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मनरेगा के बाद UPA के शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानून में भी होगा बदलाव! इन खामियों पर काम करेगी मोदी सरकार
VB-G Ram G बिल के बाद केंद्र सरकार शिक्षा और खाद्य से जुड़े दो अहम कानूनों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. इससे पहले खुद PM मोदी ने अहम निर्देश दिए हैं.
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मनरेगा के VB-G Ram G में तब्दील होने के बाद अब कांग्रेस राज के दो और कानून में बदलाव की तैयारी की जा रही है. मोदी सरकार UPA के समय में बने दो बड़े कानून- शिक्षा का अधिकार (Right to Education) और खाद्य सुरक्षा कानून (National Food Security Act) में बदलाव करने जा रही है. इनके नाम के साथ-साथ रूपरेखा भी बदल जाएगी.
बताया जा रहा है, सरकार इन कानूनों में सुधार करके यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना में हर लाभार्थी को पंजीकृत किया जा सके. अगर कार्यकारी आदेशों से काम नहीं चला तो नए बिल संसद में लाए जा सकते हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मनमोहन सरकार के इन कानूनों में कई खामियां पाई गईं हैं. जिसके चलते इनमें बदलाव हो सकता है, लेकिन इससे पहले PM मोदी ने योजना को लेकर कुछ जरूरी निर्देश दिए हैं.
PM मोदी के अहम निर्देश
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सभी लाभार्थियों का पूरा (100%) रजिस्ट्रेशन हो
योजनाओं का लाभ सही लोगों तक समय पर और सही तरीके से पहुंचे
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मनमोहन सरकार के कानून में खामियां क्या?
सरकार का दावा है कि शिक्षा और खाद्य से जुड़े ये दोनों कानून अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए. न तो हर बच्चे तक शिक्षा पहुंच पाई और न ही खाद्य सुरक्षा की गारंटी मिली. अब सरकार का फोकस है इन अहम योजनाओं में बदलाव कर सही समय पर सही पात्र तक योजना का लाभ पहुंचाया जा सके.
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क्या है शिक्षा का अधिकार कानून (Right To Education)
- साल 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया था
- 6 से 14 साल तक के हर बच्चे को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का संवैधानिक अधिकार
- यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत दिया गया
- यह कानून 1 अप्रैल 2010 को पूरे देश में लागू हुआ था
कानून का उद्देश्य हर बच्चे तक शिक्षा, किताबें, यूनिफॉर्म और निशुल्क स्टेशनरी उपलब्ध करवाना है. हर बच्चे का स्कूल में दाखिला और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षण का भी प्रावधान. इस कानून के तहत प्राथमिक शिक्षा में बच्चे को फेल नहीं किया जा सकता.
क्या है खाद्य सुरक्षा कानून?
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साल 2006 में आए खाद्य सुरक्षा कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है. यह कानून पहले से मौजूद कई पुराने खाद्य कानूनों को मिलाकर बनाया गया था. इस कानून के तहत FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की स्थापना की गई. जिसका मुख्य मकसद मिलावटी और नुकसानदेह खाने पर रोक है. इसके लिए खाद्य व्यवसायों के लिए स्पष्ट नियम भी बनाए गए हैं ताकि मिलावटी सामान पर रोक लगे. हालांकि यह कानून अपने मानकों को पूरा करने में नाकाम रहा.