश बैठा है।अगर यूपी बिजेपी के भीतर सच में इतना विवाद है तो प्रधानमंत्री मोदी खुद सभी नेताओं को बैठाकर मामला सुलझा क्यों नहीं देते।अगर मोदी ऐसा नहीं कर रहे है तो सवाल उठना लाजमी है कि क्या मोदी भी खुद ऐसा चाहते है।सवाल बहुत है और जवाब अगर किसी के पास है तो नाम है प्रधानमंत्री मोदी।अब देखना होगा की नीती आयोग की बैठक के लिए सभी नेता दिल्ली में जूटे है, तो क्या कुछ हल निकल पाता है या नहीं।

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