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'अखंड भारत' पर अमेरिका की भी मुहर! ट्रेड डील में PoK और अक्साई चिन को हिंदुस्तान का दिखाया, चीन-PAK तिलमिलाए!

US ने भारत का एक मैप जारी किया है, जिसमें J&K को साफ तौर पर भारत का हिस्सा दिखाया गया है. अमेरिका अब तक इसको लेकर मैप जारी करने से बचता था. अब उसने जो मैप जारी किया है उसमें PoK और अक्साई चीन को भारत का हिस्ता करार दिया है.

India USA Trade Deal (File Photo)
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जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा. भारत ने लाख दबाव, कई युद्ध और अंतरराष्ट्रीय घेराबंदी के बावजूद इस स्टैंड से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया है. भारत ने हमेशा से कहा है कि वह इस मुद्दे में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा. भले ही अमेरिका वर्षों तक भारत के अपने हिस्से, मसलन PoK और अक्साई चीन को लेकर दावों पर खुलकर बोलने से बचता रहा हो, लेकिन अब उसने भी खुलकर मान लिया है कि ये भारत का हिस्सा हैं. 

मानता तो वह पहले भी था, लेकिन खुलकर दस्तावेज़ और मैप के प्रदर्शन से बचता रहा. हालांकि अब, जबकि भारत का रुख सख्त हुआ है और अमेरिका को भारत की जरूरत है, तो उसने वह किया है जो पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाने के लिए काफी है. इतना ही नहीं, ड्रैगन यानी चीन का भी चिढ़ना तय है.

आपको बता दें कि PoK पर पाकिस्तान चाहे जितने झूठ बोल ले, लाख दावे करे, लेकिन सच सच ही रहेगा. और वह यह है कि ये इलाके भारत के अटूट अंग थे, हैं और रहेंगे. आपको बता दें कि इसी को लेकर सबसे मजबूत और स्पष्ट स्वीकारोक्ति उसके भरोसेमंद सहयोगी और दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका की ओर से आई है.

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दरअसल, अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव कार्यालय (USTR) ने भारत का एक आधिकारिक नक्शा जारी किया है, जिसमें भारतीय सीमा स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है. इस नक्शे में नॉर्दर्न केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को साफ-साफ भारत का हिस्सा दिखाया गया है, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी शामिल है. पाकिस्तान हालांकि इसे ‘आजाद कश्मीर’ कहकर अपना बताता रहा है, जिसे भारत ने डंके की चोट पर खारिज किया है.

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जो बात भारत वर्षों से कहता आया था, वह अब न सिर्फ अमेरिका ने कही है, बल्कि उसने इस बाबत एक नक्शा भी सार्वजनिक तौर पर जारी कर दिया है. अमेरिका के इस स्पष्ट रुख से साफ है कि पाकिस्तान को अब नींद नहीं आएगी. वॉशिंगटन ने संकेत दिया है कि अमेरिकी नेतृत्व भारत के राजनीतिक नक्शे से सहमत है, जमीनी हकीकत का समर्थन करता है और निराधार क्षेत्रीय दावों का समर्थन नहीं करता.

 पाकिस्तान की हुई फजीहत

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आपको बता दें कि यह घटनाक्रम इस्लामाबाद के लिए बड़ी कूटनीतिक शर्मिंदगी माना जा रहा है. हाल के समय में पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीब जाने की कोशिशें की हैं. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर, जो अब खुद को फील्ड मार्शल बताते हैं और सीडीएफ भी बन गए हैं, ने वॉशिंगटन के कई दौरे कर अमेरिकी सत्ता गलियारों में जोरदार लॉबिंग की. ट्रंप ने मुनीर को लंच भी कराया, लेकिन अब उसका बिल उसी से वसूला जा रहा है. उसकी लॉबिंग, नोबेल के लिए नामांकन, जोरदार चापलूसी और रेयर अर्थ मिनरल व क्रिप्टो डील के ऑफर भी अमेरिका को पाकिस्तान के दशकों पुराने, तथ्यहीन क्षेत्रीय दावों को दोहराने के लिए राज़ी नहीं कर सके.

अमेरिका का दो टूक संदेश

हालांकि अमेरिका के पाकिस्तान में कुछ हित हैं, जैसे दुर्लभ खनिज और सैन्य उपकरणों की बिक्री, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अनुचित दावों को स्वीकार करे. अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान उसके लिए रुचि का विषय हो सकता है, लेकिन भारत का कोई विकल्प नहीं है. वैश्विक भू-राजनीति में भारत की अहमियत शीर्ष पर बनी हुई है. कुल मिलाकर देखें तो अमेरिका ने ऐसा कूटनीतिक संदेश दिया है, जिसकी गूंज इस्लामाबाद के सत्ता केंद्रों तक सुनाई देगी. इतना ही नहीं, चीन भी इस पर भड़कना तय है.

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इस नक्शे की सबसे अहम बात यह है कि इसमें अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है. यह वही इलाका है, जिस पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है और जिसे लेकर भारत और चीन के बीच तनाव भी रहा है.

 इंडिया-यूएस ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत जारी हुआ नक्शा

भारत का यह नक्शा अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव कार्यालय द्वारा साझा की गई एक ग्राफिक का हिस्सा था, जिसमें अमेरिकी निर्यात पर भारत द्वारा शुल्क में कटौती को भी दर्शाया गया है. इसी बीच आपको बता दें कि भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा सामने आ गया है और यह दिखाता है कि भारत को अन्य देशों (पड़ोसी देशों को मिलाकर) के मुकाबले बेहतर डील मिली है. इस ट्रेड डील से भारत-अमेरिका के बीच आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ेगा. साथ ही, देश के एमएसएमई, छोटे कारोबारियों और कुशल कर्मचारियों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बड़ा बाजार खुलेगा.

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किस पर कितना टैरिफ?

भारत-यूएस व्यापारिक समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है. 18 प्रतिशत टैरिफ के साथ अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में इजाफा होगा. इससे भारत को अमेरिकी बाजार में उसके मजबूत सहयोगियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी और टैरिफ गैप कम होगा. मौजूदा समय में अमेरिका ने यूरोप पर 15 प्रतिशत, यूके पर 10 प्रतिशत, स्विट्जरलैंड पर 15 प्रतिशत, जापान पर 15 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया पर 15 प्रतिशत का टैरिफ लगाया हुआ है.

अब किन देशों पर सबसे ज्यादा टैरिफ!

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वहीं, अमेरिका ने जिन देशों पर सबसे अधिक टैरिफ लगाया है, उनमें 50 प्रतिशत के साथ ब्राजील शीर्ष पर है. इसके बाद 40 प्रतिशत के साथ म्यांमार और लाओस, 37 प्रतिशत के साथ चीन और 30 प्रतिशत के साथ दक्षिण अफ्रीका का नाम शामिल है. अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते से सबसे बड़ा फायदा देश की टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर गुड्स, केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री को होगा.

इससे लागत के मामले में प्रतिस्पर्धा कर रहे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले भारत की स्थिति मजबूत होती है. यह ढांचा भारतीय वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क हटाने का मार्ग भी खोलता है. इसके अलावा, भारत पर अमेरिकी शुल्क में कमी से भारत की दर अधिकांश आसियान देशों से कम हो जाती है और चीन के मुकाबले भारत को बेहतर स्थिति प्राप्त होती है.

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई टैरिफ दरों में भारत अब चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसी अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम दरों वाले देशों में से एक है.

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क्या अपनी गलती ठीक कर रहा है अमेरिका!

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कुल मिलाकर कहें तो यह एक तरह से भारत की उन पुरानी आपत्तियों को स्वीकार करने जैसा है, जिनमें दिल्ली पहले कई बार अमेरिका और अन्य वैश्विक एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश की गलत प्रस्तुति पर आपत्ति जता चुका है. ट्रंप प्रशासन के इस कदम को उसी गलती को सुधारने जैसा माना जा रहा है.

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