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गणतंत्र दिवस पर कौन होंगे मुख्य अतिथि? इन खास नेताओं को मिला आमंत्रण, विदेश मंत्रालय ने जारी की गेस्ट लिस्ट

Republic Day 2026: यह शिखर सम्मेलन भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का अवसर है. यह न केवल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देगा. भारत-ईयू संबंध अब सिर्फ दोस्ताना नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं.

Image Source: Social Media
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Chief Guest on Republic Day 2026: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) 27 जनवरी को एक बड़ा शिखर सम्मेलन करने वाले हैं. इस शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष भारत-ईयू मुक्त कारोबारी समझौता (एफटीए) की घोषणा भी कर सकते हैं. यह समझौता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे व्यापार और आर्थिक सहयोग में बढ़ोतरी होगी. 

इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ की ओर से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन तथा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा करेंगे.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि उर्सुला वान डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा के नेतृत्व में यूरोपीय संघ का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 25 से 27 जनवरी के बीच भारत आएगा. यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत के गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के अवसर पर हो रहा है और दोनों नेता राजकीय मेहमान के रूप में शामिल होंगे.

दौरे के दौरान क्या-क्या होगा?

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इस दौरान यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात होगी. इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकें भी होंगी. गणतंत्र दिवस पर राजकीय मेहमान के रूप में उनकी उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित होगी. इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी. इस दौरे का उद्देश्य केवल औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि व्यापार, सुरक्षा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी है.

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भारत और ईयू के संबंध


भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं. पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्ष अपने संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. फरवरी 2025 में यूरोपीय आयोग के सभी प्रमुख अधिकारियों की पहली भारत यात्रा हुई थी. इसके अलावा सितंबर 2025 में यूरोपीय संघ ने भारत के साथ अपने संबंधों के लिए नया रणनीतिक एजेंडा भी पेश किया. 15वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2020 में ऑनलाइन यानी वर्चुअल तरीके से हुआ था. अब छह साल बाद यह शिखर सम्मेलन वास्तविक रूप में हो रहा है. इस शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ईयू बिजनेस फोरम का आयोजन भी हो सकता है, जिससे व्यापारिक और औद्योगिक सहयोग बढ़ेगा.

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एफटीए और व्यापारिक महत्व


भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त कारोबारी समझौते (एफटीए) की बातचीत अंतिम चरण में है. इस शिखर सम्मेलन में इसे अंतिम रूप देने या हस्ताक्षर करने की संभावना है. भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका के साथ कारोबारी समझौतों में कुछ अड़चनों के कारण यूरोपीय संघ के साथ यह सहयोग ज्यादा अहम हो गया है. ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. 2025 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 129 अरब यूरो से अधिक पहुंच गया है. इस दौरे से भारत और यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा.

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यह शिखर सम्मेलन भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का अवसर है. यह न केवल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देगा. भारत-ईयू संबंध अब सिर्फ दोस्ताना नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं.
 

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