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Amit Shah के बेटे पर सवाल उठा रहे Rahul Gandhi को BJP ने क्यों कहा हाफ मेंटल

राहुल गांधी जब कश्मीर में चुनावी रैली करने पहुंचे तो यहां भी उन्होंने जय शाह पर सवाल उठा दिया लेकिन ये बात शायद भूल गये कि जब आप एक अंगुली किसी पर उठाते हैं तो चार अंगुली आपके तरफ भी होती है, राहुल गांधी के साथ भी कुछ यही हुआ, क्या है पूरी खबर देखिये ये खास रिपोर्ट ।

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देश में राजनीति और खेल । साथ साथ चलते रहे हैं । ये कोई नई बात नहीं है । लेकिन इसके बावजूद देश के गृहमंत्री Amit Shah के बेटे जय शाह जब बीसीसीआई या फिर आईसीसी में कोई पद संभालते हैं । तो देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस जैसे बौखला जाती है । यहां तक कि चुनावों में भी कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल गांधी इसे मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं । यही वजह है कि कुछ ही दिनों पहले राहुल गांधी जब कश्मीर में चुनावी रैली करने पहुंचे तो यहां भी उन्होंने जय शाह पर सवाल उठा दिया । लेकिन ये बात शायद भूल गये कि जब आप एक अंगुली किसी पर उठाते हैं तो । चार अंगुली आपके तरफ भी होती है । राहुल गांधी के साथ भी कुछ यही हुआ ।


दरअसल गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह का राजनीति से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने क्रिकेट भले ही कभी ना खेला हो। लेकिन क्रिकेट से जुड़ी प्रशासकीय जिम्मेदारियां साल 2009 से ही निभाते रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस नेता उनके पीछे पड़े रहते हैं। वो भी कोई छोटे मोटे नेता नहीं। राहुल गांधी जैसे दिग्गज नेता जय शाह के बहाने बीजेपी पर हमला बोलते रहते हैं। चार सितंबर को ही राहुल गांधी जब कश्मीर के दौरे पर गये तो एक चुनावी रैली में उन्होंने जय शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि अमित शाह के बेटे ने कभी बैट नहीं उठाया और वो क्रिकेट के इंचार्ज बन गये।

राहुल गांधी ने अमित शाह के बेटे जय शाह का नाम लेकर बीजेपी पर हमला बोला तो बीजेपी के तेज तर्रार युवा प्रवक्ता शिवम त्यागी ने तंज मारते हुए कहा"शरद पवार जी ने देश के लिए 1000 विकेट लिये, राजीव शुक्ला जी ने 100 शतक लगाये, वैभव गहलोत तो जोंटी रोड्स से भी खतरनाक कैच पकड़ते हैं, इसलिए कांग्रेस ने उनको BCCI में उनको जगह दी, ये आदमी हाफ मेंटल है और कुछ नहीं, हर समय बस अपनी खिल्ली उड़वाता है "

राहुल गांधी ने जय शाह के क्रिकेट इंचार्ज बनने पर सवाल उठाया तो बीजेपी नेता ने तमाम नेताओं के नाम गिना दिये। जो नेता होने के साथ साथ क्रिकेट में प्रशासकीय जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। या संभाल रहे हैं।

एनसीपी शरद पवार गुट के अध्यक्ष शरद पवार का नाम देश के कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। जो कांग्रेस नीत यूपीए की मनमोहन सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और क्रिकेट से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है लेकिन इसके बावजूद साल 2005 में शरद पवार BCCI अध्यक्ष बने और 2010 से 2012 तक ICC के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

कांग्रेस के कद्दावर नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत भी कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। उन्हें तो राहुल गांधी लोकसभा का टिकट देकर चुनाव भी लड़ा चुके हैं।और सबसे बड़ी बात तो ये है कि वैभव गहलोत भी क्रिकेट का क भी नहीं जानते लेकिन इसके बावजूद राजस्थान क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बने हुए हैं।

कभी पत्रकार रहे राजीव शुक्ला का नाम भी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। जितना उनका दखल राजनीति में होता है। उससे कहीं ज्यादा भारतीय क्रिकेट बोर्ड में उनका दखल रहता है। उन्होंने भले ही कभी बैट ना पकड़ा हो लेकिन पिछले 24 सालों से BCCI में जरूर जमे हुए हैं और फिलहाल BCCI उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।और कई मौके तो ऐसे आए हैं जब खुद कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने जय शाह की तारीफ भी की है। एक बयान में तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि "जय शाह की लोग लाख आलोचना कर लें लेकिन जय शाह ही BCCI के लिए ICC से लड़ कर 39 फीसदी शेयर लेकर आए पहले तो ICC 16 फीसदी शेयर भी देने को तैयार नहीं था, जो शेयर आता है अरबों डॉलर वो कहां लगेगा जगह-जगह स्टेडियम बनाने पर, खिलाड़ियों पर, खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने पर, हम एडमिनेस्ट्रेटर को कुछ थोड़े ही न मिलता है, हम तो मीटिंग में जाते हैं तो हवाई जहाज का टिकट मिल जाता है होटल मिल जाता है, चाय-बिस्कुट मिल जाता है, एडमिनेस्ट्रेटर की कोई सैलरी नहीं होती है लोगों को लगता है हजारों करोड़ BCCI में आ गये तो आप लोगों के पास भी हजारों करोड़ होंगे, एडमिनेस्ट्रेटर जो होते हैं BCCI के उन्हें कुछ नहीं मिलता उनकी कोई सैलरी नहीं होती है, जो पैसा है खिलाड़ियों को दिया जाता है स्टेट यूनियन में जाता है जहां से क्रिकेट चलता है हमारे यहां 55 हजार से ज्यादा मैच हर साल होते हैं जो स्टेट्स एसोसिएशन कराती हैं, महिला क्रिकेट को भी हम सपोर्ट कर रहे हैं "

एक तरफ जहां राहुल गांधी लगातार जय शाह पर सवाल उठाते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी के कद्दावर नेता राजीव शुक्ला जय शाह की तारीफ करते हैं। अब इसी बात से समझ सकते हैं कि जय शाह के खिलाफ राहुल गांधी का बयान कितना हकीकत है और कितना सियासी स्टंट।
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