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जन गण मन से पहले बजेगा 'वंदे मातरम्'... 3 मिनट 10 सेकेंड के राष्ट्रगीत के दौरान खड़े होना जरूरी; सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

केंद्र सरकार ने अहम निर्देश जारी किया है. अब सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरा वाला संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है. यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन, उनके भाषणों तथा राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में अनिवार्य रूप से लागू होगा.

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देश की राजधानी दिल्ली से एक बेहद ही महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है. केंद्र की मोदी सरकार ने निर्देश दिया है कि अब सभी आधिकारिक मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरा वाला संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट और 10 सेकंड तय की गई है. यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर पर, राष्ट्रपति के आगमन पर, उनके भाषण से पहले और बाद में तथा राष्ट्र के नाम संबोधन के समय अनिवार्य रूप से लागू होगा.

इसके साथ ही मोदी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्यों में राज्यपालों के आगमन और उनके संबोधन से पहले और बाद में भी इसी निर्धारित संस्करण और समय सीमा का पालन किया जाएगा. इस आदेश का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मान को बनाए रखना और उसकी प्रस्तुति में एकरूपता सुनिश्चित करना है. अब सभी सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ निर्धारित प्रारूप में ही प्रस्तुत किया जाएगा.

गृह मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन 

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गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में एकरूपता, गरिमा और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना है. आइए समझते हैं कि नई गाइडलाइन में क्या-क्या प्रमुख बातें शामिल की गई हैं.

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1- सबसे अहम बदलाव यह है कि अब सरकारी या औपचारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों को मानक रूप माना गया है. अब तक प्रायः केवल पहले दो छंद ही गाए या बजाए जाते थे, लेकिन संशोधित निर्देशों में मूल विस्तारित स्वरूप को आधिकारिक मान्यता दी गई है. हालांकि यह भी कहा गया है कि व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रस्तुति का तरीका तय किया जा सकता है, पर आदर्श रूप में पूरा गीत ही प्राथमिकता रहेगा.

2- दूसरा महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि विशेष सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ के छहों अंतरों का गायन या वादन अनिवार्य होगा. इसके लिए 3 मिनट 10 सेकंड की निर्धारित अवधि तय की गई है. यानी अब कार्यक्रमों में समय सीमा और संस्करण दोनों स्पष्ट रूप से निर्धारित रहेंगे.

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3- तीसरी बड़ी बात कार्यक्रमों के क्रम से जुड़ी है. यदि किसी समारोह में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाने हों, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ गाया जाएगा. यह क्रम अब औपचारिक रूप से तय कर दिया गया है, ताकि हर सरकारी मंच पर समान प्रक्रिया अपनाई जा सके.

5- प्रोटोकॉल के तहत सम्मान से संबंधित निर्देश भी स्पष्ट किए गए हैं. ‘वंदे मातरम्’ के गायन या वादन के समय सभी उपस्थित लोगों को सम्मानपूर्वक खड़ा होना होगा. यह व्यवस्था राष्ट्रीय गान की तरह ही लागू रहेगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय गीत को भी समान आदर और गरिमा मिले.

6- इन निर्देशों में उन अवसरों के बारे में भी बताया गया है, जब ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा. तिरंगा फहराने के समय, राष्ट्रपति के आगमन पर, उनके राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, राज्यपालों के आगमन और उनके भाषणों के अवसर पर यह गीत प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा पद्म पुरस्कार जैसे सिविलियन सम्मान समारोहों और उन सभी कार्यक्रमों में, जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य होगा.

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राष्ट्रगीत के कौन से छह छंद हुए अनिवार्य 

 

वंदे मातरम गीत का क्या है उद्देश्य?

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‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है. इसका अर्थ है कि 'मैं तुम्हें नमन करता हूं, मां. यह गीत मातृभूमि को समर्पित है, जिसे हरी-भरी, सुखद और शक्ति देने वाली मां के रूप में चित्रित किया गया है.' इसके पहले छंद में 'सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्” जैसे शब्द भारत की प्राकृतिक संपन्नता और शीतलता का वर्णन करते हैं. दूसरे और तीसरे छंद में राष्ट्र की शक्ति, भक्ति और एकता का संदेश मिलता है. आगे के छंदों में भारत माता को दुर्गा, कमला और वाणी के रूप में संबोधित कर उसकी दिव्यता को बताया गया है.

वंदे मातरम गीत से जुड़ा इतिहास 

इतिहास पर नजर डालें तो ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी. इसे 7 नवंबर 1875 को बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित किया गया था और बाद में 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया. शुरुआत में यह बंगाल के संदर्भ में लिखा गया साहित्यिक गीत था, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे देश के स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान बन गया. आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारी इसे जोश के साथ गाते थे. छात्र आंदोलनों में इसकी गूंज सुनाई देती थी.

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इस गीत को कब मिला राष्ट्रीय गीत का दर्जा

भारत सरकार ने 24 जनवरी 1950 को ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया. राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से अलग होते हुए भी इसका सम्मान समान रूप से महत्वपूर्ण है. यह गीत करीब 150 वर्षों से देशवासियों के दिलों में बसता आ रहा है. सरकार का नया निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास भी है. जब हर आधिकारिक मंच पर एक ही समय और एक ही स्वरूप में ‘वंदे मातरम्’ गूंजेगा, तो वह एकता और सम्मान का संदेश और भी मजबूत करेगा. यह कदम आने वाली पीढ़ियों को भी अपने राष्ट्रीय गीत के महत्व से जोड़ने का माध्यम बनेगा.

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बताते चलें कि अब देश के हर सरकारी आयोजन में 3 मिनट 10 सेकंड तक गूंजने वाला यह गीत केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक होगा.

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