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नए विवाद में फंसे विकास दिव्यकीर्ति! Drishti IAS पर धोखाधड़ी का आरोप, CCPA ने लिया बड़ा एक्शन

CCPA ने विकास दिव्यकीर्ति की कोचिंग संस्था Drishti IAS को झूठे और भ्रामक दावे करने का दोषी पाया है. CCPA ने 5 लाख रुपए का भारी जुर्माना लगाया है.

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority) ने डॉक्टर विकास दिव्यकीर्ति के कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS पर बड़ा एक्शन लिया है. CCPA ने कोचिंग संस्थान को झूठे और भ्रामक दावे करने का दोषी पाया है. 

CCPA ने दृष्टि IAS पर 5 लाख रुपए का भारी जुर्माना लगाया है. मामला साल 2022 के UPSC परीक्षा रिजल्ट से जुड़ा हुआ है. नतीजों को लेकर विकास दिव्यकीर्ति की कोचिंग संस्था ने भ्रामक विज्ञापन जारी किया था. दृष्टि IAS ने दावा किया था कि कोचिंग ने 216 से ज्यादा उम्मीदवारों का सिलेक्शन UPSC में करवाया है. जबकि असलियत इसके आस-पास भी नहीं थी. 

क्या है पूरा मामला? 

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Drishti IAS कोचिंग संस्थान के हेड विकास दिव्यकृति हैं. आरोप हैं कि संस्था ने बार-बार झूठे दावे किए हैं. स्टूडेंट्स ने Pre और Mains अपने दम पर पास किया था. असली कोर्स में सिर्फ 54 बच्चे थे. पैरेंट्स और स्टूडेंट्स को ये मैसेज जाता है कि पूरी सफलता Drishti IAS की वजह से मिली, जबकि मेहनत बच्चों की थी. दृष्टि IAS ने इस अहम जानकारी को छुपाया और ऐसा प्रचार किया जैसे सभी 216 छात्रों की सफलता का श्रेय उसे ही देना चाहिए. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(28) के तहत यह भ्रामक विज्ञापन पाया गया. 

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पहले भी विवादों में रही ये कोचिंग संस्थान

ये पहली बार नहीं है जब दृष्टि IAS पर भारी जुर्माना लगा है या विवादों में आया है. इस कोचिंग संस्थान पर पहली पेनल्टी सितंबर 2024 में लगी थी. तब 3 लाख का जुर्माना लगा था. उस समय संस्थान ने दावा किया था कि, UPSC CSE 2021 में चुने गए 150 से ज्यादा अभ्यर्थी इसी संस्थान के थे. जबकि जांच में इस दावे को झूठ माना गया. 

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पहली कार्रवाई के बाद भी दृष्टि IAS ने वहीं गलती दोहराई. चेतावनी के बावजूद भ्रामक दावे किए गए. CCPA ने इस मामले में दृष्टि IAS समेत 54 कोचिंग संस्थानों को झूठे विज्ञापन के आरोप में नोटिस भेजे हैं. इनमें से 26 कोचिंग संस्थानों पर 90.6 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है. 

CCPA का कहना है कि, कोचिंग सेंटर का इस तरह की जानकारी छुपाना छात्र और अभिभावकों को गुमराह करना है. मैसेज ये ही जाता है कि संस्था की वजह से पूरी सफलता मिलती है. जबकि असलियत का इससे कोी वास्ता नहीं. इससे छात्रों को झूठी उम्मीदें मिलती हैं और उनके फैसले प्रभावित होते हैं. इसी तरह के झूठे दावे करके कोचिंग संस्थान करोड़ों का बिजनेस करती हैं और छात्रों को ठगा जाता है. 

क्या है CCPA? 

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CCPA भारत सरकार के अधीन एक संस्था है. इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत बनाया गया था. इस संस्था का मकसद ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें गुमराह होने से बचाना है. भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई, गलत तरीके से किए जा रहे व्यापार पर रोक, उपभोक्ताओं की शिकायत पर कार्रवाई और उनके अधिकारों पर जागरुक करना जैसे काम ये संस्था करती है. 

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CCPA ने उपभोक्ताओं की प्रोडक्ट संबंधी शिकायत सुनने के साथ साथ कोचिंग संस्थाओं के काम-काज पर भी ध्यान दिया. नवंबर 2024 में CCPA कोचिंग संस्थानों ने कोचिंग संस्थाओं के लिए कुछ गाइडलाइन जारी की. इसका मकसद कोचिंग संस्थानों के भ्रामक विज्ञापनों और झूठे दावों पर रोक लगाना है. ताकि वह छात्रों को गुमराह कर कोचिंग न चला सकें. आमतौर पर हर कोचिंग संस्था 100% सफलता और ज्यादा से ज्यादा चयन के दावे करती हैं. 

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