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अग्रिम जमानत के लिए कौन जाता है? पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की याचिका पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने साधा निशाना

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने को लेकर राज्य के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने टिप्पणी करते हुए कहा, "अग्रिम जमानत के लिए कौन जाता है, जिसके खिलाफ वारंट होता है, वही जाता है."

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छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा बालोद जिले के दौरे के क्रम में भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. उन्होंने बालोद के जामड़ी आश्रम पाटेश्वर धाम पहुंचकर माता कौशल्या मंदिर धाम में भगवान शिव का भी अभिषेक किया.

बालोद पहुंचकर डिप्टी सीएम ने किया भगवान शिव जी का अभिषेक

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बालोद के जामड़ी आश्रम पाटेश्वर धाम पहुंचकर माता कौशल्या मंदिर धाम में भगवान शिव जी का अभिषेक किया. साथ ही मातारानी एवं पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन और पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की."

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डिप्टी सीएम ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल पर बोला हमला 

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वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने को लेकर राज्य के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने टिप्पणी करते हुए कहा, "अग्रिम जमानत के लिए कौन जाता है, जिसके खिलाफ वारंट होता है, वही जाता है."

कोर्ट से भूपेश बघेल और बेटे चैतन्य को झटका 

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बता दें कि भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी. कोर्ट ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया और दोनों को हाईकोर्ट जाने को कहा. इस मामले की सुनवाई 6 अगस्त को की जाएगी. पीएमएलए कानून को लेकर कोर्ट ने कहा कि इस कानून पर तभी सवाल क्यों उठते हैं, जब किसी प्रभावशाली व्यक्ति की गिरफ्तारी होती है?

भूपेश बघेल और उनके बेटे की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कई सख्त टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने कहा कि दोनों ने एक ही याचिका में पीएमएलए के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने के साथ-साथ जमानत जैसी व्यक्तिगत राहत की मांग भी की है, जो उचित नहीं है. इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने पिता-पुत्र के सीधे सुप्रीम कोर्ट आने पर भी सवाल उठाया.

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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि जब किसी मामले में कोई प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाता है. अगर हम ही हर मामले की सुनवाई करेंगे, तो अन्य अदालतों का क्या उपयोग रह जाएगा? अगर ऐसा होता रहा तो फिर गरीब लोग कहां जाएंगे? एक आम आदमी और साधारण वकील के पास सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने की कोई जगह ही नहीं बचेगी.

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