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कौन हैं भूपेन बोरा, जिसके इस्तीफे से असम से 10 जनपथ तक हिल गई कांग्रेस, आलाकमान को लगानी पड़ी गुहार!

असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कांग्रेस से 32 साल पूरा रिश्ता तोड़ा, इस्तीफा दिया और फिर वापस ले लिया. हालांकि बोरा के एक इस्तीफे से पूरी कांग्रेस हिल गई. गांधी परिवार तक हड़कंप मच गया. आखिर बोरा हैं कौन?

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असम में कांग्रेस को सोमवार को बड़ा झटका लगा. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कांग्रेस के साथ 32 साल के संबंध तोड़ दिए. भूपेन बोरा ने कहा कि उन्होंने अपने आत्मसम्मान के लिए कांग्रेस पार्टी छोड़ी है. हालांकि आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. पार्टी के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने ये दावा किया.

आपको बताएं कि बोरा के इस्तीफे ने पहले से ही राज्य में बैकफुट पर चल रही कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया है. इसी कारण असम के प्रदेश अध्यक्ष  गौरव गोगोई, प्रभारी जितेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बोरा से उनके आवास पर मुलाकात की.

भूपेन बोरा ने लिया इस्तीफा वापस!

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इस बीच, बोरा ने अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कांग्रेस आलाकमान से समय मांगा है. गोगोई ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बोरा से बात की है और उनका इस्तीफा आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया है. गोगोई ने कहा, “अगर पार्टी में कुछ मुद्दों के कारण भूपेन बोरा को ठेस पहुंची है तो हम उनसे माफी मांगते हैं.”

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भूपेन बोरा ने ने क्यों दिया इस्तीफा!

वहीं जहां तक इस्तीफे देने का सवाल है तो इस बारे में भूपेन बोरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने सुबह करीब 8 बजे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेज दिया. बोरा ने कहा, "मैंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. मैंने अपना इस्तीफा पहले ही केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है. यह फैसला आत्मसम्मान की रक्षा के लिए लिया गया."

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कांग्रेस में कन्फ्यूजन पर भड़के भूपेन!

कांग्रेस के कामकाज के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए भूपेन बोरा ने कहा कि पार्टी आलाकमान संगठन के मामलों पर समय पर और अहम फैसले लेने में नाकाम रहा है. उन्होंने कहा, "पार्टी यह भी तय नहीं कर पा रही है कि उसकी रैलियों में किसे आना चाहिए और किसे नहीं." उन्होंने कांग्रेस में कन्फ्यूजन और तालमेल की कमी का जिक्र किया. बोरा ने कहा कि उन्होंने अपनी राजनीतिक जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण साल कांग्रेस को दिए हैं. उन्होंने कहा, "मैंने अपनी जिंदगी के 32 साल कांग्रेस पार्टी को दिए."

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उन्होंने संगठन के अलग-अलग लेवल पर अपने लंबे जुड़ाव और योगदान का भी उल्लेख किया. खास नेताओं का नाम लेने से बचते हुए भूपेन बोरा ने लगातार अंदरूनी मुद्दों और लीडरशिप की कमजोरी की ओर इशारा किया. उनका कहना है कि पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया था. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कई मौकों पर चिंता जताने के बावजूद, टॉप लीडरशिप की ओर से कोई मतलब का जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा, "यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है. मैंने इसके बारे में ध्यान से सोचा है."

अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में पूछे जाने पर, भूपेन बोरा ने कहा, "वह अपने समर्थकों और शुभचिंतकों से सलाह करने के बाद फैसला करेंगे." हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि उनका इस्तीफा आखिरी है और यह कोई जल्दबाजी में लिया गया कदम नहीं है.

कौन हैं भूपेन बोरा, जिसके इस्तीफे से हिली कांग्रेस!

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भूपेन बोरा कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और असम की राजनीति के प्रमुख चेहरा रहे हैं. वे 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठनात्मक राजनीति में मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं. भूपेन बोरा को जमीनी कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाला नेता माना जाता है.

भूपेन बोरा का जन्म असम में हुआ और उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. युवावस्था में ही वे कांग्रेस विचारधारा से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी संगठन में अहम भूमिकाएं निभाते गए. वे असम विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और विधायक के तौर पर उन्होंने अपने क्षेत्र से जुड़े जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाया.

संगठन के आदमी के तौर पर पहचान!

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एक संगठनकर्ता के रूप में भूपेन बोरा की पहचान अनुशासित कार्यशैली, कैडर-बेस्ड राजनीति और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति के लिए होती है. प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने, बूथ-स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और युवाओं व अल्पसंख्यकों को पार्टी से जोड़ने पर खास जोर दिया.

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फिलहाल, आगामी चुनावों से पहले भूपेन बोरा का जाना असम में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही राज्य में अंदरूनी चुनौतियों और लीडरशिप के सवालों से जूझ रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि बोरा के जाने से आने वाले दिनों में असम कांग्रेस इकाई में और उथल-पुथल मच सकती है.

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