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IAS टीना डाबी का सतीश पूनिया के सामने सिर झुकाने का वीडियो वायरल, जानिए पूरा मामला
राजस्थान के बाड़मेर में जिला कलेक्टर टीना डाबी और बीजेपी नेता सतीश पूनिया के बीच एक मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में टीना डाबी 7 सेकंड के भीतर सतीश पूनिया के सामने 5 बार सिर झुकाते हुए दिखाई दीं।
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राजस्थान के बाड़मेर की कलेक्टर टीना डाबी का हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने भाजपा नेता सतीश पूनिया के सामने 7 सेकेंड में 5 बार सिर झुकाया। यह घटना पूनिया के जन्मदिन पर हुई थी, जब उन्होंने मजाक में कहा कि डाबी "दादागिरी" करके सफाई करवा रही हैं और बाड़मेर को इंदौर जैसा बना रही हैं। इस पर पूनिया ने डाबी की तारीफ की। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे एक IAS अधिकारी का किसी नेता के सामने सिर झुकाना अनुचित मान रहे हैं।
टीना डाबी का कार्य और विवाद
टीना डाबी, जो 2015 की UPSC टॉपर रही हैं, अपने पूरे करियर में विभिन्न कार्यों के लिए चर्चा में रही हैं। बाड़मेर में उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई परियोजनाओं पर जोर दिया, विशेष रूप से स्वच्छता अभियान और ग्रामीण विकास पर। पूनिया ने इसी कार्य की प्रशंसा की, लेकिन यह घटना कई लोगों के लिए एक विवाद का कारण भी बन गई। टीना डाबी का यह वीडियो वायरल होते ही लोगों ने विभाजित राय व्यक्त की। कई यूजर्स ने डाबी के इस सम्मानजनक भाव की सराहना की, यह कहते हुए कि एक अधिकारी और जनप्रतिनिधि के बीच ऐसा रिश्ता विकास के लिए आवश्यक है। वहीं, कुछ लोगों ने इसकी कड़ी आलोचना की, कहते हुए कि एक IAS अधिकारी को इस तरह से किसी नेता के सामने नहीं झुकना चाहिए, क्योंकि यह सरकारी अधिकारियों की स्वतंत्रता पर प्रश्न खड़ा करता है।
सतीश पूनिया, जो भाजपा के राजस्थान के बड़े नेता हैं और हरियाणा के प्रभारी भी रह चुके हैं, ने डाबी की कार्यक्षमता की तारीफ की। इस घटना से पहले, पूनिया ने सरकारी अस्पताल में नवजात बच्चियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में खाते खुलवाने का संकल्प लिया था। उनकी इस सकारात्मक पहल की भी सराहना की गई।
विवाद के पीछे की सोच
यह घटना एक छोटे से जेस्चर के कारण बढ़ी, लेकिन यह दिखाती है कि कैसे किसी सरकारी अधिकारी का किसी राजनेता के साथ व्यवहार जनता की नजर में आ सकता है। जबकि कुछ इसे एक सकारात्मक और मैत्रीपूर्ण संकेत मानते हैं, अन्य इसे एक सत्ता के आगे झुकने के रूप में देखते हैं। यह सोचने की बात है कि क्या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों को किसी भी स्थिति में इतना लचीला होना चाहिए, या उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए?
टीना डाबी की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जनता के सेवकों को किस हद तक अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। जहां एक तरफ डाबी की कार्यकुशलता की सराहना की जा रही है, वहीं यह घटना यह दिखाती है कि किसी भी छोटे से जेस्चर का बड़ा असर हो सकता है।
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