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'वहां फिर से डेरा डालना है, वो अपना कमरा है...', संघ प्रमुख मोहन भागवत का PoK पर बड़ा बयान, कहा- उसे वापस लेना है

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारी विद्रोह के बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि PoK भारत का ही हिस्सा है, वो बिछड़ गया था, वो अपना ही एक कमरा है, उसे किसी ने हथिया लिया है, उसे वापस हासिल करना ही होगा, वहां जाकर डेरा डालना है.

Mohan Bhagwat (File Photo)
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विजयादशमी उत्सव के ठीक 3 दिन बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर बड़ा बयान दिया है. सतना में उन्होंने सिंधी समाज का हवाला देते हुए कहा कि PoK अविभाजित भारत है, उसे लेना ही होगा. 

'PoK हमारा ही एक कमरा, वापस लेना होगा'

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, 'बहुत से सिंधी भाई यहां बैठे हैं, मैं बहुत खुश हूं. वे पाकिस्तान नहीं गए थे, वे अविभाजित भारत के थे. हालात ने हमें इस घर में भेज दिया, लेकिन वो घर और ये घर अलग नहीं हैं. पूरा भारत एक ही घर है, बस हमारे घर का एक कमरा किसी ने कब्जा लिया है. वहां मेरी मेज़, कुर्सी और कपड़े रखे थे. अब समय आएगा, जब हमें वो कमरा वापस लेना होगा.'

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संघ प्रमुख ने जैसे ही ये बात कही, कार्यक्रम में मौजूद भीड़ ने उनके इस बयान पर जोरदार तालियां बजाईं. आपको बता दें कि भागवत मध्य प्रदेश के सतना में बाबा मेहर शाह दरबार की नई इमारत के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे.

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पीओके में बीते दिन हुआ भारी विद्रोह

ज्ञात हो कि संघ प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में भीषण हिंसा और पाक आर्मी के खिलाफ विद्रोह हुआ. इस हिंसा में कई लोगों की मौत हो गई है. वहीं सुरक्षाबलों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी झड़पों में अनेक लोग घायल हुए. पीओके के लोगों के आगे इस्लामाबाद को पहली बार झुकना पड़ा है और उनकी मांगे माननी पड़ी हैं.

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'सब सनातनी हिंदू हैं, सब एक हैं'

इस दौरान संघ प्रमुख ने शहर के बीटीआई ग्राउंड में आयोजित विशाल सभा में सामाजिक एकता पर जोर देते हुए अपील की कि "हम सब एक हैं, सभी सनातनी और हिंदू हैं, लेकिन एक अंग्रेज आया और हमें टूटा हुआ दर्पण दिखाकर अलग-अलग कर गया. आज जरूरत है कि हम अच्छा दर्पण देखकर फिर एक हों. यह अच्छा दर्पण हमारी आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे दिखाने वाले हमारे गुरु हैं."

उन्होंने आजकल धर्म और अध्यात्म को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि "अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए धर्म मत छोड़ो, बल्कि अपना अहंकार छोड़ो और 'स्व' (आत्म) को पहचानो. भागवत ने आगे कहा कि अगर हम देश के 'स्व' को लेकर चलेंगे तो हमारे सारे 'स्व' सध जाएंगे."

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'लाख मना करो, दुनिया हिन्दू ही कहती है'

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि "जो लोग सोचते हैं कि वे हिंदू नहीं हैं और विदेश जाते हैं, उन्हें भी हिंदू के रूप में पहचाना जाता है, वे इस बात पर जोर देते रहते हैं कि वे हिंदू नहीं हैं, लेकिन दुनिया उन्हें हिंदू के रूप में पहचानती, उन्हें हिन्दू ही कहती है." उन्होंने आगे कहा कि पूर्वज हमारे आदर्श हैं, गुरु पुत्रों के बलिदान को संपूर्ण देश में माना जाता है, वैभवशाली परंपरा सबको मान्य हैं. ये महापुरुष हमारी राष्ट्रीयता के घटक ही हैं.

उन्होंने आगे कहा कि गुरु पंरपरा के कारण भारत सब प्रकार की परिस्थितियों से पार कर ठीक स्थिति में है. उन्होंने कहा कि "सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए, हमें भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए, भारत विश्व को शांति और समृद्धि की शिक्षा दे सकता है."

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संघ प्रमुख का तीन भाषा फॉर्मूला

देश में पिछले दिनों पैदा हुए भाषा विवाद पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रभाषा हैं. भागवत ने इस दौरान देश के प्रत्येक नागरिक के लिए तीन भाषाओं का मंत्र दिया. उन्होंने कहा, "हर व्यक्ति को कम से-कम तीन भाषाएं आनी चाहिए - घर की भाषा (मातृभाषा), राज्य की भाषा और राष्ट्र की एक संपर्क भाषा."

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आपको बता दें कि इस कार्यक्रम के दौरान दरबार प्रमुख पुरुषोत्तम दास महाराज, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, इंदौर सांसद शंकर लालवानी, सतना मेयर योगेश ताम्रकार समेत कई विधायक, साधु-संत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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