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Ayodhya में Modi को क्यों मिली मात, Vikas Divyakirti ने बताई बड़ी वजह

4 June को जब चुनावी नतीजे आए तो। मोदी और योगी भी सन्न रह गये। क्योंकि पूरे यूपी में बीजेपी जहां महज 33 सीटों पर ही सिमट गई। तो वहीं फैजाबाद सीट पर भी उसे हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद बीजेपी जहां आज भी मंथन पर मंथन कर रही है। तो वहीं दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान के मालिक विकास दिव्यकीर्ति ने अयोध्या में मिली बीजेपी की हार पर बड़ा बयान दे दिया है ।

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Modi 22 जनवरी ।यही वो तारीख थी ।जब Modi और योगी राज में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन कर तैयार हुआ। और राम भक्तों का सैकड़ों साल का इंतजार खत्म हुआ। जिसके बाद बीजेपी को भी ये उम्मीद हो गई थी कि फैजाबाद सीट तो बड़ी ही आसानी से निकाल लेगी। लेकिन जब चुनावी नतीजे आए तो । मोदी और योगी भी सन्न रह गये । क्योंकि पूरे यूपी में बीजेपी जहां महज 33 सीटों पर ही सिमट गई।तो वहीं फैजाबाद सीट पर भी उसे हार का सामना करना पड़ा ।इस हार के बाद बीजेपी जहां आज भी मंथन पर मंथन कर रही है। तो वहीं दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान के मालिक विकास दिव्यकीर्ति ने अयोध्या में मिली बीजेपी की हार पर बड़ा बयान दे दिया है।



दरअसल जिस फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी साल साल 2014 के चुनाव में दो लाख 82 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। और फिर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जीत का परचम लहराया ।लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को करारी का सामना करना पड़ा। जो बीजेपी के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। क्योंकि बीजेपी को ये हार राम मंदिर निर्माण के बावजूद मिली है। यही वजह है कि फैजाबाद में बीजेपी को मिली हार की आज भी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।तो वहीं अब इस मुद्दे पर यूपीएससी की तैयारी करवाने के लिए सबसे चर्चित कोचिंग संस्थानों में से एक दृष्टि आईएएस चलाने वाले विकास दिव्यकीर्ति ने बड़ा बयान दिया है। उनके मुताबिक बीजेपी ने अयोध्या की सीट इसलिये गंवाई है। क्योंकि वो जातीय समीकरण नहीं साध पाई। और दूसरी तरफ सपा ने ओबीसी, मुस्लिम, दलित के त्रिकोणीय जातीय समीकरण के दम पर फैजाबाद सीट जीत ले गई।


विकास दिव्यकीर्ति ने फैजाबाद में बीजेपी को मिली हार की एक और वजह बताई है। दलित वोट बैंक । जो आमतौर पर मायावती की पार्टी के साथ जुड़ा रहता था। लेकिन इस बार दलित वोट बैंक भी सपा के पास चला गया ।क्योंकि अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद को यहां से चुनाव लड़ाया। जो खुद अनुसूचित जाति से आते हैं। और सुरक्षित सीट ना होने के बावजूद अखिलेश ने उन्हें अयोध्या से लड़ाया। और यही दांव अखिलेश का बीजेपी को भारी पड़ गया।


साल 2014 में सपा ने मित्रसेन यादव को चुनाव लड़ाया था लेकिन वो हार गये। जबकि साल 2019 के चुनाव में सपा बसपा मिलकर चुनाव लड़ी लेकिन इसके बावजूद सपाई आनंद सेन यादव चुनाव हार गये। और इस बार अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने के साथ ही अनुसूचित जाति से आने वाले अवधेश प्रसाद को लड़ा दिया। जिससे बीएसपी का वोट बैंक भी सपा को शिफ्ट हो गया। क्योंकि दलितों की नेता होने के बावजूद मायावती ने सच्चिदानंद पांडेय को टिकट दिया जो ब्राह्मण समाज से आते हैं।  यही वजह है कि मायावती का दलित वोट बैंक सपाई अवधेश प्रसाद की ओर शिफ्ट हो गया। और यही सबसे बड़ी वजह रही अयोध्या में बीजेपी को मिली करारी हार की। वैसे आपको क्या लगता है। क्या जातीय समीकरण नहीं साध पाने की वजह से बीजेपी को फैजाबाद में हार मिली। 
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