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उत्तर प्रदेश: योगी सरकार का वैज्ञानिक खेती की ओर बड़ा कदम, गाज़ीपुर में 22,000 खेतों का मृदा परीक्षण

कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया, उसके महत्व और लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि मिट्टी का स्वाइल हेल्थ सुधारकर फसल की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है.

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में कृषि विभाग द्वारा किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह बताना था कि खेतों में बुवाई से पहले मिट्टी का परीक्षण कर लेना कितना आवश्यक है. मिट्टी के परीक्षण से यह स्पष्ट हो जाता है कि भूमि में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और फसल के लिए किन तत्वों की आवश्यकता होगी. इससे किसान अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकते हैं.

गाजीपुर में किसानों को किया जागरूक

कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया, उसके महत्व और लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि मिट्टी का स्वाइल हेल्थ सुधारकर फसल की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है.

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22,000 खेतों से लिए गए नमूने

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कार्यक्रम में शामिल वाराणसी के सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण) राजेश कुमार राय ने बताया कि शासन से खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए मिट्टी परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने कहा कि खरीफ की बुवाई से पहले 22,000 खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए थे. नमूनों की जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए. अब रबी फसलों के लिए 9,600 मृदा परीक्षण का लक्ष्य दिया गया है.

20 ग्राम पंचायतों का किया गया चयन 

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उन्होंने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक से 20 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है और प्रत्येक पंचायत से सौ-सौ जोतों के नमूने लेकर मिट्टी परीक्षण कराया जाएगा.

अधिक उर्वरक से लागत बढ़ती, मिट्टी की गुणवत्ता घटती: अधिकारी

राजेश कुमार राय ने कहा कि कई किसान बिना मिट्टी की जरूरत जाने ही अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरक का उपयोग करते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है, मिट्टी की उर्वरता कम होती जाती है और फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ता है.

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उन्होंने कहा कि अगर किसान मिट्टी परीक्षण करा लें तो उन्हें यह आसानी से पता चल जाएगा कि उनकी मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश या अन्य पोषक तत्वों की कितनी कमी है.

किसानों ने उत्साह के साथ लिया भाग

इससे किसान कम खर्च में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे और मिट्टी की सेहत भी बनी रहेगी.

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कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और उन्होंने मृदा परीक्षण से जुड़े सवाल भी पूछे. कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने उन्हें आश्वस्त किया कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर वे अपनी खेती की उत्पादकता में बड़े स्तर पर सुधार कर सकते हैं.

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