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जिन्ना के चश्मे से देखेंगे तो वंदे मातरम् लगेगा ही सांप्रदायिक...संसद में गरजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, VIDEO
लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर चली विशेष चर्चा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. वंदे मातरम के विरोध की राजनीति पर उन्होंने बिना नाम लिए, इशारों-इशारों में कहा कि जिन्ना के चश्मे से भारत देखने वालों को ही ‘वंदे मातरम्’ सांप्रदायिक लगता है. उन्होंने वंदे मातरम् के साथ हुए अन्याय को तुष्टिकरण की राजनीति की शुरुआत कहा.
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लोकसभा में वंदे मातरम् पर जोरदार चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला. उन्होंने तुष्टिकरण और जिन्ना की सोच पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने ये भी कहा कि तब वंदे मातरम् के साथ हुआ अन्याय तुष्टिकरण राजनीति की शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन का रास्ता तैयार किया. बंकिमचंद्र की रचना के मूल भाव का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् मातृभूमि को स्वर्ग से ऊपर रखता है.
“कौन बैठाने वाला है, कौन बैठाएगा!”
इतना ही नही बहस के बीच शोर मचने पर वे भड़क गए और जोर से बोले “कौन बैठाने वाला है, कौन बैठाएगा!” सिंह ने सदन की मर्यादा का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिकार बाद में किया जा सकता है, हंगामा नहीं होना चाहिए.
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उन्होंने आगे कहा कि 'बंगाल विभाजन के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान वंदे मातरम की गूंज जनमानस में बैठी. ब्रिटिश हुकूमत ने इसके खिलाफ एक सर्कुलर जारी किया, लेकिन फिर भी ब्रिटिश हुकूमत लोगों के मानस से वंदे मातरम् को नहीं निकाल सकी.
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आपको बता दें कि लोकसभा के शीतकालीन सत्र में सोमवार को 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई. इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वंदे मातरम इतिहास और वर्तमान से गहराई से जुड़ा हुआ है. लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि इसने पूरे देश को आजादी की लड़ाई के लिए जगाया और ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी. यह सिर्फ बंगाल के स्वदेशी आंदोलन या किसी चुनाव तक सीमित नहीं है.
जानबूझकर राष्ट्रगीत को दबाया गया!
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उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए उस समय 'वंदे मातरम समिति' भी बनाई गई थी. सन 1906 में जब भारत का पहला राष्ट्रीय झंडा तैयार किया गया, उसके बीच में 'वंदे मातरम' लिखा हुआ था. उस समय 'वंदे मातरम' नाम से एक अखबार भी निकलता था. रक्षा मंत्री ने इस दौरान कहा कि 'वंदे मातरम' के साथ उतना न्याय नहीं हुआ, जितना होना चाहिए था. जन-गण-मन राष्ट्रीय भावना में पूरी तरह समा गया, किंतु 'वंदे मातरम' को जान-बूझकर दबाया गया.
'वंदे मातरम' के साथ हुआ इतिहास का सबसे बड़ा छल
सदन के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के साथ इतिहास ने बड़ा छल किया है. इस अन्याय की बात हर भारतीय को जाननी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन सारी कोशिशों के बावजूद 'वंदे मातरम' का महत्व कभी कम नहीं हुआ. यह स्वयं में पूर्ण है, पर इसे अपूर्ण सिद्ध करने की बार-बार कोशिश की गई. इस अन्याय के बावजूद 'वंदे मातरम' आज भी करोड़ों भारतीयों के हृदय में जीवंत है.
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'वंदे मातरम' के साथ अन्याय की मंशा जाने भावी पीढ़ी'
उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के साथ जो अन्याय हुआ, उसे जानना जरूरी है. देश की भावी पीढ़ी 'वंदे मातरम' के साथ अन्याय करने वालों की मंशा जान सके. आज हम 'वंदे मातरम' की गरिमा को फिर से स्थापित कर रहे हैं. राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत को बराबर का दर्जा देने की बात की गई थी. जन-गण-मन और वंदे मातरम भारत माता की दो आंखें हैं. वंदे मातरम राजनीतिक नहीं है.
'वंदे मातरम' के साथ अन्यान, आजाद भारत के साथ छल!
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कांग्रेस पर जुबानी हमला करते हुए रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि 'वंदे मातरम' को उपेक्षित किया गया. उसे खंडित किया गया. वह धरती जिस पर 'वंदे मातरम' की रचना हुई थी, उसी धरती पर 1937 में कांग्रेस ने उसे खंडित करने का निर्णय लिया था. 'वंदे मातरम' के साथ हुए राजनीतिक छल और अन्याय के बारे में सभी पीढ़ियों को जानना चाहिए, इसीलिए इस पर चर्चा हो रही है. क्योंकि यह अन्याय एक गीत के साथ नहीं था, यह आजाद भारत के लोगों के साथ था.