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कौन हैं UP की वो Athlete जो कान्हा जी को लेकर लेकर गईं हैं Paris Olympic
कौन हैं वो एथलीट जो कान्हा के साथ पेरिस ओलंपिक में गईं हैं, उनसे बात करते वक्त पीएम मोदी ने भी सबसे पहले कान्हा जी का हालचाल लिया
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Priyanka Goswami : खेलों का महासमर कहा जाने वाला ओलंपिक। इस बार पेरिस में होने जा रहा है। जहां दुनिया भर के एथलीट्स मेडल पर निशाना साधने के लिए खेल के मैदान में उतरेंगे।जिनमें एक नाम भारत की Priyanka Goswami का भी है। जो पैदल चाल में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। जो एक ऐसा खेल है। जिसके बारे में लोगों में कम जागरुकता है।लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पैदल चाल में अपना करियर बनाया। और सबसे पहले उन्हें साल 2021 के समर ओलंपिक में जाने का मौका मिला। जहां प्रियंका गोस्वामी 17वें पोजीशन में रहीं ।और इस बार भी उन्हें पेरिस ओलंपिक में जाने का मौका मिला है। जहां पैदल चाल में भारत का प्रतिनिधित्व करने से पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनसे बात की। और सबसे पहले बालकृष्ण का हाल चाल पूछ लिया।
एथलीट प्रियंका गोस्वामी इससे पहले 2021 में हुए ओलंपिक में भी अपने साथ कान्हा जी को लेकर टोक्यो गई थीं। और इस बार भी पेरिस ओलंपिक में उन्हें अपने साथ ले गई हैं। यानि प्रियंका गोस्वामी के साथ ही कान्हा जी का भी ये दूसरा ओलंपिक है। वैसे आपको बता दें ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि कोई खिलाड़ी अपने साथ कान्हा जी को भी किसी खेल प्रतियोगिता में ले जाए। प्रियंका गोस्वामी शायद पहली ऐसी एथलीट हैं जो कान्हा जी को हर वक्त अपने साथ रखती हैं। यहां तक कि ओलंपिक में उन्हें साथ ले गई हैं। यही वजह है कि पीएम मोदी ने प्रियंका गोस्वामी से सबसे पहले कान्हा जी के बारे में पूछा। तो वहीं इसी दौरान प्रियंका गोस्वामी ने पीएम मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देने के साथ ही स्विट्जरलैंड में चल रही अपनी तैयारियों के बारे में भी बताया।
पैदल चाल जैसा खेल भारत में अभी कम लोकप्रिय है। यही वजह है कि बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने प्रियंका गोस्वामी से पूछ लिया कि तुम्हारा खेल तो ऐसा है कोई देखने वाला नहीं होता है। प्रैक्टिस के दौरान कोई देखने वाला होता है कि नहीं। जिस पर प्रियंका गोस्वामी ने जवाब दिया। विदेशों में तो इस खेल को भी उतनी ही अहमियत दी जाती है। जितनी बाकी खेलों को दी जाती है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की रहने वालीं प्रियंका गोस्वामी इतनी आसानी से इस मुकाम पर नहीं पहुंची हैं। एक वक्त था जब उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। यहां तक कि खुद उनके पिता कई सालों तक बेरोजगारी से जूझते रहे। अपने परिवार की ये हालत प्रियंका गोस्वामी से देखी नहीं गई। और 14 साल की उम्र ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने के साथ ही देश का नाम रोशन करने का संकल्प उठा लिया। साल 2015 में पहली बार एथलीट्स में कदम रखने वालीं प्रियंका गोस्वामी को साल 2018 में जब रेलवे में नौकरी मिली। तब जाकर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी। और नौकरी के साथ ही पैदल वॉक की तैयारी भी करती रहीं।
2017 में पहली बार इंडियन रेस वॉकिंग चैंपियनशिप जीती।
2021 में दूसरी बार इंडियन रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में जीतीं।
रिकॉर्ड 1 घंटा 28 मिनट 45 सेकेंड में जीती 20 km की रेस।
रेस जीतने के बाद टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई किया।
2021 के टोक्यो ओलंपिक में प्रियंका 17वें पोजीशन पर रहीं।
2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल भारत के नाम किया।
रेस वॉक जैसे कम लोकप्रिय खेल में मेडल जीतने वालीं पहली एथलीट प्रियंका गोस्वामी इस बार पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। जिनका मुकाबला दुनिया की टॉप रेस वॉकर पेरू की किंबर्ले गार्सिया और नंबर दो पर मौजूद स्पेन की मारिया पेरेज से होगा। ऐसे में आपको क्या लगता है। क्या इस बार प्रियंका गोस्वामी पैदल चाल में भारत को ओलंपिक मेडल दिला पाएंगी।
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