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'हमेशा मिला धोखा, अब भारत नहीं उठाएगा पहला कदम...', शशि थरूर ने एक बार फिर याद दिलाई पाकिस्तान की असली फितरत
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पाकिस्तान पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत अब संबंध सामान्य करने का पहला कदम नहीं उठाएगा. बार-बार विश्वासघात झेलने के बाद अब जिम्मेदारी पाकिस्तान की है कि वह अपनी धरती से आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करे. थरूर ने याद दिलाया कि नेहरू-लियाकत समझौते से लेकर वाजपेयी और मोदी की लाहौर यात्राओं तक भारत के प्रयासों को धोखा मिला है.
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भारत और पाकिस्तान के रिश्ते दशकों से तनाव, विश्वासघात और संघर्ष की कहानी रहे हैं. हर बार भारत की ओर से दोस्ती और शांति का हाथ बढ़ाया गया, लेकिन इसके जवाब में सीमा पार से आतंक और धोखे की घटनाएं सामने आईं. इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का ताज़ा बयान एक बार फिर चर्चा में है. तिरुवनंतपुरम से सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता थरूर ने मंगलवार को साफ कहा कि अब भारत पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने का पहला कदम कभी नहीं उठाएगा.
पाकिस्तान को दिखानी होगी ईमानदारी
शशि थरूर ने कहा कि भारत ने 1950 में जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली खान के समझौते से लेकर 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा और 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा तक, हमेशा रिश्तों को सामान्य बनाने की पहल की. लेकिन हर बार जवाब में भारत को धोखा ही मिला. थरूर का कहना है कि अब जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है. उसे अपनी धरती पर पल रहे आतंकवादी ढांचे को खत्म करना होगा. उन्होंने साफ कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान में मौजूद 52 आतंकी संगठनों और लोगों की सूची जारी की है. पाकिस्तान अच्छी तरह जानता है कि वे कहां हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती.
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पहला कदम अब भारत नहीं उठाएगा
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थरूर ने दो टूक कहा कि अगर पाकिस्तान वाकई रिश्तों को बेहतर बनाना चाहता है, तो उसे सबसे पहले इन आतंकी कैंपों को बंद करना होगा, मास्टरमाइंड्स को गिरफ्तार करना होगा और दुनिया को ईमानदारी दिखानी होगी. उन्होंने जोर दिया कि अब भारत इंतजार की स्थिति में रहेगा और पहला कदम पाकिस्तान से ही अपेक्षित है.
मुंबई हमले और संयम की मिसाल
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2008 के मुंबई हमलों का ज़िक्र करते हुए थरूर ने कहा कि भारत ने उस समय पाकिस्तान की संलिप्तता के पक्के सबूत पेश किए थे, जिनमें लाइव इंटरसेप्ट्स और डोजियर तक शामिल थे. इसके बावजूद किसी बड़े मास्टरमाइंड पर कार्रवाई नहीं हुई. भारत ने संयम दिखाया, लेकिन इसके बाद की उकसावे वाली घटनाओं के बाद मजबूरी में 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और उसके बाद बड़े ऑपरेशन भी किए गए. इसी के साथ थरूर ने याद दिलाया कि उनकी 2012 में प्रकाशित किताब Pax Indica में उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर मुंबई जैसा कोई और हमला हुआ और उसमें पाकिस्तान की संलिप्तता साबित हुई, तो 2008 जैसा संयम भारत दोबारा नहीं दिखा पाएगा. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक सरकारें अपने नागरिकों पर हुए हमलों को कभी बर्दाश्त नहीं कर सकतीं.
कांग्रेस सांसद का अलग रुख
दिलचस्प बात यह है कि शशि थरूर अक्सर अपनी पार्टी लाइन से अलग हटकर राष्ट्रहित और सुरक्षा के मामलों पर राय रखते हैं. पाकिस्तान पर उनका यह बयान भी यही दर्शाता है कि अब भारत में धैर्य की सीमा खत्म हो चुकी है और अब दुनिया की निगाहें पाकिस्तान की कार्रवाई पर होंगी.
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बताते चलें कि भारत-पाकिस्तान रिश्तों की लंबी और पेचीदा कहानी में थरूर का यह बयान एक सख्त और स्पष्ट संदेश है. भारत ने हमेशा दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने होंगे. जो सिर्फ बातों में नहीं बल्कि धरातल पर भी दिखना चाहिए.