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उत्तराखंड के गठन को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया याद, देवभूमि को सत्यम, शिवम और सुंदरम का बताया प्रतीक

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उत्तरखंड के गठन को याद करते हुए, देवभूमि को सत्यम, शिवम और सुंदरम का प्रतीक बताया है.

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भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उत्तराखंड के देहरादून में जागरण फोरम का उद्घाटन किया, जिसका आयोजन राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया है. उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तराखंड को त्याग, दृढ़ता और राष्ट्र सेवा का प्रतीक बताया और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राज्य की जनता को हार्दिक बधाई दी.

उत्तराखंड के गठन को उपराष्ट्रपति ने किया याद
 
उत्तराखंड के गठन को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य का गठन पहाड़ी लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक जवाब था और इसने भारत की संघीय प्रणाली की मजबूती को फिर से स्थापित किया. उन्होंने लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तराखंड के गठन के विधेयक के पक्ष में मतदान करने के अपने व्यक्तिगत अनुभव को भी साझा किया. 

‘उत्तराखंड सत्यम, शिवम और सुंदरम के सार को प्रतिबिंबित करता है’

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उपराष्ट्रपति ने देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना में इस राज्य का विशेष स्थान है. वैदिक और पौराणिक परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सत्यम, शिवम और सुंदरम के सार को प्रतिबिंबित करता है. उन्होंने राज्य के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके हिमनद, नदियां और वन इसकी भौगोलिक सीमाओं से कहीं अधिक दूर तक जीवन को पोषित करते हैं.

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पीएम मोदी और मुख्यमंत्री धामी की तारीफ की

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य ने सड़क, रेल, हवाई और संचार संपर्क के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति देखी है. विकास पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के महत्व को भी रेखांकित किया. उन्होंने हरित विकास को बढ़ावा देने, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की और सकल घरेलू उत्पाद के साथ-साथ सकल पर्यावरण उत्पाद की अवधारणा को अपनाने वाला देश का पहला राज्य होने के लिए उत्तराखंड की प्रशंसा की.

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‘भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में उत्तराखंड से अधिकारी’

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी उत्तराखंड से आते हैं. उत्तराखंड के रणनीतिक महत्व का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने जीवंत सीमावर्ती गांवों को अंतिम चौकी नहीं, बल्कि शक्ति, विरासत और लचीलेपन की पहली पंक्ति बताया, और प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को याद किया जिसमें उन्होंने माना गांव को "भारत का पहला गांव" बताया गया था.

‘2047 तक भारत आत्मनिर्भर’

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2047 तक भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, जैविक कृषि, बागवानी, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, आयुष, पर्यावरण पर्यटन, स्टार्टअप और कौशल विकास में अपनी विशाल क्षमता के साथ उत्तराखंड एक अद्वितीय स्थान रखता है. 

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