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'वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं, राष्ट्र की आत्मा है...', PM मोदी ने लोकसभा में दिया तगड़ा भाषण, खोल दी कांग्रेस की पोल!

संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में पीएम मोदी ने वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत की. इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के टुकड़े करने का आरोप लगाया.

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Discussion On Vande Mataram in Lok Sabha: संसद के शीतकालीन सत्र का आज छठा दिन है. यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत हुई. दस घंटे तक चलने वाली इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. इससे पहले पीएम मोदी लोकसभा के सदन में जैसे ही पहुंचे तो बीजेपी सांसदों ने वंदे मातरम का नारा लगाकर उनका स्वागत किया. वंदे मातरम पर चर्चा को लेकर सरकार का उद्देश्य इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका और इसकी सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय महत्ता पर विचार-विमर्श कराना है. इसके अलावा 1937 में कांग्रेस द्वारा हटाई गई कुछ पंक्तियों को लेकर मुख्य विपक्षी दल को भी बहस में शामिल किया गया.

हमारा सौभाग्य है वंदे मातरम का पुण्य स्मरण करना: पीएम मोदी

लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह गीत देश की स्वतंत्रता संग्राम में ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत रहा है. उन्होंने कहा, 'जिस मंत्र और जयघोष ने त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया, उसका पुण्य स्मरण इस सदन में करना हम सभी के लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है.' पीएम मोदी ने आगे यह भी कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का यह अवसर गर्व और ऐतिहासिक महत्व से भरा है. उन्होंने याद दिलाया कि जब यह गीत 100 वर्ष का हुआ था, उस समय भारत आपातकाल की स्थिति में था.

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जब बंगाल के लिए चट्टान बना वंदे मातरम 

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अपने संबोधन के दौरन पीएम मोदी ने लोकसभा में बंगाल का जिक्र करते हुए बताया कि जब साल 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया, लेकिन उस समय ‘वंदे मातरम’ ने देशवासियों के मनोबल को चट्टान की तरह मजबूती दी. यह नारा गली-गली गूंजने लगा और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया. अंग्रेजों की नीतियां भारत को कमजोर करने की थीं, लेकिन वंदे मातरम उनके लिए चुनौती और देश के लिए शक्ति का स्रोत बनकर उभरा. आज भी यह गीत न केवल हमारे स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है, बल्कि युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को जागृत करने का काम करता है.

PM मोदी ने सुनाया वंदे मातरम गाने पर 'जुर्माना' लगने का किस्सा 

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पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् से जुड़ा एक दिलचस्प ऐतिहासिक प्रसंग साझा किया. उन्होंने बताया कि 20 मई 1906 को बारीसाल (जो अब बांग्लादेश में है) में एक विशाल जुलूस निकाला गया था, जिसमें 10 हजार से अधिक लोग सड़कों पर उमड़ पड़े थे. हिंदू, मुस्लिम और विभिन्न समुदायों के लोग हाथों में वंदे मातरम् के झंडे लेकर एकजुट होकर मार्च कर रहे थे. पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिटिश शासन इस गीत से इतना भयभीत था कि रंगपुर के एक स्कूल में जब छात्रों ने वंदे मातरम गाया, तो अंग्रेजी प्रशासन ने 200 बच्चों पर पाँच-पाँच रुपये का जुर्माना लगा दिया. सिर्फ इसलिए कि उन्होंने यह गीत गाया था. इसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने कई स्कूलों में वंदे मातरम् गाने पर सीधी पाबंदी भी लगा दी. यह घटना बताती है कि यह गीत उस दौर में भारतीयों के हौसले की कितनी बड़ी ताकत था.

PM मोदी ने महात्मा गांधी को किया याद 

पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम की चर्चा करते हुए महात्मा गांधी को विशेष रूप से याद किया. उन्होंने बताया कि बापू ने अपने एक पत्र में लिखा था कि वंदे मातरम लोगों के बीच इतना रच-बस चुका है जैसे यह देश का राष्ट्रगान ही हो. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज़ादी की लड़ाई में अनगिनत वीरों ने फांसी का सामना करते समय अंतिम क्षणों में यही पुकार लगाई वंदे मातरम. इसके साथ ही उन्होंने कहा उस दौर में देश के अलग-अलग जेलों में बंद होने के बावजूद सभी स्वतंत्रता सेनानियों के दिल में यही एक मंत्र गूंजता था.  उन्होंने चटगांव के उन क्रांतिकारियों के बारे में भी बताया ,जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी. मास्टर सूर्यसेन का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि 1934 में जब उन्हें फांसी सुनाई गई, तब उन्होंने अपने साथियों के नाम जो अंतिम पत्र लिखा, उसमें भी सिर्फ एक ही शब्द की ध्वनि थी,वंदे मातरम. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पेरिस में मैडम भीकाजी कामा ने वंदे मातरम नाम से अख़बार प्रकाशित किया था, और विपिन चंद्र पाल व महर्षि अरविंद घोष ने भी अपने अखबारों के लिए यही नाम चुना था.

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कांग्रेस ने किए वंदे मातरम के टुकड़े: पीएम मोदी 

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम एक समय पूरे देश के स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज़ बन चुका था. महात्मा गांधी भी इसे इतना प्रभावशाली मानते थे कि उन्होंने इसे राष्ट्रगान जितना लोकप्रिय बताया था. लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि बीते दौर में इस गीत के साथ बड़ा अन्याय हुआ. पीएम मोदी का कहना था कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में कदम पीछे खींच लिए और वंदे मातरम के हिस्से तक कर दिए. उनके मुताबिक तुष्टीकरण की राजनीति ने कांग्रेस को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया कि जहां न सिर्फ वंदे मातरम से समझौता करना पड़ा, बल्कि यही दबाव आगे चलकर देश के बंटवारे तक का कारण बना. पीएम मोदी ने कहा वंदे मातरम केवल गीत नहीं यह हमारे लिए प्रेरणा है.

वंदे मातरम से मिलती है विकसित भारत की भावना 

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पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम केवल आज़ादी के दौर का नारा नहीं था, बल्कि उस भावना का स्रोत था जिसने देश को संघर्ष के रास्ते पर मजबूती दी. उन्होंने कहा कि जिस तरह इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा दी, उसी तरह आज के दौर में यही भावना एक विकसित और समृद्ध भारत की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रही है. पीएम मोदी ने सवाल किया कि जब आज़ादी से 50 वर्ष पहले स्वतंत्र भारत का सपना देखा जा सकता था, तो आज से 25 साल पहले हम 2047 तक समृद्ध राष्ट्र बनने का संकल्प क्यों नहीं ले सकते? उनके अनुसार, विकसित भारत की इस यात्रा को भी वंदे मातरम की भावना ही आगे बढ़ाएगी.

जानकारी देते चलें कि संसद ने वंदे मातरम पर चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समत तय किया गया हैं. लोकसभा में बहस की शुरुआत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया जबकि राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी बात रखेंगे. विपक्ष की ओर से भी कई प्रमुख नेता इस चर्चा में हिस्सा लेंगे. कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, विमल अकोइजम, प्रनीति शिंदे, प्रशांत पडोले, चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत जैसे नेता बोलेंगे.

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