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यूपी पुलिस ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को जारी किया नोटिस, जानिए क्या है पूरा मामला ?

समाजवादी पार्टी के बाद अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संभल का दौरा करने वाला था लेकिन योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने इस दौर से पहले ही अजय राय को नोटिस थमा दिया है।

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उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के बाद राज्य में एक अलग ही सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। हिंसा को लेकर एक तरफ जहां योगी आदित्यनाथ की सरकार एक्शन मोड में है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष लगातार प्रदेश सरकार और संभाल प्रशासन पर सवाल उठा रहा है। समाजवादी पार्टी के बाद अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संभल का दौरा करने वाला था लेकिन योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने इस दौर से पहले ही अजय राय को नोटिस थमा दिया है। लखनऊ पुलिस द्वारा अजय राय को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि हिंसा प्रभावित संबल का दौर ना करें जिले में शांति और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखें और सहयोग करें। इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस अपने कार्यक्रम को रद्द कर दें ताकि जिला प्रशासन के आदेश का संभल में पालन हो सके। नोटिस में संभल में लागू बीएनएसएस की धारा 163 का हवाला दिया गया है। 


हम गांधीवादी तरीक़े से जाएँगे : अजय राय 

लखनऊ पुलिस द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की प्रतिक्रिया सामने आई है उन्होंने कहा कि  "उन्होंने मुझे नोटिस जारी किया है और कहा है कि मेरे दौरे से अव्यवस्था फैलेगी। निश्चित रूप से हम भी अव्यवस्था नहीं बल्कि शांति चाहते हैं। पुलिस और सरकार ने वहां जो अत्याचार और अन्याय किया है, मैं चाहता हूं कि मेरे नेतृत्व को यह पता चले। उन्होंने (पुलिस ने) मुझे नोटिस दिया है लेकिन मैं वहां शांतिपूर्वक जाऊंगा। हम वहाँ गांधीवादी तरीक़े से जाने का प्रयास करेंगे। उससे पीछे नहीं हटेंगे।" 


सपा प्रतिनिधिमंडल भी नहीं जा पाया था संभल

 बताते चले की इससे पहले सामजवादी पार्टी ने भी अपने 15 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को संभल भेजने का फ़ैसला लिया था। उस वक़्त विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल के घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बाल की तैनाती कर दी गई थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने हिंसा में मृतक लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवज़ा देने के एलान किया था। 

ग़ौरतलब है कि संभल में कोर्ट के आदेश पर 19 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के पहली बार किए गए सर्वे के बाद से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद 24 नवंबर को मस्जिद का दोबारा सर्वे किए जाने के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा चार लोगों की मौत हो गई थी और 25 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इसके बाद से संभल पर सियासी संग्राम जारी है। बताते चले कि जिस याचिका पर अदालत ने मस्जिद पर सर्वे हुआ था उस याचिका में यह कहा गया था कि जिस जगह पर जामा मस्जिद है वहां पहले कभी हरिहर मंदिर था।
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