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क्यों हटाई गई 1971 के पाकिस्तान सरेंडर की ऐतिहासिक तस्वीर? जानिए वजह

भारत की सेना में एक बड़ा बदलाव हुआ है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 1971 युद्ध में पाकिस्तान के सरेंडर की तस्वीर को अपने दफ्तर से हटाने का फैसला किया और इसे सही ठहराया है। इस फैसले को लेकर उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस निर्णय के पीछे क्या सोच और उद्देश्य था।

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1971 के युद्ध में पाकिस्तान के सरेंडर की ऐतिहासिक तस्वीर को आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के ऑफिस से हटाकर रायसीना हिल्स के मानेकशॉ कन्वेंशन सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस कदम पर कई पूर्व सैनिकों और इतिहास प्रेमियों ने नाराज़गी जाहिर की, लेकिन जनरल द्विवेदी ने इसे एक सही निर्णय बताया है। जनरल द्विवेदी के अनुसार, यह बदलाव भारतीय सेना के ऐतिहासिक और सभ्यतागत दृष्टिकोण को आधुनिक संदर्भ में प्रदर्शित करने के लिए किया गया है। 

दिसंबर 2024 में, पाकिस्तान के सरेंडर की तस्वीर को रायसीना हिल्स स्थित आर्मी चीफ के दफ्तर से हटा कर मानेकशॉ कन्वेंशन सेंटर में रखा गया। इस जगह पर अब 'कर्म क्षेत्र' नामक एक नई पेंटिंग स्थापित की गई है। यह पेंटिंग 28 मद्रास रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल थॉमस जैकब द्वारा बनाई गई थी। आर्मी चीफ ने इस नए आर्टवर्क की तारीफ की और इसे वर्तमान सैन्य परिप्रेक्ष्य में सही ठहराया।

आर्मी चीफ का दृष्टिकोण

जनरल द्विवेदी ने कहा, "भारत का इतिहास तीन महत्वपूर्ण कालखंडों में बंटता है - ब्रिटिश काल, मुग़ल काल, और उससे भी पहले का समय। अगर हम इसे सेना के दृष्टिकोण से देखें, तो प्रतीकवाद बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि पैंगोंग त्सो के किनारे एक अर्धनग्न ब्राह्मण खड़ा है, और यह भारतीय संस्कृति और रणनीतिक दृष्टिकोण का प्रतीक है। नई पेंटिंग के बारे में जनरल द्विवेदी ने कहा, "यह पेंटिंग भूतकाल, वर्तमान और भविष्य को दर्शाती है। इसमें भगवान कृष्ण का रथ और चाणक्य को दिखाया गया है, जो भारतीय सेना की रणनीतिक बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करते हैं।"

इस पेंटिंग में दिखाए गए बर्फ से ढके पहाड़, लद्दाख की पृष्ठभूमि, और भगवान कृष्ण का रथ, भारतीय सेना को धर्म के संरक्षक के रूप में दिखाते हैं। इसके जरिए यह संदेश दिया गया है कि भारतीय सेना केवल एक सैन्य ताकत नहीं, बल्कि एक तकनीकी रूप से उन्नत और समन्वित बल है, जो अपनी शक्ति और रणनीतिक सोच से भविष्य के संकटों का सामना कर सकता है।

पूर्व सैनिकों की आपत्ति

पाकिस्तान के सरेंडर की तस्वीर हटाए जाने पर कई पूर्व सैनिकों ने अपनी आपत्ति जताई थी, लेकिन आर्मी चीफ ने कहा कि यह निर्णय वर्तमान समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने सेना की री-बैलेंसिंग और नॉर्थ फ्रंट में आ रही चुनौतियों के बारे में भी बात की। यह पेंटिंग सेना की युवा पीढ़ी की सोच और दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है, और यह नए सैन्य परिप्रेक्ष्य के साथ मेल खाती है।

यह कदम भारतीय सेना की नई दिशा और युवाओं के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहां सेना को केवल परंपराओं से जोड़ने के बजाय, इसे एक आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कर्म क्षेत्र पेंटिंग को देखने से यह साफ होता है कि भारतीय सेना अपने इतिहास, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का संतुलन बनाए रखे हुए है। इस फैसले ने भारतीय सेना के दृष्टिकोण को एक नया आकार दिया है, जो न केवल कर्मक्षेत्र के महत्व को बढ़ाता है, बल्कि भारत की रक्षा नीति और सैन्य शक्ति को भी एक नई दिशा में लेकर जाता है।
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