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टैरिफ रेट को लेकर Congress ने ऐसा क्या कहा कि भड़क गए Ajeet Bharti
लगता है कांग्रेस नेताओं ने क़सम खा ली है कि हर मुद्दे पर देश की जनता के सामने भ्रामक बातें ही रखनी हैं, तभी तो टैरिफ़ के नाम पर जो जानकारी परोसी जा रही है उस पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं, हालांकि इसी कड़ी में अब पत्रकार अजीत भारती ने कांग्रेस का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है।
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Ajeet Bharti : अभी कुछ दिन पहले की ही तो बात जब कई टेलीकॉम कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ़ के रेट को 15-20 फ़ीसदी तक बढ़ाने का फ़ैसला किया है। ये फ़ैसला 3 जुलाई से लागू भी हो गया। आसान शब्दों में इसे ऐसे समझे कि जो रिचार्ज आप अब तक 300 रूपये का कराते होंगे उसके लिए आपको 50-60 रूपये ज़्यादा देने होंगे। टेलिकॉम कंपनियों के इस फ़ैसले से आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ा, वो बात चलिए समझ आती है लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस बहाने अपनी राजनीति को किस तरह से चमकाया, इसकी बानगी देखने को मिली, लेकिन ये कितनी देर चलता ? Ajeet Bharti जैसे पत्रकारों ने टैरिफ़ रेट के बहाने राजनीतिक रोटियां सेंकने वाली कांग्रेस और उसके नेताओं को जमकर उधेड़कर रख दिया।
रणदीप सुरजेवाला ने तुरंत प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुलाकर रिलायंस जीयो, एयरटेल और वोडाफ़ोन आइडिया का नाम लेकर बड़ा बयान दे दिया। कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला का बयान शेयर करते हुए लिखा- हिंदुस्तान के सेल फोन मार्केट में सिर्फ तीन सेल फोन ऑपरेटर हैं।
• रिलांयस जियो - 48 करोड़ यूजर्स।
• एयरटेल - 39 करोड़ यूजर्स ।
• वोडाफोन आइडिया - 22 करोड़ 37 लाख यूजर्स।
ट्राई की एक रिपोर्ट के अनुसार सेल फोन कंपनियां अपने हर सेल फोन कस्टमर से 152.55 पैसे प्रति माह कमाती हैं।
• 27 जून को रिलायंस जियो ने अपने रेट 12% से 27% बढ़ा दिए।
• 28 जून को एयरटेल ने अपने रेट 11% से 21% बढ़ा दिए।
• 29 जून को वोडाफोन आइडिया ने भी अपने रेट 10% से 24% बढ़ा दिए।
साफ है कि तीनों कंपनियों ने सलाह कर सिर्फ 72 घंटे में सेलफोन चार्जेस बढ़ाने की घोषणा की।रणदीप सुरजेवाला ने क्या कुछ कहा जरा सुन लीजिए।
सुरजेवाला के इस बयान से पत्रकार अजीत भारती तिलमिला गए। पत्रकार ने अपने X अकाउंट पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर ना सिर्फ़ टैरिफ़ के रेट बढ़ने को लेकर बात की बल्कि कांग्रेस को भी जमकर खरी खोटी सुनाई।अजीत भारती ने लिखा- तो क्या अनंत काल तक कॉल-डेटा चार्ज एक ही रहे? किस दुनिया में रहते हैं ये लोग? दूध-फल-सब्जी का दाम बढ़े, पेट्रोल और संपत्ति का बढ़े, टावर मैंटनेंस का बढ़े, इन्हीं कंपनियों में काम करने वालों की सैलरी बढ़े, लेकिन कॉल-डेटा चार्ज न बढ़े! दुनिया में भारत से सस्ता डेटा कहाँ है?
इसके बाद भी जब कांग्रेस ने भ्रम फैलाना बंद नहीं किया तो फिर अजीत भारती ने एक ट्वीट कर पूरी कांग्रेस को पानी पिला दिया। अजीत ने लिखा- कॉन्ग्रेस द्वारा टेलिकॉम कंपनियों के लाभ पर ज्ञान देना मिया खलीफा द्वारा वर्जिनिटी के फायदे गिनवाने जैसा है। टूजी स्पैक्ट्रम आवंटन में ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति से भारतीय दूरसंचार विभाग को वेश्यालय बना कर दलाली का 1.76 लाख करोड़ खा जाने वाली पार्टी डेटा और कॉल टैरिफ बीस प्रतिशत बढ़ाने पर नाच रही है? बात एयरटेल, जियो और वी के लाभ की नहीं है, बात यह है कि इन्हें जनता को बताना है कि हर वस्तु/सेवा या तो मुफ्त हो सकती है, या दस साल पुराने दर पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
ये ₹8500 रुपए बाँटने की बात करते हैं, पर पैसे लाएँगे कहाँ से यह नहीं बताते।
समाजवाद की आड़ में इनका पूरा लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यावसाय संस्कृति को बर्बाद करने का है। बात यह है कि जब हर वस्तु/सेवा में मूल्य वृद्धि हो रही है, तो कस्टमर बेस बढ़ाने के लिए आरंभ में निःशुल्क सेवा देने वाली कंपनियाँ अपने घाटे को पाटने के लिए या लाभ के लिए ही मूल्य एक निश्चित दायरे में क्यों न बढ़ाए? भारत में पहले से ही डेटा और कॉल दर विश्व में सबसे सस्ते दरों में से एक पर उपलब्ध है। ऐसा भी नहीं है कि कंपनियाँ केवल नेट और कॉल पर ही टिके रहेंगे क्योंकि कस्टमर की संख्या एक सीमा के बाद नहीं बढ़ेगी या बहुत कम ही बढ़ेगी। नई तकनीक आएगी, ब्रॉडबैंड की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जिस स्तर का धन लगता है वह कहाँ से आएगा? 6G समेत सैटेलाइट द्वारा हायस्पीड इंटरनेट सेवा के लिए पैसे कहाँ से आएँगे? ये चाहते हैं कि 179 रुपया का पैक कंपनियाँ ढोती रहें और कुछ नया न करे।
जिन्हें मूल्य बढ़ा लग रहा है वो BSNL में पोर्ट करा लें। फ्री मार्केट में सरकार का कार्य न्यूनतम होना चाहिए। जिनका तर्क यह है कि पहले तेरह कंपनियाँ थीं, अब तीन हैं, वो पता कर लें कि वो कंपनियाँ भारत कैसे आई थीं और यहाँ से जाने का कारण क्या रहा। जियो के आने से पहले यही कंपनियाँ हमारा पैसा क्यों काट लेती थी, उसकी सुनवाई नहीं होती थी। डेटा का मूल्य क्या था, वह पता कीजिए। SMS, जिसे भेजने का खर्च नगण्य होता था, उसके पैक का मूल्य याद कीजिए। चूँकि मार्केट में जगह बनाने के लिए जियो ने आरंभ में सब फ्री रखा तो क्या आजीवन फ्री रखे? यही प्रश्न नेटफ्लिक्स के 699, प्राइम के 125 और जियो के 29 रुपए प्रति महीने पर क्यों नहीं पूछ रहे? मार्केट को अपने हिसाब से मूल्य तय करने दीजिए, सबका लाभ है। सरकार इसमें घुसेगी तो गुणवत्ता और अर्थव्यवस्था दोनों की बैंड बज जाएगी। सरकार का कार्य कंपनियों को उच्छृंखल होने से रोकना है, उनका CEO बनना नहीं।
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