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Ashutosh बोले- लोग मुझे कलुआ कहते हैं तो Chitra Tripathi की छूट गई हंसी!
जब सैम पित्रोदा जैसे नेता कांग्रेस सरकारों के सलाहकार रहे हों तो उन सरकारों की हमारे देश के नागरिकों के लिए क्या मानसिकता रही होगी हमारे देश के लोगों को चाइनीज और अफ्रीकी बताने वाले सैम पित्रोदा के इसी नस्लभेदी बयान को लेकर जब एक न्यूज चैनल पर बहस छिड़ी तो कभी आम आदमी पार्टी के नेता रहे आशुतोष का दर्द छलक पड़ा और कहने लगे लोग मुझे कलुआ कहते हैं
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जिस कांग्रेस ने दशकों तक देश पर राज किया, जिस कांग्रेस ने नेहरू, इंदिरा, राजीव, मनमोहन जैसे प्रधानमंत्री दिये | उसी कांग्रेस के लिए काम करने वाले सैम पित्रोदा जैसे नेताओं की जरा सोच देखिये | उन्हें हमारे नॉर्थ ईस्ट के लोग चाइनीज दिखते हैं और साउथ के लोग अफ्रीकी दिखते हैं | ऐसी मानसिकता वाले सैम पित्रोदा कभी राजीव गांधी के सलाहकार रहे, तो कभी मनमोहन सिंह ने अपना सलाहकार बनाया | इसी बात से समझ सकते हैं कि जब सैम पित्रोदा जैसे नेता कांग्रेस सरकारों के सलाहकार रहे हों तो उन सरकारों की हमारे देश के नागरिकों के लिए क्या मानसिकता रही होगी | हमारे देश के लोगों को चाइनीज और अफ्रीकी बताने वाले सैम पित्रोदा के इसी नस्लभेदी बयान को लेकर जब एक न्यूज चैनल पर बहस छिड़ी तो कभी आम आदमी पार्टी के नेता रहे आशुतोष का दर्द छलक पड़ा और कहने लगे लोग मुझे कलुआ कहते हैं |
आशुतोष को तो आप अच्छी तरह से जानते ही होंगे | कभी वो टीवी चैनलों पर देश दुनिया की खबरें बताया करते थे, तो कभी राजनीति में उतर कर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का झंडा उठाए घूमते थे | जब आम आदमी पार्टी से भी मन भर गया तो केजरीवाल का साथ छोड़ कर एक बार फिर से खबरों की दुनिया में लौट आए | लेकिन इस बार उन्हें पत्रकार के तौर पर कम, मोदी विरोधी पत्रकार के रूप में ज्यादा जाना जाने लगा | क्योंकि उनकी ज्यादातर खबरों में मोदी सरकार की ही आलोचना होती है | यही वजह है कि इस बार जब सैम पित्रोदा के रंगभेदी बयान को लेकर आजतक पर डिबेट छिड़ी तो बतौर राजनीतिक विश्लेषक इस डिबेट में शामिल हुए आशुतोष कांग्रेस को कोसने की बजाए अपना ही दुखड़ा बताते हुए कहने लगे कि - ‘चित्रा जी मैं तो कभी इस बारे में बोलता ही नहीं कि मुझे रोज नस्लभेद का शिकार होना पड़ता है रोज मुझे कलुआ कह कर लोग बुलाते हैं | आप फेसबुक पर चले जाइये, आप ट्विटर पर चले जाइये, कलुआ, कालू पता नहीं क्या-क्या मेरे बारे में कहते हैं, मैं तो बुरा नहीं मानता इस बात का, अगर मैं आपको दिखा दूं तो आपको अंदाजा लग जाएगा किस पार्टी के, किस विचारधारा के लोग हैं|’
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आशुतोष के इतना कहते ही एंकर चित्रा त्रिपाठी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाईं | तो वहीं कुछ ही देर बाद उन्होंने जवाब दिया कि - ‘इसी के खिलाफ तो लड़ाई लड़नी है न, अगर कोई रंगभेदी टिप्पणी करता है तो उसमें आपकी कोई व्यक्तिगत बात नहीं है, आशुतोष को बुरा नहीं लगता होगा लेकिन देश में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन पर आप रंगभेदी टिप्पणी करेंगे तो अंदर तक चुभ जाती हैं बातें, आशुतोष जी आपको फर्क नहीं पड़ता लेकिन हम इस तरह का समाज नहीं बना सकते, जहां रंग के आधार पर लोग एक दूसरे पर टिप्पणी करें |’
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रंगभेदी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस को लताड़ने की बजाए खुद ही अपना दुखड़ा रोने वाले आशुतोष को जहां चित्रा त्रिपाठी ने मुंहतोड़ जवाब दिया तो वहीं सोशल मीडिया पर भी तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं | पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा -‘बहुत बड़े पत्रकार हैं, आज उनका दर्द छलक आया, सोशल मीडिया पर रोज मुझे कलुआ, कालू बोला जाता है, नस्लभेद का शिकार होना पड़ता है, एंकर जी भी मुस्कुराने को बाध्य हो गयीं हालांकि अपने ऊपर कटाक्ष करने को बड़ा दिल चाहिए, ये अच्छी बात नहीं है, इसकी निंदा की जानी चाहिये|’
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शिवम त्यागी नाम के एक यूजर ने लिखा - ‘आशुतोष जी को कालू, कलवा इस तरह के शब्द आप सब लोगों को नहीं बोलना चाहिए, इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिये और छुप छुप कर पैनल पर जो हंस रहे हैं उनकी भी कड़ी निंदा |’
अमित नाम के एक यूजर ने लिखा - ‘कलुवा कालू आज के बाद कोई नहीं बुलाएगा, बेचारे आशुतोष जी परेशान हैं |’
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आशुतोष ने जब खुद को कलुआ और कालू कहे जाने को लेकर दर्द बयां किया तो सोशल मीडिया पर कुछ इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं | क्योंकि सोशल मीडिया पर ज्यादातर लोग आशुतोष को भी रवीश कुमार, अभिसार शर्मा और अजीत अंजुम जैसे कथित मोदी विरोधी पत्रकारों की श्रेणी में देखते हैं | इसीलिये उनके मोदी विरोधी ट्वीट या खबरों पर लोग कलुवा या कालू लिख कर ट्रोल करते रहते हैं | आप विरोध करिये, तथ्यों के आधार पर, वैचारिक आधार पर, लेकिन इस तरह से किसी पर रंगभेदी या नस्लभेदी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए | इस तरह की घटिया सोच की हमारे समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए | इससे पहले जब सीतापुर की प्राची निगम ने दसवीं में टॉप किया था उन्हें भी इसी तरह से रंगभेदी टिप्पणी का सामना करना पड़ा था | लोग उनकी सफलता को कम उनके रंग रूप को लेकर ज्यादा बातें करने लगे थें | जिस पर प्राची निगम को कहना पड़ा था कि ‘मेरे एक दो नंबर कम आते तो अच्छा रहता, लोगों का ध्यान मेरी शक्ल पर नहीं जाता, हाईस्कूल में टॉप करने बाद ट्रोल करने वालों ने ही मुझे पहली बार अपने चेहरे पर उगे लंबे बालों का अहसास करवाया |’
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जब रंगभेद या नस्लभेदी टिप्पणी किसी पर की जाती है तो इसी तरह का दर्द होता है लेकिन शायद कांग्रेस नेताओं को ये बात नहीं मालूम | इसीलिये पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मनमोहन सिंह के सलाहकार रहे सैम पित्रोदा हमारे देश के लोगों को चाइनीज और अफ्रीकी बोलकर उनके रंगों का मजाक उड़ाते हैं |