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कौन हैं वो मुस्लिम अफसर जिनके नाम से जारी हुई अधिसूचना और पूरे देश में लागू हुआ वक्फ संशोधन कानून ?

एक अधिसूचना के साथ पूरे देश में वक्फ संशोधन कानून लागू हो गया तो वहीं सबसे बड़ी बात ये रही कि इस अधिसूचना को जारी करने वाले अफसर भी खुद एक मुसलमान हैं, जानिए क्या है पूरा मामला ?

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मोदी सरकार संसद में वक्फ संशोधन बिल लेकर आई तो सड़क से लेकर संसद तक इसका भारी विरोध होने लगा। यहां तक कि पूरे विपक्ष ने इस बिल को रोकने के लिए एक साथ मोर्चा खोल दिया, लेकिन इसके बावजूद वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए। क्योंकि मोदी सरकार ने संसद से वक्फ संशोधन बिल पास करवाने की जिम्मेदारी अपने सबसे भरोसेमंद नेता और देश के गृहमंत्री अमित शाह को दी थी, जिनके नेतृत्व में वक्फ संशोधन बिल बहुमत के साथ संसद के दोनों सदनों से पास हो गया और 8 अप्रैल से पूरे देश में लागू भी कर दिया गया।

जिस वक्फ संशोधन बिल का सड़क से लेकर संसद तक भारी विरोध किया गया, वह अब कानून का रूप ले चुका है। और भारी विरोध के बावजूद आठ अप्रैल को मोदी सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते हुए इसे पूरे देश में लागू कर दिया, जिसमें कहा गया—

देश में लागू हुआ वक्फ संशोधन कानून

केंद्र सरकार, वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 (2025 का 14) की उप-धारा (2) की धारा 1 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, 8 अप्रैल, 2025 को वह तारीख नियुक्त करती है जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।

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इस अधिसूचना के साथ पूरे देश में वक्फ संशोधन कानून लागू हो गया। खास बात ये रही कि इस अधिसूचना को जारी करने वाले अधिकारी भी एक मुस्लिम हैं, जिनका नाम है शेरशा सी. शेख मोहिद्दीन, जो भारत सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं। इसी वजह से जब अधिसूचना जारी की गई, तो उस पर संयुक्त सचिव शेरशा सी. शेख मोहिद्दीन का नाम था। इस अधिसूचना के बाद वक्फ संशोधन कानून देशभर में लागू हो गया, जिसे अब हर नागरिक को मानना ही होगा क्योंकि यह संसद द्वारा पारित कानून है।

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मोदी सरकार ने भले ही वक्फ संशोधन कानून देश में लागू कर दिया हो, लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। संसद में इस बिल को रोकने में असफल विपक्षी पार्टियों के साथ ही कई मुस्लिम संगठन अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं, जहां 16 अप्रैल को सुनवाई होनी है।

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एक तरफ जहां विपक्ष और मौलाना जैसे धार्मिक नेता इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार ने भी कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट अब सरकार का पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं कर सकता। ऐसे में अब सबकी निगाहें 16 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी होंगी, जब वक्फ संशोधन कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

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