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कौन है Navya Haridas, जिन्हें BJP ने wayanad से बनाया अपना उम्मीदवार

केरल में वायनाड लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए NDA की उम्मीदवार नाव्या हरिदास होंगी। जो दो बार पार्षद रह चुकी है। चुनावी मैदान में नव्या की सीधी टक्कर प्रियंका गांधी से होगी। जो I.N.D.I.A की तरफ से उम्मीदवार है। कौन है नाव्या हरिदास और बीजेपी की तरफ से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने क्या कहा है। जानिए

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15 अक्टुबर को चुनाव आयोग ने दो राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ साथ 48 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तारिखों का ऐलान कर दिया। साथ ही 2 सीटों पर लोकसभा उपचुनाव को लकेर भी तारीख की घोषणा कर दी। अब जैसे ही चुनाव की तारीखे पता चली सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी तैयारी में जुट गई। इसी बीच लोकसभा की हॉट सीट वायनाड जहां से राहुल गांधी सांसद चुने गए थे वहां पर बीजेपी ने अपना भयंकर दाव चल दिया है। यहां पर बीजेपी ने एक महिला पर अपना भरोसा जताया है। नाम है नव्या हरिदास। जो इसबार राहुल की बहन प्रियंका गांधी को सीधी टक्कर देगी।  


केरल के वायनाड में 13 नवंबर 2024 को लोकसभा के उपचुनाव होंगे। ऐसे में कांग्रेस की तरफ से चुनावी ताल ठोक रही प्रत्याशी प्रियंका गाँधी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने मैदान में जिस उम्मीदवार को उतारा है उन्हें लेकर क्षेत्र से चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है। लोगों को जानने की उतसुक्ता है कि आखिर ये नव्या हरिदास है कौन? तो चलिए आपको बताते है। 

कौन है नव्या हरिदास?


39 साल की नव्या हरिदास भारतीय जनता पार्टी का कोई नया चेहरा नहीं हैं। वह राज्य में भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की मुख्य सचिव हैं। नव्या कोझिकोड निगम से दो बार पार्षद भी रह चुकी हैं। साल 2021 में भी चुनाव के वक्त भाजपा ने उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार अहमद देवरकोविल के खिलाफ मैदान में उतारा था। और वो इन चुनावों में तीसरे नंबर पर रहीं थीं। राजनीति से हटकर बात करें तो नव्या एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। नव्या ने K.M.C.T इंजीनियरिंग कॉलेज कालीकट विश्वविद्यालय से 2007 में बी.टेक की और बाद में राजनीति में एंट्री मारी।

नव्या हरिदास में उम्मीदवार बनाए जाने पर क्या कहा?


वायनाड से उम्मीदवार बनाए जाने पर नव्या अचंभित हो गई। उन्होंने इस बात पर भरोसा जताया कि होने वाले उपचुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत जरूर बढ़ेगा। नव्या कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहती है कि वायनाड के लोगों ने इस भरोसे के साथ राहुल गांधी को जनादेश दिया था कि वो 5 सालों तक जनता का साथ देंगे और उनकी आवाज को लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में उठाने का काम करेंगे। लेकिन गांधी परिवार के वारिस ने वायनाड निर्वाचन क्षेत्र छोड़ दिया। और दूसरी सीट को विकल्प के रूप में देखा। 

हालांकि अगर हालातों पर नजर डाले तो राहुल गांधी का वायनाड छोड़ना वहां की जनता को पसंद नहीं आया। जनता के मन में इस बात का मलाल है कि जब कांग्रेस राजनीति में अपनी जमीन को रही थी तब वहां के लोगों ने राहुल का साथ दिया। और जैसे ही कांग्रेस को 99 सीटें मिल गई। कांग्रेस ने वायनाड के लोगों को छोड़ दिया। वायनाड सीट राहुल के लिए ऑप्शन मात्र ही रहा है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि राहुल का वायनाड छोड़कर रायबरेली को चुनना उनके और कांग्रेस दोनों के लिए एक गलत मूव की तरह है। और ये मूव कांग्रेस की जड़ को वायनाड में कमजोर कर चुकी है। 

खैर आने वाले दिनों में 24 विधानसभा और 1 लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। वायनाड की सीट की चर्चा इसलिए है क्योंकि बीते लोकसभा चुनावों में राहुल गाँधी ने यहाँ और राय बरेली से चुनाव लड़ा था। जीत के बाद उन्होंने राय बरेली से सांसद बने रहना चुना और वायनाड की सीट छोड़ दी। अब यहाँ से उनकी बहन चुनाव लड़ेंगी।

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