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'जब नाश मनुज पर छाता है...' ऑपरेशन सिंदूर पर प्रेस ब्रीफिंग में 'दिनकर जी' की कविता के जरिए भारतीय सेना ने बता दिया PAK का भविष्य

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भारतीय सेना ने सोमवार को संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग की. इस दौरान भारतीय सेना ने सबूत के साथ दिखाया कि किस तरह से पाकिस्तान की कमर तोड़ी गई है. लेकिन इस प्रेस ब्रीफिंग जो सेंटर ऑफ अट्रैक्शन रहा वो था महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता, जिसने वीडियो में जोश भर दिया.

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पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में बसे आतंकी ठिकानों को ठिकाने लगाने के लिए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया था. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भारतीय सेना ने सोमवार को संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग की. इस दौरान भारतीय सेना ने सबूत के साथ दिखाया कि किस तरह से पाकिस्तान की कमर तोड़ी गई है. मौजूद स्थिति के बारे में भी जानकारी दी गई. लेकिन इस प्रेस ब्रीफिंग जो सेंटर ऑफ अट्रैक्शन रहा वो था महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता, जिसने वीडियो में जोश भर दिया.

'दिनकर' की कविता से वीडियो में भरा जोश 
कविवर रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध कविता की पंक्ति,  'जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है' के साथ इंडियन आर्मी के ऑपरेशन सिंदूर का वीडियो बहुत प्रभावी और जोशिला लग रहा था. यह कविता वीरता के साथ-साथ रौद्र रूप में लिखी गई है. दिनकर की खंडकाव्य कृति 'रश्मिरथी' में तब सामने आती है, जब श्रीकृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर पहुंचे होते हैं और यह समझाने का प्रयास कर रहे होते हैं कि 'युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है और शांति सर्वोपरि है.' कृष्ण पांडवों के लिए दुर्योधन से सिर्फ पांच गांव ही मांगते हैं और कहते हैं कि इसके अलावा अपनी तमाम धरती वह खुद रख ले. 
इस कविता के माध्यम से दिनकर यहां कहते हैं, 
'दो न्याय अगर तो आधा दो,
पर इसमें भी यदि बाधा हो
तो दे दो केवल पांच ग्राम
रखो अपनी धरती तमाम’

'हम वहीं खुशी से खाएंगे, 
परिजन पर असि न उठाएंगे,
दुर्योधन वह भी दे न सका
आशीष समाज की ले न सका

उल्टे हरि को बांधने चला
जो था असाध्य साधने चला
जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है.’

बता दें कि प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देते हुए कहा कि ‘पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादी गतिविधियों का चरित्र बदल गया है. निर्दोष नागरिकों पर हमले किए जा रहे थे... 'पहलगाम तक पाप का यह घड़ा भर चुका था’

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