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कौन हैं Pratap Sarangi जिन्हें Rahul Gandhi ने पहुंचाई ‘चोट’ ?
संसद में इस बार तनाव इस कदर बढ़ा कि क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष दोनों के सांसद आपने सामने आ गए और बवाल इतना बढ़ा गया कि BJP सांसद प्रताप सारंगी चोटिल हो गए.
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सफेद कुर्ता, नारंगी जैकेट, सफेद दाढ़ी, व्हील चेयर पर बैठे बुजुर्ग शख्स, जिनके माथे पर एक तरफ पट्टी रखी गई है। ये BJP सांसद प्रताप सारंगी हैं। संसद में कांग्रेस और बीजेपी के प्रदर्शन के दौरान ओडिशा के बालासोर से बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी घायल हो गए।उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के धक्के की वजह से वे गिर पड़े और उन्हें चोट आई।
संसद में अक्सर हंगामा होता हुआ तो आपने देखा होगा लेकिन इस बार तो बात धक्का मुक्की तक पहुंच गई। पक्ष-विपक्ष के इस हंगामे की भेंट चढ़ गए प्रताप सारंगी। जब प्रताप सारंगी मीडिया के सामने आए तो उनके माथे से खून निकल रहे थे। बीजेपी सांसदों ने उन्हें घेर रखा था। महिला सांसद ने उनके माथे पर पट्टी रख रखी थी। घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी भी उनके पास पहुंचे लेकिन बीजेपी सांसद उन पर भड़क गए।
वहीं, इस मामले पर राहुल गांधी ने BJP पर पलटवार किया और आरोप लगाया कि बीजेपी के सांसदों ने उन्हें पार्लियामेंट के अंदर नहीं जाने दिया और धक्का मुक्की की।
कौन हैं प्रताप सारंगी ?
प्रताप सारंगी ओडिशा में मोदी भी कहे जाते हैं। 2019 में बालासोर से पहली बार सांसद चुने गए । 2019 में PM मोदी के मंत्रिमंडल में हुए शामिल । 2004 और 2009 में ओडिशा के नीलगिरी से विधायक रहे ।बालासोर और मयूरभंज के आदिवासी इलाकों में कई स्कूल बनवाए । साइकिल वाले सांसद कहलाए ।
प्रताप सारंगी का नाम हमेशा ही PM मोदी के फ़ेवरेट की लिस्ट में रहा। साल 2019 में उन्हें जब बीजेपी की ओर से सांसद का टिकट मिला तो वे अपनी सादगी की वजह से चर्चा में आ गए। विधायक रहते हुए वे अपने क्षेत्र में साइकिल से घूमते थे। उनके बारे में कहा जाता है झोपड़ी ही उनका आशियाना थी।साल 2019 में वे सांसद बने और फिर केंद्रीय मंत्री। इससे पहले साइकिल ही उनकी गाड़ी और झोपड़ी ही उनका आशियाना था। PM मोदी भी सारंगी की सादगी के कायल हो गए थे। उन्हें ओडिशा का मोदी भी कहा जाता था। ओडिशा में वे अपने सामाजिक कार्यों से चर्चा में रहते हैं।
RSS के एक्टिव कार्यकर्ता ।
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान प्रताप सारंगी RSS के संपर्क में आए साथ ही बजरंग दल में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। इन संगठनों में उन्हें कई अहम पद भी मिले।
राजनीति में आने से पहले मां ने ली कसम ।
प्रताप सारंगी हमेशा से ही सामाजिक कार्यों में रूचि रखते थे। उनकी लोकप्रियता को देख समर्थकों ने उनसे चुनाव लड़ने की अपील की। लेकिन सारंगी की मां नहीं चाहती थी बेटा सक्रिय राजनीति में आए। जबकि समर्थकों की मांग तेज़ी होती गई। आख़िरकार काफ़ी समझाने के बाद मां मान गईं। लेकिन उन्होंने प्रताप सारंगी से क़सम खिलाई कि वे कभी रिश्वत नहीं लेंगे और ना ही कभी झूठ बोलेंगे। बहरहाल संसद में पक्ष विपक्ष की जिस लड़ाई में प्रताप सारंगी चोटिल हुए हैं वो थी तो संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर पर लेकिन इस लड़ाई में कोई बाउंड्री नहीं रही। ना विपक्ष को होश था ना सत्ता पक्ष को अफसोस। और नतीजा आपके सामने है।
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