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स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है, आखिर इस दिन को ही क्यों चुना गया

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जाता है, ये दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में हमेशा अमर है, आज पूरा देश 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है लेकिन इससे जुड़ा एक बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर 15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है और इस दिन को ही क्यों चुना गया।

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भारत में स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है, और यह दिन भारत के लिए एक इतिहास दिन है। आज पूरा देश 78वां स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जश्न मना रहा है और उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर  रहा है जिन्होंने इस देश को स्वतंत्र करने में अपनी जान की आहुति दी और शहीद हो गए, यह वो दिन है जब साल 1947 में भारत ने ब्रिटिश साम्राज्य से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की थी। लेकिन इन सब के बीच प्रश्न यह उठता है कि आखिर 15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस क्यों चुना गया? इसके पीछे एक लंबी कहानी है जो भारत की स्वतंत्रता संग्राम और ब्रिटिश शासन के अंत का प्रतीक है।


18वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने पैर जमा लिए थे। धीरे-धीरे उन्होंने पूरे भारत पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत 1857 के विद्रोह से मानी जाती है, जिसे 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' या 'सिपाही विद्रोह' कहा जाता है। यह विद्रोह ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ भारतीय सैनिकों और जनता के असंतोष का प्रतीक था। हालांकि 1857 का विद्रोह असफल रहा, लेकिन इसने भारतीयों के दिलों में स्वतंत्रता की चाहत को और भी मजबूत कर दिया। इसके बाद, 19वीं और 20वीं शताब्दी में कई नेता और संगठन स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। इनमें कई महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, भगत सिंह, और अन्य महान स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे। इन सभी नेताओं और आंदोलनों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया।



द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान, ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को बिना उनकी सहमति के युद्ध में धकेल दिया। जिसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने "भारत छोड़ो आंदोलन" शुरू किया जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। इस आंदोलन का उद्देश्य था कि ब्रिटिश शासन तुरंत भारत छोड़ दे।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई थी। जिसके बाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन ने इतनी शक्ति प्राप्त कर ली थी कि ब्रिटिश सरकार को आख़िरकार समझौता करना ही पड़ा। और 1947 की शुरुआत में, ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 तक भारत को स्वतंत्रता दे देगा। इसके बाद लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया, जिनका काम था भारत की स्वतंत्रता और विभाजन की प्रक्रिया को पूरी करना। माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं के साथ बैठकें कीं और स्वतंत्रता की तारीख तय करने पर विचार किया। शुरुआत में, माउंटबेटन ने 1948 के मध्य तक भारत को स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारतीय नेताओं और परिस्थितियों के दबाव के चलते यह निर्णय लिया गया कि यह तिथि जल्दी तय की जाए।

15 अगस्त तारीख का चयन कैसे हुआ -

जब स्वतंत्रता की तारीख तय करने का समय आया, तो माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 को चुना। इसके पीछे कई कारण थे -

व्यक्तिगत कारण - माउंटबेटन का 15 अगस्त से व्यक्तिगत जुड़ाव था। 15 अगस्त 1945 को जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण किया था। माउंटबेटन, जो उस समय दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए संबद्ध बलों के कमांडर थे, ने इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देखा। इसलिए, उन्होंने 15 अगस्त को एक शुभ दिन माना।

तत्कालीन परिस्थिति - भारत में सांप्रदायिक दंगे और असंतोष फैल रहा था। ब्रिटिश सरकार को डर था कि अगर स्वतंत्रता को और टाला गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए उन्होंने त्वरित कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

भारतीय नेताओं की सहमति - भारतीय नेताओं को भी यह समझ आ गया था कि स्वतंत्रता का समय आ गया है। गांधीजी, नेहरूजी और अन्य नेताओं ने माउंटबेटन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। और 15 अगस्त 1947 को भारत पूरी तरह आज़ाद हो गया। 

15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है, इस दिन ब्रिटिश शासन का अंत हुआ और भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने नए सफर की शुरुआत की।
15 अगस्त को हर साल भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल हमारे राष्ट्र की स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने का अवसर भी है जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर हमें स्वतंत्रता दिलाई। इस दिन देश के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से देश को संबोधित किया जाता है और देशवासियों को स्वतंत्रता के महत्व और राष्ट्रीय एकता की भावना को याद दिलाया जाता है।

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