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हाई-सिक्योरिटी वार्ड में 24 घंटे CCTV निगरानी... सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल में क्यों शिफ्ट किया गया, जानिए वजह?

लेह एयरपोर्ट पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सोनम वांगचुक को स्पेशल फ्लाइट से जोधपुर लाया गया और सुरक्षा कड़ी रखते हुए उच्च सुरक्षा वार्ड में रखा गया. उनकी मेडिकल जांच पूरी हो चुकी है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी जारी है. बता दें कि शुक्रवार को उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस ढाई बजे होने वाली थी, लेकिन वे नहीं पहुंचे. बाद में पता चला कि उन्हें उनके गांव उल्याकटोपो से लद्दाख पुलिस की टीम ने गिरफ्तार कर लद्दाख से बाहर भेज दिया.

Screengrab/ X @Wangchuk66
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर हुए हालिया प्रदर्शन ने पूरे देश को झकझोर दिया है. लेह में हुई अराजकता के लिए पर्यावरण और शिक्षा के लिए मशहूर कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आरोपी मानते हुए को शुक्रवार की शाम पुलिस ने गिरफ़्तार किया. इसके बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था की पूर्ण रूप से स्थापित करने के लिए वांगचुक को लद्दाख की जेल में ना रखकर अब उन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर जोधपुर की जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. बता दें कि लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन में चार लोगों की मौत और लगभग 90 लोग घायल हुए थे. प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से लेह जिले में मोबाइल इंटरनेट भी बंद कर दिया.

दरअसल, लेह में हुई हिंसा के बाद सोनाम वांगचुक पर युवाओं को उकसाने का आरोप लगा था. इसके बाद वांगचुक ने कहा था कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करती है तो प्रदर्शन और तेज होगा. वांगचुक के इसी आक्रामक रूख को देखते हुए प्रशासन ने उनकी गिरफ़्तारी के तुरंत बाद सभी औपचारिकताएं की. इसके बाद वांगचुक को एक विशेष फ्लाइट से जोधपुर लाया गया. जेल में उन्हें उच्च सुरक्षा वार्ड में रखा गया और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखा गया. उनकी मेडिकल जांच भी पूरी हो चुकी है. बता दें किलेह में हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार ने दावा किया कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और भाषणों ने लोगों को भड़काया, जिससे 24 सितंबर को हिंसा हुई. इस हिंसा में चार लोगों की जान गई और 80 से अधिक लोग घायल हुए.

प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले हुई गिरफ्तारी 

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सोनम वांगचुक को ढाई बजे लेह में प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी. लेकिन वे नहीं पहुंचे, जिससे आयोजकों में चिंता हुई. जानकारी मिली कि वांगचुक को उनके गांव उल्याकटोपो से लद्दाख पुलिस की एक टीम ने गिरफ्तार किया, जिसकी अगुवाई डीजीएसडी सिंह जमवाल कर रहे थे. गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें लद्दाख से बाहर भेज दिया गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने कहा कि हाल की हिंसा युवाओं के नियंत्रण खोने के कारण हुई थी और इसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप की बात सही नहीं है.

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लेह एपेक्स बॉडी की प्रतिक्रिया

लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने विदेशी हस्तक्षेप की बात खारिज करते हुए न्यायिक जांच की मांग की. दोरजे ने आरोप लगाया कि पुलिस और सीआरपीएफ ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चेतावनी गोली का इस्तेमाल नहीं किया और सीधे फायरिंग की. जानकारी देते चलें कि सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर से 35 दिन का अनशन शुरू किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर को वार्ता का निमंत्रण भेजा. लेह में कर्फ्यू जारी रहा और प्रशासन ने तीसरे दिन भी कड़ी सुरक्षा बनाए रखी. कर्फ्यू के कारण कुछ प्रमुख शहरों में पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया.

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वांगचुक की पत्नी ने दी प्रतिक्रिया

वांगचुक की गिरफ्तारी से एक दिन पहले उनके संगठन SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया. सरकार ने इसके पीछे कथित वित्तीय गड़बड़ियों का कारण बताया. वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने आरोप लगाया कि सरकार झूठ फैला रही है और उनके पति को बिना कारण अपराधी की तरह ट्रीट किया गया.

विपक्षी नेताओं ने क्या कहा?

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वांगचुक की गिरफ्तारी के नाद देशभर से तमाम नेताओं ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह केंद्र का ध्यान भटकाने और कानून व्यवस्था में असफलता छुपाने का प्रयास है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे तानाशाही का चरम बताया. वहीं लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा ने कहा कि पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच होनी चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे. लंबे समय से चल रहे आंदोलन और हालिया अनशन के बाद उनकी गिरफ्तारी ने मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है.

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NSA के तहत गिरफ्तारी से कितनी बढ़ेगी परेशानी?

NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तारी का मतलब है कि किसी व्यक्ति को बिना आरोप के हिरासत में रखा जा सकता है. अधिकतम 12 महीने तक हिरासत संभव है और इस दौरान व्यक्ति को जमानत का अधिकार नहीं होता. हिरासत की समीक्षा सलाहकार बोर्ड करती है और इसके कारणों को बताना आवश्यक होता है.

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बता दें कि इस पूरी घटना ने लद्दाख की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदर्शन, गिरफ्तारी और सरकार के निर्णय ने देशभर में बहस का मुद्दा बना दिया है. अब देखना यह है कि न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान किस तरह निकलता है.

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