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Kejriwal जो चाहते थे वही हुआ, AAP के ‘जाल’ में BJP बुरी तरह फंस गई !

Delhi Election से पहले ही आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अब पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना का ऐलान करके बीजेपी को उसी की हिंदुत्व वाली पिच पर बुरी तरह से फंसा दिया है और अब हिंदुत्व की बात करने वाली बीजेपी इमामों की बात करने लगी है !

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क्या कभी सपने में भी आपने सोचा था कि डंके की चोट पर हिंदुत्व की राजनीति करने वाली बीजेपी। मस्जिदों के इमामों के हक के लिए आवाज उठाएगी। शायद नहीं सोचा होगा। लेकिन यकीन मानिये राजधानी दिल्ली में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के बीच अब यही सब हो रहा है। हिंदुत्व की बात करने वाली बीजेपी को अब मौलाना और इमामों की चिंता सताने लगी है।

दरअसल दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही जबरदस्त तैयारी में जुटे अरविंद केजरीवाल लगातार योजना पर योजना का ऐलान कर रहे हैं। जिससे चुनाव से पहले ही वोटरों को साध सकें। कुछ ही दिनों पहले जहां महिला सम्मान योजना। संजीवनी योजना का ऐलान कर बीजेपी की सांसें रोक दी थी। तो वहीं अब साधु संतों और पुजारियों के लिए पुजारी ग्रंथी योजना का ऐलान करके ऐसा लग रहा है बीजेपी के कोर वोट बैंक पर ही करारी चोट कर दी है।

केजरीवाल ने जैसे ही मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारे के ग्रंथियों को हर महीने 18 हजार रुपये सम्मान राशि देने का ऐलान किया। साधु संतों ने भी उनके इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया।

दिल्ली के पुजारियों का ये बयान बता रहा है कि केजरीवाल ने हिंदुओं और सिखों का वोट साधने के लिए कितना बड़ा दांव खेल दिया है। और अब यही बीजेपी के लिए सबसे बड़ी परेशानी बताई जा रही है। शायद यही वजह है कि बात बात पर हिंदुओं की बात करने वाली बीजेपी खुद पुजारियों के हित में लिये गये फैसले का समर्थन करने की बजाए इसके विरोध में उतर गई। वो भी सिर्फ इसलिये।क्योंकि ये ऐलान सत्ता धारी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किया है। बात यहीं खत्म नहीं होती। एक तरफ जहां बीजेपी पुजारियों को 18000 रुपये महीना दिये जाने के वादे का विरोध कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ सैलरी की मांग कर रहे मस्जिदों के इमामों के समर्थन में उतर गई है। और बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने खुद एक बयान में कहा कि। "अरविंद केजरीवाल ने 10 साल बाद मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथियों को ठगने के लिए नई योजना की घोषणा की है, लेकिन दिल्ली में कितने पुजारी और ग्रंथी हैं, इसका इन्हें पता तक नहीं, चुनाव से पहले झूठे वादों की झड़ी लगा दी गई है, वैसे पिछले 17 महीनों से इमामों को तनख्वाह भी नहीं दी गई है और वे लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, दिल्ली वाले जानते हैं कि हिंदू विरोधी ‘आप’ की यह घोषणा भी केवल हवा-हवाई है"

बीजेपी को दिल्ली के इमामों की सैलरी की चिंता सताई तो आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी मैदान में उतर गये और जोरदार तंज मारते हुए लिखा। "बौखलाये भाजपाई पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना का विरोध करने के लिए मैदान में कूद गए हैं, भाजपाइयों 22 राज्यों में तुम्हारी सरकार है तुम्हारे अंदर हिम्मत हो तो ये योजना लागू करके दिखाओ"

ऐसा लग रहा है पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना के विरोध में उतरी बीजेपी अब खुद ही आम आदमी पार्टी के जाल में फंस गई है। क्योंकि आप सांसद संजय सिंह ने बीजेपी से ही पूछ लिया कि जिन राज्यों में आपकी सरकार है। वहां पर इस योजना को क्यों लागू नहीं किया। हिम्मत है तो लागू करके दिखाओ। ऐसे में ये चैलेंज भी बीजेपी स्वीकार करने की हालत में नहीं है क्योंकि हकीकत यही है कि बीजेपी शासित किसी राज्य में पुजारियों को सैलरी नहीं दी जाती है। तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में केजरीवाल ने पुजारियों को 18 हजार रुपये महीना सम्मान राशि देने का ऐलान कर दिया। जिससे अब यही समझ में नहीं आ रहा है कि इस फैसले का विरोध करे या फिर समर्थन। जिसका मतलब साफ है कि पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना के ऐलान से बीजेपी कहीं ना कहीं केजरीवाल के दांव में बुरी तरह से फंस गई है।

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