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क्या है खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स, जिसके आतंकियों को कर दिया गया ढेर?

पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स (KZF) के तीन आतंकियों को मार गिराया। ये आतंकी पंजाब के गुरदासपुर में हुए ग्रेनेड हमलों के आरोपी थे। मुठभेड़ पीलीभीत में हुई, जहां पुलिस ने आतंकियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में तीनों संदिग्ध मारे गए।

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पंजाब और उत्तर प्रदेश में सुरक्षा बलों के साहसिक ऑपरेशन ने खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स (KZF) के तीन आतंकियों को ढेर कर दिया। यह घटना आतंकवाद के खिलाफ चल रही जंग का एक और बड़ा उदाहरण है। पंजाब के गुरदासपुर में हुए ग्रेनेड हमलों के आरोपियों को पकड़ने के लिए पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस ने मिलकर एक ऑपरेशन चलाया। यह मुठभेड़ उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में हुई, जहां तीनों संदिग्ध आतंकियों को पुलिस ने मार गिराया।
क्या है खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स?
खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स (KZF) एक आतंकवादी संगठन है, जिसका उद्देश्य भारत में खालिस्तान के नाम से एक अलग राज्य बनाना है। यह संगठन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के समर्थन से संचालित होता है। KZF को 1967 में बनाए गए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया गया है।

वैसे आपको बता दे कि यह मुठभेड़ रविवार रात (22 दिसंबर, 2024) को हुई। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने इसे एक बड़ी सफलता करार दिया। पुलिस के मुताबिक, तीनों आतंकी गुरदासपुर में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमले में शामिल थे। जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की, तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गुरविंदर सिंह (25), वीरेंद्र सिंह उर्फ ​​रवि (23), और जसप्रीत सिंह उर्फ ​​प्रताप सिंह (18) मारे गए। मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने एके सीरीज की राइफलें, ग्लॉक पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया। पुलिस का मानना है कि ये हथियार उन्हें पाकिस्तान से मिले थे।
KZF के खतरनाक मंसूबे
KZF ने इस साल पंजाब में तीन ग्रेनेड हमले किए। इन हमलों में, गुरदासपुर की पुलिस चौकियों और अमृतसर के इस्लामाबाद पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया। हालांकि इन घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इससे खालिस्तानी आतंकवादियों की बढ़ती गतिविधियों का अंदेशा हुआ। KZF का मुखिया रंजीत सिंह नीता है, जो जम्मू के सुंबल कैंप का निवासी था। अब वह पाकिस्तान में रहता है और वहां से अपने संगठन का संचालन करता है। नीता 1988-1999 के बीच हुए कई बम धमाकों का मुख्य आरोपी है।

KZF का मुख्य ऑपरेशन क्षेत्र पंजाब, जम्मू और दिल्ली है। हालांकि, यह संगठन नेपाल से भी अपने ऑपरेशन चलाता रहा है। 2000 में दिल्ली पुलिस ने तीन KZF आतंकियों को गिरफ्तार कर नेपाल मॉड्यूल को बेअसर किया था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई KZF को फंडिंग और हथियार मुहैया कराती है। यह संगठन जम्मू-कश्मीर के अन्य आतंकवादी समूहों के साथ भी संबंध रखता है। सूत्रों के मुताबिक, KZF अपने नेटवर्क को जम्मू में फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। 2005 में, राम मंदिर पर विफल आतंकी हमले के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने KZF की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की।

गुरदासपुर से लेकर पीलीभीत तक चलाया गया यह ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय और सतर्कता का परिणाम है। उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने इसे एक साहसिक कदम बताया, जिसने खालिस्तानी आतंकवादियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

KZF जैसे आतंकवादी संगठन देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए बड़ा खतरा हैं। पंजाब पुलिस और यूपी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस घटना के बाद KZF के मंसूबों पर बड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन यह भी तय है कि ऐसे संगठन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नए रास्ते खोजेंगे। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना होगा और ऐसे खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स जैसे संगठन न केवल हमारे देश की सुरक्षा के लिए बल्कि समाज की शांति और सद्भाव के लिए भी बड़ा खतरा हैं। पीलीभीत में हुए इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि देश की सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह घटना न केवल पुलिस की वीरता का प्रतीक है, बल्कि देश के नागरिकों के लिए एक संदेश भी है कि आतंक के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी।
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