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DIVS क्या है,, जिससे साइबर क्राइम पर लगेगी लगाम! नया सिम लेने के नियम हुए सख्त

भारत में साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने नया डिजिटल इंटीग्रेटेड वेरिफिकेशन सिस्टम (DIVS) लागू कर दिया है। अब नया सिम कार्ड लेना पहले से ज्यादा कठिन हो गया है। ग्राहकों को आधार-बेस्ड बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना होगा, और उनकी 10 अलग-अलग एंगल से फोटो खींची जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे जेल में कैदियों की तस्वीर ली जाती है।

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देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसी को रोकने के लिए भारत सरकार ने नया डिजिटल इंटीग्रेटेड वेरिफिकेशन सिस्टम (DIVS) लागू करने का फैसला किया है। यह नया सिम कार्ड वेरिफिकेशन सिस्टम है, जो आधार-बेस्ड बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पर काम करेगा। इससे फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए सिम कार्ड्स का गलत इस्तेमाल रोकने में मदद मिलेगी।
अब, अगर आप नया सिम कार्ड खरीदने जा रहे हैं, तो पहले से ज्यादा सख्त और लंबी जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। टेलीकॉम कंपनियों को अब सिम कार्ड लेने वाले ग्राहक की 10 अलग-अलग एंगल से फोटो खींचनी होगी, ठीक वैसे ही जैसे किसी कैदी की तस्वीर जेल में ली जाती है! सरकार के इस फैसले ने टेलीकॉम सेक्टर और आम जनता के बीच हलचल मचा दी है।
कैसे काम करेगा DIVS?
इस सिस्टम के लागू होने के बाद नया सिम कार्ड लेना इतना आसान नहीं रहेगा। टेलीकॉम कंपनियों को अब कई लेयर्स में कस्टमर की पहचान को वेरिफाई करना होगा। इसे लेने के लिए सख्त शर्तें है, जैसे बिना आधार नंबर के अब सिम कार्ड नहीं मिलेगा। ग्राहक का आधार नंबर और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन) जरूरी होगा। सिम कार्ड लेने वाले व्यक्ति की 10 अलग-अलग एंगल से फोटो खींची जाएगी। यह नियम कैदी की तस्वीर खींचने जैसी प्रक्रिया होगी। अगर किसी व्यक्ति के पास पहले से कई सिम कार्ड हैं, तो उसकी विस्तृत जांच होगी। अगर कोई संदेहास्पद पाया जाता है, तो उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड देने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अब यदि कोई दुकानदार गलत तरीके से सिम कार्ड बेचेगा तो उस पर भारी जुर्माना लगेगा, यहां तक कि जेल भी हो सकती है।
PMO ने खुद दिए हैं आदेश!
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने दूरसंचार विभाग (DoT) को इस नए सिस्टम को लागू करने का आदेश दिया है। सीधे PMO के हस्तक्षेप के बाद, सभी टेलीकॉम कंपनियों को यह नियम फॉलो करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे साइबर क्राइम, ऑनलाइन धोखाधड़ी, फेक कॉल और फर्जी सिम कार्ड्स से होने वाले अपराधों पर रोक लगेगी। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि DIVS लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी? तो आपको बता दें कि भारत में पिछले कुछ सालों में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। अपराधी नकली पहचान पत्र बनाकर फर्जी सिम कार्ड खरीद लेते हैं और फिर धोखाधड़ी, जबरन वसूली और साइबर क्राइम को अंजाम देते हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 2.50 करोड़ से अधिक फर्जी सिम कार्ड्स ब्लॉक किए जा चुके हैं। फाइनेंशियल फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए 90% से ज्यादा सिम कार्ड्स नकली दस्तावेजों से खरीदे गए थे। बैंक धोखाधड़ी, फिशिंग स्कैम और ऑनलाइन ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सरकार को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
कैसे बदलेगा सिम कार्ड लेने का प्रोसेस?
अब नया सिम कार्ड लेने की प्रक्रिया ज्यादा लंबी और सिक्योरिटी-फोकस्ड होगी। 
ग्राहक को अपना आधार नंबर देना होगा। बिना आधार के अब सिम कार्ड नहीं मिलेगा।
टेलीकॉम कंपनी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन) करेगी, जिससे असली पहचान की पुष्टि होगी।
सिम लेने वाले व्यक्ति की 10 अलग-अलग एंगल से तस्वीरें खींची जाएंगी, ताकि कोई फर्जीवाड़ा न हो सके।
ग्राहक के पुराने सिम कार्ड्स की भी जांच की जाएगी, यह देखने के लिए कि उसने पहले से कितने सिम कार्ड लिए हुए हैं।
कस्टमर के सभी डिटेल्स डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम में स्टोर होंगे, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां इन्हें ट्रैक कर सकें।
नए नियमों से क्या फायदे होंगे?
नए वेरिफिकेशन सिस्टम के लागू होने से फर्जी सिम कार्ड पर होने वाले साइबर अपराधों पर रोक लगेगी। बैंक धोखाधड़ी, फिशिंग स्कैम और ऑनलाइन ठगी को अंजाम देना मुश्किल हो जाएगा। अब कोई भी अपराधी नकली पहचान का इस्तेमाल करके सिम कार्ड नहीं खरीद पाएगा। इसका मतलब यह है कि क्रिमिनल्स के लिए डिजिटल फ्रॉड करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। हर सिम कार्ड पूरी तरह से वेरीफाई होगा, जिससे ग्राहकों को अधिक सुरक्षा मिलेगी। अब फर्जी नंबरों की बिक्री नहीं होगी, जिससे टेलीकॉम इंडस्ट्री की साख बनी रहेगी।
हालांकि सरकार का यह कदम सराहनीय है, लेकिन इससे कुछ चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं। बायोमेट्रिक डाटा की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। अगर यह डाटा लीक हो गया तो बड़ा साइबर अटैक हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना मुश्किल हो सकता है। छोटे कस्बों और गांवों में आधार ऑथेंटिकेशन सेंटर की कमी है। नया सिस्टम लागू करने में खर्च भी बहुत ज्यादा आएगा। सभी टेलीकॉम कंपनियों को नए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने होंगे, जो बेहद महंगे हैं। सरकार का दावा है कि यह सिस्टम जनता की सुरक्षा बढ़ाएगा, लेकिन लोगों के लिए नया सिम लेना अब आसान नहीं रहेगा। अब हर सिम कार्ड के लिए आधार और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन जरूरी हो गया है, जिससे लोगों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
DIVS (Digital Integrated Verification System) लागू होने से भारत में फर्जी सिम कार्ड से होने वाले साइबर अपराधों पर लगाम लगेगी। अब नया सिम कार्ड लेना कठिन लेकिन ज्यादा सुरक्षित होगा। हालांकि, इससे आम लोगों को कुछ असुविधा भी हो सकती है।
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