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कौन है ये भगवाधारी जिसकी चेतावनी से डरे CM Yogi ?

यही वो शख़्स है जिसने योगी सरकार की नाक में दम कर रखा था। जिसने चेतावनी दी थी कि अगर दुकानों पर नेमप्लेट नहीं लगवाई गई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा। जानिए इस शख़्स के बारे में।

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मुज़फ़्फ़रनगर के साथ साथ पूरे कांवड़ रूट पर दुकान, होटल, ढाबों और ठेलों पर नेमप्लेट का आदेश क्या आया पूरे प्रदेश में ही राजनीतिक बवाल मच गया। राजनेताओं को इतनी टेंशन हो गई कि सारे काम छोड़कर बस इसी की बात करने लगे, वो अलग बात है कि ना हिंदुओं की दुकानदारी पर इसका कोई असर हुआ और ना ही मुस्लिमों की दुकानदारी में कोई कमी आई।लेकिन इससे राजनेताओं को क्या ? सीरीयस मुद्दा बनाकर इसपर योगी सरकार को घेरने लगे। इससे भी पेट नहीं भरा तो कुछ तो सुप्रीम कोर्ट भी चले गए। अब बताइये फ़ैसला आया यूपी में परेशान हो गईं बंगाल वाली महुआ मोइत्रा। टीएमसी की सांसद भी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई कि इस आदेश को वापस ले लिया जाए। खैर, Temporary तौर पर ही सही, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस फ़ैसले पर 26 जुलाई तक रोक लगाई जाए और फिर 26 को ही अगली सुनवाई होगी।

कुछ लोग योगी के फ़ैसले के समर्थन में हैं तो कुछ विरोध में…विरोध करने वालों में जो आवाज़ उठी है उसमें ये भी कहा जा रहा है कि भाई इतनी जल्दी क्या थी कि ये फ़ैसला ले लिया गया ? अगर आपके ज़हन में ये भी सवाल है कि अचानक ये फ़ैसला क्यों लिया गया या किसके कहने पर लिया गया तो चलिए आपको बताते हैं।

पहले ये तस्वीर देखिए। माथे पर तिलक, कान में कुंडल और तन पर भगवा।इनका नाम है स्वामी यशवीर सिंह। आप सोचेंगे कि योगी के फ़ैसले का ज़िक्र करते करते अचानक मैं इनका नाम क्यों लेने लगी ? दरअसल यही वो शख़्स है जिसने योगी सरकार की नाक में दम कर रखा था। जिसने चेतावनी दी थी कि अगर दुकानों पर नेमप्लेट नहीं लगवाई गई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा। इन्होंने ही प्रशासन से मांग की थी कि दुकानों के मालिकों को बड़े बड़े अक्षरों में अपना नाम अंकित करना होगा। चेतावनी ऐसी थी कि योगी को बैकफुट पर आना पड़ा और फ़ैसला लागू करना पड़ा। आख़िर कौन है ये बाबा जिनकी वजह से सीएम योगी को लेना पड़ा ये फ़ैसला विस्तार से जानिए।

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कौन हैं स्वामी यशवीर ?

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  • स्वामी यशवीर मुज़फ़्फ़रनगर से 15 किमी दूर एक आश्रम में रहते हैं।
  • योग साधा यशवीर आश्रम में उनके साथ उनका शिष्य ब्रह्मचारी स्वामी मृगेंद्र भी रहते हैं।
  • पहले स्वामी यशवीर योग सिखाया करते थे।
  • 2015 में बने महंत अवैधनाथ भवन का शिलान्यास भी यूपी के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था।
  • स्वामी यशवीर ने ही प्रशासन से मांग की थी कि ढाबों, होटलों,चाय की दुकानों में मालिकों का नाम लिखा जाए।
  • मांग पूरी ना होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी।
  • उन्होंने धमकी दी थी कि अगर सरकार ने ये काम नहीं किया तो वो ख़ुद ऐसा करवाएंगे।

वैसे फ़िलहाल तो सुप्रीम कोर्ट ने इस फ़ैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है लेकिन पहले भी यशवीर कैसे विवादों में रहे हैं ये आपको जान लेना चाहिए।

स्वामी यशवीर और विवाद-

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  • स्वामी यशवीर मुसलमानों पर खुलकर निशाना साधते हैं।
  • स्वामी जी की जान को हमेशा ख़तरा बना रहता है।
  • मुज़फ़्फ़रनगर के जाट परिवार में जन्मे यशवीर अपने बारे में बहुत कम बात करते हैं।
  • साल 2015 में पैंगबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी की थी।
  • समाज में द्वेष फैलाने के आरोपों के तहत मुक़दमा दर्ज हुआ था।
  • यशवीर को  2015 में गिरफ्तार किया गया था, वो 7.5 महीने जेल में रहे थे।
  • उनके ऊपर रासुका लगी थी।
  • वो हटी तब वो जेल से बाहर आ पाए थे।
  • वो कहते हैं कि 1000 से ज़्यादा मुसलमानों की घर वापसी करा चुके हैं।
  • मुस्लिम ढाबा मालिकों के ख़िलाफ़ लगातार हल्ला बोल करते हैं।

स्वामी यशवीर के कहने पर योगी ने फ़ैसला तो लिया लेकिन फ़िलहाल इस पर रोक लगा दी गई है। 

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