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Bhojpuri Cinema में अश्लीलता पर क्या बोले Pawan Singh, Nirahua और Ravi Kishan ?

भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता आई कैसे जिस पर भोजपुरी सिनेमा के साथ साथ बॉलीवुड में भी काम करने वाले दिग्गज कलाकार रवि किशन और भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ने गजब का तर्क दिया है तो वहीं रवि किशन ने क्या कहा, देखिये ये खास रिपोर्ट !

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भोजपुरी भाषा में जितनी मिठास है।भोजपुरी सिनेमा ने उसे उतना ही बदनाम भी किया है। भोजपुरी गाने के नाम पर जिस तरह की अश्लीलता परोसी जा रही है। उसे देख कर लोग अब भोजपुरी भाषा से भी चिढ़ने लगे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भोजपुरी सिनेमा में ये अश्लीलता आई कैसे। जिस पर भोजपुरी सिनेमा के साथ साथ बॉलीवुड में भी काम करने वाले दिग्गज कलाकार रवि किशन और भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ने गजब का तर्क दिया है।


जिस हिंदुस्तान में 35 करोड़ से भी ज्यादा लोग भोजपुरी भाषा बोलते हैं। उसी देश में भोजपुरी भाषा को भोजपुरी सिनेमा ने ही अश्लील गाने परोस कर बदनाम करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर वो चाहे पवन सिंह। निरहुआ। मनोज तिवारी। हों या खेसारी लाल यादव। ऐसा लगता है अश्लीलता ही भोजपुरी गानों की सफलता का पैमाना बन गया है। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि बात जब भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता की आती है तो रवि किशन और निरहुआ जैसे कलाकार बड़ी ही चालाकी से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। तभी तो कुछ ही दिनों पहले जब बीजेपी सांसद और बॉलीवुड के साथ ही भोजपुरी सिनेमा में भी काम करने वाले रवि किशन से जब आज तक पर भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा।"भले ही भोजपुरी सिनेमा ने सामाजिक मुद्दों को उठाया हो और गंभीर सिनेमा बनाया हो लेकिन समय के साथ भोजपुरी सिनेमा अश्लीलता का पर्याय बन गया है, प्रमुख फिल्मों के कई गानों और सीन्स की महिलाओं को एक वस्तु की तरह पेश करने के लिए आलोचना की गई है, दुर्भाग्य से मैं अपने जूनियर्स से थोड़ा दुखी महसूस करता हूं उन्होंने भोजपुरी सिनेमा की प्रतिष्ठा खराब कर दी है, भोजपुरी 25 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है और मुझे इस पर बहुत गर्व है"।

भोजपुरी सिनेमा से अपनी पहचान बनाने वाले रवि किशन अब तक बॉलीवुड में भी कई बड़ी फिल्मों में काम कर चुके हैं। लेकिन जब वो भोजपुरी सिनेमा में काम करते थे तो उनके भी कई ऐसे गाने हैं जिनमें खुलेआम अश्लीलता परोसी गई। लेकिन इसके बावजूद रवि किशन अपने जूनियर कलाकारों पर ही भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता फैलाने के आरोप लगाने लगे। तो वहीं भोजपुरी सिनेमा में रवि किशन के जूनियर दिनेश लाल यादव निरहुआ ने तो अश्लीलता के बारे में अलग ही तर्क दिया।उन्होंने तो ये बात मानने से ही इंकार कर दिया कि भोजपुरी में अश्लीलता है। और इंडिया टीवी को दिये एक इंटरव्यू में बॉलीवुड पर ही बरसते हुए कहा कि।
"जैसे एक पत्नी अपने पति से चोलियां का हुक लगाने में मदद मांगती है तो गाना है लगाई देता चोलियां के ‘हुक राजा जी’. वो किसी और से थोड़े न कहेगी हुक लगाने के लिए, वहीं, हिंदी फिल्मों में ‘चोली के पीछे क्या है’ जैसे गाने हैं, अरे “हम तो चोली में हुक की बात कर रहे हैं आप चोली के नीचे क्या है वो बताइए न?

इतना ही नहीं निरहुआ ने तो यहां तक तर्क दिया कि भोजपुरी सिनेमा को बदनाम किया जा रहा है। और यहां तक कहा कि। "भोजपुरी फिल्मों को बदनाम करने की यह एक बड़ी साजिश है, हम अपनी फिल्में लगभग 1 करोड़ रुपये में बनाते हैं, जबकि उनकी फिल्में 10 करोड़, 20 करोड़, 50 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक के बजट में बनती हैं, जब वे हमारे सिनेमा हॉल में अपनी फिल्में दिखाने की कोशिश करते हैं, तो मालिक कहते हैं, निरहुआ की फिल्म दिखाई जा रही है, हम आपकी नहीं दिखाएंगे, फिर वे भोजपुरी फिल्मों को ‘नीचा’ दिखाने के तरीके खोजते हैं, हर इंटरव्यू में, हर मंच पर, भोजपुरी फिल्मों को अश्लील और अश्लील बताया जाता है, अरे भई देश को फैसला करने दीजिए"।

भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता को लेकर एक तरफ जहां बॉलीवुड में काम करने वाले रवि किशन ने अपने जूनियर कलाकारों पर ठीकरा फोड़ दिया। तो वहीं निरहुआ ने सीधे बॉलीवुड पर ही ठीकरा फोड़ दिया। जबकि भोजपुरी सिनेमा के एक और दिग्गज कलाकार पवन सिंह ने तो यहां तक कहा कि मैंने पांच सौ से ज्यादा भजन गाए हैं। लोग उन्हें क्यों नहीं देखते हैं। लॉलीपॉप गाना ही क्यों देखते हैं। इतना ही नहीं पवन सिंह जहां भी जाते हैं उनसे लॉलीपॉप गाने की डिमांड भी की जाती है। ऐसे में आपको क्या लगता है। भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता की असली वजह क्या है। 
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