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'हमारे पास सिर्फ 30 सेकंड थे...', भारत के ब्रह्मोस अटैक से दहशत में था पाकिस्तान, शहबाज शरीफ के सलाहकार ने कबूली डर की बात

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया. भारतीय सेना की सटीक कार्रवाई से पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकाने तबाह हुए और देशभर में दहशत फैल गई. पाक पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने स्वीकार किया कि ब्रह्मोस मिसाइल हमले के दौरान पाकिस्तान के पास यह तय करने के लिए सिर्फ 30-45 सेकंड थे कि मिसाइल परमाणु है या नहीं. उन्होंने कहा कि हालात परमाणु युद्ध की आशंका तक पहुंच गए थे.

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पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सेना और सरकार को पूरी तरह से चौंका दिया. भारतीय सेना की इस सटीक और योजनाबद्ध जवाबी कार्रवाई ने न केवल पाकिस्तान के आतंकी ढांचों को बड़ा नुकसान पहुंचाया, बल्कि पड़ोसी देश में गहरे डर और दहशत का माहौल भी बना दिया था. पाकिस्तानी हुक्मरान अब खुलकर स्वीकार कर रहे हैं कि पाकिस्तान को कितना नुकसान हुआ और सत्ता के गलियारों में भारत का खौफ किस हद तक था.

पाकिस्तान में ब्रह्मोस मिसाइल का डर

दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद कुल 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले के बाद पाकिस्तान में इस कदर अफरा-तफरी मच गई कि वहां के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को यह आशंका सताने लगी कि कहीं भारत ने परमाणु हमला तो नहीं कर दिया. इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के वरिष्ठ सलाहकार राणा सनाउल्लाह का बड़ा बयान सामने आया है. एक पाकिस्तानी चैनल से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि जब भारत की ओर से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल छोड़ी गई, तब पाकिस्तानी सेना के पास यह पहचानने के लिए सिर्फ 30 से 45 सेकंड का समय था कि यह पारंपरिक मिसाइल है या परमाणु. सनाउल्लाह ने माना कि उस वक्त पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ था और यह स्थिति परमाणु युद्ध की आशंका तक पहुंच गई थी. उन्होंने कहा, "भारत के इस कदम ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया था. हमें संभलने का तक समय नहीं मिला." हालांकि पाकिस्तान के नेता अब इस मुद्दे पर सख्त बयानबाज़ी कर रहे हैं, लेकिन इस तरह की सच्चाई को स्वीकार करने वाले बयान से साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पड़ोसी देश के भीतर किस हद तक भय और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी.

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परमाणु युद्ध जैसी बन गई थी स्थिति 

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राणा सनाउल्लाह ने इंटरव्यू में खुलासा किया है कि जब भारत की ओर से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल पाकिस्तान के महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस पर दागी गई, तब सिर्फ 30 सेकंड में यह विश्लेषण करना कि मिसाइल पारंपरिक है या परमाणु हथियार से लैस, किसी भी देश के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है. उस वक्त हालात इतने तनावपूर्ण थे कि कोई भी गलत निर्णय पूरे क्षेत्र को तबाही की ओर ले जा सकता था.” उन्होंने आगे कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि भारत ने परमाणु वॉरहेड का इस्तेमाल न करके कोई अहसान किया है, लेकिन बात ये है कि इस तरह की कार्रवाइयों को गलत समझे जाने का खतरा बहुत बड़ा होता है. अगर पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई में पहला परमाणु हथियार दाग दिया जाता, तो पूरी दुनिया एक भीषण परमाणु युद्ध की आग में झुलस सकती थी.” सनाउल्लाह का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में भारी खलबली मचाई थी. इस खुलासे ने न केवल पाकिस्तान की आंतरिक चिंता को उजागर किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि भारत की यह जवाबी कार्रवाई सैन्य कौशल, रणनीतिक स्पष्टता से परिपूर्ण थी. 

भारतीय हमले से पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को भी बड़ा नुकसान
भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. सटीक एयरस्ट्राइक्स और ड्रोन हमलों ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. भारतीय हमले के बाद पाकिस्तानी हवाई सुरक्षा तंत्र की कमजोरियां उजागर हो गईं. सैटेलाइट के जरिए जो तस्वीरें सामने आई उसके मुताबिक, भारत की कार्रवाई में पाकिस्तान के सरगोधा, नूर खान (चकलाला), भोलारी, जैकबाबाद, सुक्कुर और रहीम यार खान जैसे प्रमुख एयरबेस को गंभीर क्षति पहुंची है. इनमें से कई ठिकानों पर एयर स्ट्राइक्स और ड्रोन अटैक से रनवे, हैंगर और रडार सिस्टम तबाह हुए हैं. मुख्य रूप से नूर खान एयरबेस, जो रावलपिंडी के चकलाला में स्थित है और पाकिस्तान वायुसेना का एक रणनीतिक महत्व वाला बेस माना जाता है, वह भी इस कार्रवाई में सीधे निशाने पर रहा. यह वही एयरबेस है जो 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी भारत के निशाने पर था.

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गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए. जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के कई ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक सैन्य संघर्ष चला, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई.

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