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Video: जिंदा लड़की का कर दिया 'अंतिम संस्कार'... 'राम नाम सत्य है' बोलकर निकाली गई अंतिम यात्रा, ओडिशा से आया चौंका देने वाला मामला

ओडिशा के गंजाम जिले के कविसूर्यनगर थाना क्षेत्र के बलियापल्ली गांव के रहने वाले निरंजन गौड़ की बेटी ने दूसरी जाति के युवक से लव मैरिज कर ली, जिसकी वजह से लड़की के परिवार और समाज ने भारी नाराजगी जताई और खुद को बेइज्जत सा महसूस किया, उसके बाद निरंजन गौड़ ने अपनी बेटी के फैसले से आहत होकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया. हालांकि, वह जिंदा थी, लेकिन उसको मरा हुआ महसूस कर परिवार ने एक केले के पेड़ को बेटी का प्रतीक मानकर 'शव' बनाया. उसे नई साड़ी पहनाई और शव की तरह सजाकर पूरे गांव में घुमाया.

IMAGE CREDIT:META/AI
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ओडिशा के एक जिले से चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां एक लड़की अपने मनपसंद लड़के से शादी कर ली. उसके बाद परिवार वालों ने उसे मृत मानकर उसका प्रतीकात्मक संस्कार कर दिया. बता दें कि यह घटना गंजाम जिले के कविसूर्यनगर थाना के बलियापल्ली गांव की है. इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. 

जिंदा लड़की ने खुद को 'मृत' मानकर किया अपना अंतिम संस्कार 

बता दें कि ओडिशा के गंजाम जिले के कविसूर्यनगर थाना क्षेत्र के बलियापल्ली गांव के रहने वाले निरंजन गौड़ की बेटी ने दूसरी जाति के युवक से लव मैरिज कर ली, जिसकी वजह से लड़की के परिवार और समाज में भारी नाराजगी हुई और खुद को बेइज्जत सा महसूस किया, लेकिन उसके बाद जो कुछ भी हुआ उसने सभी को हिलाकर रख दिया. दरअसल, निरंजन गौड़ अपनी बेटी के फैसले से आहत होकर उसका ही अंतिम संस्कार कर दिया. हालांकि, वह जिंदा थी, लेकिन उसको मरा हुआ महसूस कर परिवार ने एक केले के पेड़ को बेटी का प्रतीक मानकर 'शव' बनाया. उसे नई साड़ी पहनाई और शव की तरह सजाकर पूरे गांव में घुमाया. 

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'राम नाम सत्य है' बोलकर शव यात्रा निकाली गई

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निरंजन गौड़ के परिवार ने अपनी बेटी को मृतक मानकर अंतिम संस्कार के वक्त सनातन धर्म के नियमों के मुताबिक, घंटी और मृदंग बजाते हुए पूरे गांव में शव यात्रा निकाली और 'राम नाम सत्य है' बोलते हुए श्मशान घाट तक ले गए. उसके बाद वहां पर केले के पेड़ का प्रतीकात्मक दाह संस्कार किया. 

'अभी भी समाज की पुरानी सोच नहीं बदली'

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इस घटना का पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. घटना के पीछे की मानसिकता पर लोगों ने सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि अभी भी वही पुरानी सोच है, जिसमें जाति से बाहर शादी करना पाप माना जाता है. जब कोई युवा इस परंपरा को तोड़ता है, तो कई बार उसके खिलाफ पूरे परिवार और समाज का गुस्सा टूट पड़ता है. यहां तक कि कई समुदायों में ऐसे मामलों में ‘शुद्धि क्रिया’ या ‘परिवार की मर्यादा की रक्षा’ के नाम पर नाटक रचा जाता है, जैसे कि बेटी अब इस दुनिया में ही नहीं रही. 

'क्या बेटी को इतनी बड़ी सजा देना सही है'

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ओडिशा की इस घटना को लेकर लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अपनी पसंद से शादी करना इतना बड़ा अपराध है कि माता-पिता अपनी ही संतान को मरा हुआ मान लें? माता-पिता अपनी बेटी को बचपन से पालते हैं, पढ़ाते हैं और फिर उसी बेटी के खिलाफ इतनी बड़ी सजा क्या यह सही है? आज जब दुनिया चांद और मंगल तक पहुंच गई है, वहीं हमारे समाज के कुछ हिस्से अब भी जाति और झूठे संस्कारों में उलझे हुए हैं. एक लड़की ने जब अपने मनपसंद लड़के से शादी की, तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया गया. आखिर यह कितना सही है? 

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