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कौन हैं भुलई भाई जिन्हें PM Modi ने कोरोना काल में मिलाया फोन और अब पद्म श्री से नवाजा ?

नरेंद्र मोदी के बारे में कहते हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक सफर भले ही तय कर लिया हो, लेकिन आज भी बीजेपी के लिए लड़ने वाले पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी के लिए समर्पण भाव नहीं भूले हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब भुलई भाई को देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री देने का ऐलान किया गया, कौन हैं भुलई भाई देखिये ये खास रिपोर्ट !

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जिस गुजरात के रेलवे स्टेशन पर नरेंद्र मोदी चाय बेचा करते थे। साल 2001 में मुख्यमंत्री बन कर उसी गुजरात की साल 2014 तक सत्ता संभाली और फिर साल 2014 में गुजरात से निकल कर पहली बार देश की सत्ता संभाली तो फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। साल 2014 से लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सत्ता संभाल रहे हैं। चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने तक पीएम मोदी के इस सफर का कोई गवाह रहा। तो वो हैं भुलई भाई। जो जनसंघ के समय से राजनीति करते आए हैं और अब वो इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन पीएम मोदी उन्हें नहीं भूले।और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भुलई भाई को नवाजा।


नरेंद्र मोदी के बारे में कहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक सफर भले ही तय कर लिया हो। लेकिन आज भी बीजेपी के लिए लड़ने वाले पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी के लिए समर्पण भाव नहीं भूले हैं। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब गणतंत्र दिवस से ठीक पहले ये ऐलान किया गया कि श्रीनारायण उर्फ भुलई भाई को देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री देने का ऐलान किया गया।

भुलई भाई अब इस दुनिया में भले ही नहीं रहे। लेकिन बीजेपी के लिए उनका समर्पण आज भी पीएम मोदी को याद रहा। क्योंकि भुलई भाई राजनीति में कोई नया चेहरा नहीं थे। जब बीजेपी का जन्म भी नहीं हुआ था।और नरेंद्र मोदी राजनीति में भी नहीं आए थे। तब से भुलई भाई राजनीति कर रहे थे।यूपी के जिला कुशीनगर के रहने वाले भुलई भाई 1974 से 1980 तक कुशीनगर की नौरंगिया विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। वो भी उस दौर में जब पूरे देश में जनसंघ के सिर्फ दो विधायकों ने जीत दर्ज की थी। यानि भुलई भाई ने वो दौर भी देखा जब जनसंघ का नाम बदल कर बीजेपी किया गया। लेकिन भुलई भाई नहीं बदले। वो जनसंघ के समय से ही बीजेपी के साथ रहे और 31 अक्टूबर 2024 को जब 111 साल की उम्र में आखिरी सांस भी ली तो बीजेपी के झंडे में अपनी अंतिम यात्रा पर निकले।

कौन थे भुलई भाई ?

UP के कुशीनगर के रहने वाले श्रीनारायण उर्फ भुलई भाई। एक नवंबर 1914 को कप्तानगंज के छपार पगरा में जन्मे। गोरखपुर स्थित सेंट एंड्रयूज कॉलेज से हाई स्कूल, इंटर किया। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएड और एमएड की डिग्री ली। पढ़-लिख कर भुलई भाई बेसिक शिक्षा अधिकारी बन गये।
जनसंघ से प्रभावित होकर भुलई भाई ने नौकरी छोड़ दी ।  

भुलई भाई के बारे में कहा जाता है उन्होंने अपने जीवन में कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक "कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के लिए उनके पास रुपये भरकर बैग भेजे थे, वह बैग को अगले ही दिन राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंचालक माधव राव सदाशिवराव गोलवकलकर और स्‍वयंसेवक संघ के संचालक नाना जी देशमुख के पास पहुंच गए थे, दोनों लोगों के कहने पर रुपयों से भरी बैग लेकर सदन में पहुंचे थे और सभापति के सामने गैलरी में फेंक दिया था"

बीजेपी के प्रति वफादार रहे भुलई भाई को मोदी सरकार में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। वो अब भले ही ये सम्मान लेने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनके नाम के आगे पद्मश्री लगते ही भुलई भाई का नाम भी अमर हो गया। मरणोपरांत पद्म श्री दिये जाने पर भुलई भाई का परिवार भी बेहद खुश नजर आया।
 
भुलई भाई का पीएम मोदी कितना सम्मान करते थे। ये इसी बात से समझ सकते हैं जब देश कोरोना से जूझ रहा था। उस वक्त भी पीएम मोदी ने समय निकाल कर भुलई भाई को फोन किया था। और उनका हाल चाल लिया था।

जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजनीति किया करते थे। उस दौर से भुलई भाई राजनीति से जुड़े थे। जब बीजेपी एक एक सीट जीतने के लिए तरसती थी। जब भुलई भाई दो बार विधायक भी रहे। यही वजह है कि दो सीटों वाली बीजेपी देश की सत्ता में पहुंचने के बावजूद अपने सबसे पुराने कार्यकर्ता के समर्पण और योगदान को नहीं भूली। और खुद मोदी राज में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। 
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