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बात दलित के सम्मान की आई तो Mayawati भी BJP के साथ खड़ी हो गईं | Haryana Election

दलित नेता कुमारी शैलजा के अपमान का आरोप लगाकर बीजेपी जहां कांग्रेस को दलित विरोधी बताने में लगी हुई है तो वहीं देश की सबसे बड़ी दलित नेता और यूपी की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती भी इस मामले में बीजेपी के साथ खड़ी हो गईं और कांग्रेस को खूब लताड़ा !

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कांग्रेस के जन नायक कहे जाने वाले Rahul Gandhi सड़क से लेकर संसद तक। दलित। शोषित। और वंचितों के लिए आवाज उठाने की खूब बात करते हैं। लेकिन बात अपनी ही पार्टी कि दलित नेता को सम्मान देने की आती है।तब यही राहुल गांधी खुद चुप्पी साध लेते हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण है राजधानी दिल्ली का पड़ोसी राज्य हरियाणा। जहां विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।

दरअसल बात जब हरियाणा कांग्रेस की आती है तो।  एक ही परिवार का हरियाणा कांग्रेस में सबसे ज्यादा दबदबा नजर आता है। वो है हुड्डा परिवार। यही वजह है कि चुनाव से पहले ही ये दावा किया जा रहा है कि हरियाणा में अगर कांग्रेस जीत हासिल करती है तो भूपेंद्र हुड्डा या फिर उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा ही मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन हुड्डा परिवार की इस दावेदारी को अब कांग्रेस में ही चुनौती मिलने लगी है। और ये चुनौती दी है कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित नेताओं में से एक कुमारी शैलजा। जिन्होंने खुद ये बयान दिया है कि उनकी भी इच्छा है कि वो भी मुख्यमंत्री बनें। लेकिन अब उनकी इसी इच्छा को लेकर कांग्रेस में ही बवाल मचा हुआ है। जिसकी वजह से खुद कुमारी शैलजा पिछले कई दिनों से नाराज चल रही हैं। यहां तक कि चुनाव प्रचार में भी शामिल नहीं हो रही हैं। जिसकी वजह से बीजेपी को भी कांग्रेस को दलित विरोधी बताने का मौका मिल गया।

दलित नेता कुमारी शैलजा के अपमान का आरोप लगाकर बीजेपी जहां कांग्रेस को दलित विरोधी बताने में लगी हुई है। तो वहीं देश की सबसे बड़ी दलित नेता और यूपी की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी अब कुमारी शैलजा मामले में एंट्री मारी है। और बीजेपी के साथ साथ उन्होंने भी कुमारी शैलजा के बहाने कांग्रेस को दलित विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक ट्वीट में मायावती ने लिखा।

"देश में अभी तक के हुए राजनीतिक घटनाक्रमों से यह साबित होता है कि खासकर कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियों को अपने बुरे दिनों में तो कुछ समय के लिए इनको दलितों को मुख्यमंत्री व संगठन आदि के प्रमुख स्थानों पर रखने की जरूर याद आती है लेकिन ये पार्टियां, अपने अच्छे दिनों में, फिर इनको ज्यादातर दरकिनार ही कर देती हैं और इनके स्थान पर, फिर उन पदों पर जातिवादी लोगों को ही रखा जाता है, जैसा कि अभी हरियाणा प्रदेश में भी देखने के लिए मिल रहा है, जबकि ऐसे अपमानित हो रहे दलित नेताओं को अपने मसीहा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर से प्रेरणा लेकर इन्हें खुद ही ऐसी पार्टियों से अलग हो जाना चाहिए और अपने समाज को फिर ऐसी पार्टियों से दूर रखने के लिए उन्हें आगे भी आना चाहिए"

मायावती खुद एक दलित नेता हैं। यही वजह है कि जैसे ही हरियाणा में कांग्रेस की दलित नेता कुमारी शैलजा के कथित अपमान की बात सुनीं तो।  कांग्रेस पर ही भड़क गईं। और उसे दलित विरोधी पार्टी बताते हुए कुमारी शैलजा को लगे हाथ नसीहत भी दे डाली कि जिस पार्टी में दलितों का अपमान होता है। उस पार्टी को तुरंत छोड़ देनी चाहिए। और अपने समाज को भी ऐसी पार्टियों से दूर रहने के लिए कहना चाहिए। एक तरफ जहां मायावती ने कुमारी शैलजा के मामले पर कांग्रेस को लताड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी तो वहीं दूसरी तरफ हरियाणा के पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तो उन्हें बीजेपी में शामिल होने का ऑफर भी दे चुके हैं। यानि कुमारी शैलजा के मुद्दे पर बीजेपी और बीएसपी दोनों एक साथ आ गई हैं।  वैसे आपको क्या लगता है। कुमारी शैलजा को कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो जाना चाहिए। 

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