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महाकुंभ 2025 के लिए हो रही है 'खास पुलिस वालों' की तलाश, मजबूत होने से ज्‍यादा इस चीज पर है फोकस?

महाकुंभ 2025 के दौरान यूपी पुलिस विशेष पुलिसकर्मियों की तलाश कर रही है, जिनका चयन उनकी शारीरिक ताकत के बजाय उनकी नैतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के आधार पर किया जा रहा है।

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विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ मेला 2025, प्रयागराज में होने जा रहा है, जिसमें लाखों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होंगे। इस विशाल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। हर बार की तरह, सुरक्षा और शांति बनाए रखना इस आयोजन की पहली प्राथमिकता होगी, लेकिन इस बार महाकुंभ की सुरक्षा में तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों के चयन में कुछ अलग है। इस बार पुलिसकर्मियों के डील-डौल से अधिक उनके शौक और आचार-विचार पर ध्यान दिया जा रहा है। यह नया दृष्टिकोण महाकुंभ की धार्मिकता और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से अपनाया गया है।
क्यों हो रही है 'खास' पुलिसवालों की तलाश?
एसएसपी राजेश द्विवेदी ने महाकुंभ मेला क्षेत्र के लिए ऐसे विशेष पुलिसकर्मियों की मांग की है, जो शारीरिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ मानसिक और सांस्कृतिक रूप से भी उपयुक्त हों। मेला प्रशासन को उन पुलिसकर्मियों की तलाश है जो शाकाहारी हों, शराब और धूम्रपान से दूर रहें, और धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए अपना कार्य करें।

ऐसे पुलिसकर्मियों की आवश्यकता इसलिए है ताकि वे महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ संवेदनशीलता से पेश आ सकें और उनके धार्मिक भावनाओं का ख्याल रख सकें। महाकुंभ एक अद्वितीय आयोजन है जहां धार्मिक आस्था, संस्कार और परंपराओं का विशेष स्थान है, इसलिए इसमें तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों का इस दृष्टिकोण से तैयार होना आवश्यक है।
पुलिसकर्मियों के लिए विशेष मानदंड
शाकाहार और नॉन-एल्कोहलिक जीवनशैली:
महाकुंभ की धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए, पुलिसकर्मियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे शाकाहारी हों और शराब-सिगरेट का सेवन न करते हों। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि वे मेले की धार्मिकता और उसके भावनात्मक पहलुओं का सम्मान कर सकें।

मृदुभाषी और संयमित स्वभाव:
महाकुंभ में शामिल होने वाले श्रद्धालु अक्सर धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित होते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि पुलिसकर्मी उनसे सम्मानपूर्वक और मृदुभाषी तरीके से पेश आएं।

धार्मिक और सांस्कृतिक समझ:
महाकुंभ का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित होता है। इसलिए, पुलिसकर्मियों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वे किस तरह से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखें और मेले के आयोजन में बाधा न बनें।

 पुलिसकर्मियों को दी जाएगा विशेष ट्रेनिंग

महाकुंभ के लिए चयनित पुलिसकर्मियों को एक विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिसमें उन्हें सॉफ्ट स्किल्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य यह है कि वे श्रद्धालुओं से सलीके से पेश आएं और मेला क्षेत्र की जटिलताओं को समझकर उसे बेहतर ढंग से संभाल सकें।

इस ट्रेनिंग में सीनियर अधिकारियों के साथ-साथ बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, जो पुलिसकर्मियों को मेला क्षेत्र की संवेदनाओं और सुरक्षा के बारे में सिखाएंगे। 15 अक्टूबर से इस ट्रेनिंग का पहला बैच शुरू होगा, जिसमें पुलिसकर्मियों को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित किया जाएगा।

अनुभवी पुलिसकर्मियों को मिलेगी प्राथमिकता:
महाकुंभ में तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों के चयन में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने पहले भी कुंभ, महाकुंभ या माघ मेले में ड्यूटी की हो। ऐसे पुलिसकर्मियों को मेला क्षेत्र की गतिशीलता और वहां की विशेष परिस्थितियों का अनुभव होता है, जिससे वे बेहतर ढंग से भीड़ नियंत्रण और शांति व्यवस्था बनाए रख सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में मेला क्षेत्र का दौरा किया और मेला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिसकर्मियों की तैनाती में विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की नियुक्ति में धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके। इसके अलवा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी महाकुंभ के इस नए दृष्टिकोण को  सराहा है। परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि इस पहल से महाकुंभ की गरिमा और धार्मिकता को बनाए रखने में मदद मिलेगी। अखाड़ा परिषद का मानना है कि यह कदम न केवल देश के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में महाकुंभ का सकारात्मक संदेश पहुंचाएगा।

महाकुंभ 2025 के लिए यूपी पुलिस का यह अनूठा कदम धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। शारीरिक बल के साथ-साथ मानसिक और नैतिक बल का ध्यान रखकर पुलिसकर्मियों का चयन करना एक नई शुरुआत है, जो महाकुंभ की धार्मिकता और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित करेगा। इस तरह के विशेष पुलिसकर्मियों की तैनाती महाकुंभ मेले में शांति और अनुशासन बनाए रखने में सहायक होगी, जिससे श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और संतोषजनक अनुभव मिलेगा।
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