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फिर गरजा बाबा का बुलडोजर, जद में आया CM योगी के दुश्मन का घर! सड़कों पर पसरा सन्नाटा, एक्शन की चर्चा

गोरखपुर में अवैध कब्जेधारियों से जमीन मुक्त करवाई जा रही है. प्रशासन की इस कार्रवाई में बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी का घर भी आ गया.

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UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर को सजाने संवारने की कोशिश में एक ओर बड़ा कदम उठाया है. अवैध निर्माण पर बुलडोजर जोर-शोर से गरज रहा है. लोक निर्माण विभाग की टीम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत अवैध घर और दुकानें तोड़ी गईं. 

‘विरासत गलियारा’ यानी हेरिटेज कॉरिडोर गोरखपुर की नई पहचान बनने जा रहा है. इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रशासन जुटा हुआ है. अवैध कब्जेधारियों से जमीन मुक्त करवाई जा रही है. प्रशासन की इस कार्रवाई में बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी का घर भी आ गया. 

100 से ज्यादा मकानों-दुकानों पर चला बुलडोजर


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जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के नार्मल तिराहा से घंटाघर तक सड़क को पूरी तरह से खाली करवाया गया है. दो दिन में 100 से ज्यादा मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया है. इसका असर ये हुआ कि, अब सड़कें चौौड़ी हो गई है. वहीं, जिन लोगों ने खुद अतिक्रमण नहीं हटाया उनको बाबा के बुलडोजर से साइड किया गया.  प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर मिट्टी कर दिया. इसके बाद सड़कों से मलबा हटाने का काम भी तेजी से किया गया.

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दरअसल, तिवारी हाता जो कि बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी का घर है. विरासत गलियारे के सीमांकन के दौरान जद में आ रहा था. ऐसे में तिवारी हाता के मुख्य गेट से करीब डेढ़ सौ मीटर आगे हनुमान मंदिर तक की चारदीवारी तोड़ी गई है. 

अवैध कब्जा नहीं बर्दाश्त!

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गोरखपुर में प्रशासन ने साफ संदेश दिया कि, विरासत गलियारा मार्ग में किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कार्रवाई को लेकर SDM दीपक कुमार गुप्ता ने कहा कि, नार्मल तिराहा से घंटाघर तक का इलाका पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त हो चुका है. अब अगले चरण में आगे के हिस्सों में कार्रवाई की जाएगी.

कौन थे हरिशंकर तिवारी? 

बाहुबली नेता पं. हरिशंकर तिवारी ने निर्दलीय से राजनीति की शुरुआत की थी और बाद में कांग्रेस में रहे. इसके बाद फिर लोकतांत्रिक कांग्रेस के नाम से अपनी पार्टी बनाई. उनके दोनों बेटे कुशल तिवारी और विनय शंकर तिवारी भी राजनीति में सक्रिय हैं. रेलवे के ठेके में पंडित हरिशंकर तिवारी की काफी मजबूत रही. हरिशंकर तिवारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी से लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय तक की छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. 80 के दशक में जब गोरखपुर में अपराधों की चर्चा विदेशों तक होती थी. इसके पीछे हरिशंकर तिवारी का नाम ही होता था. अपराध की गलियों से होकर उन्होंने राजनीति का रास्ता तय किया. राजनीति में उनका दबदबा इसी से समझा जा सकता है कि वह लगभग लगभग हर पार्टी की सरकार में मंत्री रहे. 

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उनके बड़े बेटे कुशल तिवारी साल 2009 के BSP से सांसद चुने गए. दूसरे बेटे विनय शंकर तिवारी साल 2017 में चिल्लूपार सीट से विजयी रहे. लेकिन वक्त ने करवट ली. माफियाओं अपराधियों और अवैध कब्जेधारियों के खिलाफ CM योगी का एक्शन शुरू हुआ, बुलडोजर गरजा और आज वही तिवारी हाता इसकी जद में आ गया. क्योंकि CM योगी एक्शन से पहले राजनीतिक रसूख नहीं देखते. 

हरिशंकर तिवारी और योगी की अदावत की चर्चा क्यों? 

तिवारी हाता पर बुलडोजर चलने के बाद एक बार फिर गोरखपुर मठ के वीरेंद्र शाही और हरिशंकर तिवारी का किस्सा ताजा हो गया. वीरेंद्र शाही योगी के गुरु माने जाते थे. 1997 में वीरेंद्र शाही की हत्या कर दी गई. जिसका आरोप हरिशंकर तिवारी के चेले श्रीप्रकाश शुक्ला पर लगा. उसी समय योगी आदित्यनाथ राजनीति में कदम रख रहे थे. एक के बाद एक उन्होंने लगातार जीत हासिल की. इससे ठाकुरों का कद बढ़ता गया और ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी के दिन बदलने लगे. साल 2017 में जब योगी CM बने तो तिवारी हाते में UP पुलिस का छापा पड़ा. सांसद से लेकर सीएम बनने तक के सफर में योगी आदित्यनाथ ने उस शख्स के खिलाफ मोर्चा खोला और अपना वर्चस्व कायम किया, क्यूंकि ये लड़ाई केवल दो व्यक्तियों के बीच की नहीं थी, बल्कि ये अदावत गोरखनाथ मठ और तिवारी हाता के बीच की थी. 

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विरासत गलियारा के निर्माण में तेजी 
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि, जैसे ही जगह खाली कराई गई, वैसे ही सड़क, नाली और डक्ट निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है. निर्माण कार्य में तेजी के साथ विरासत गलियारा जल्द तैयार हो जाएगा. 

गोरखपुर की विरासत है गलियारा 

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गलियारे के पीछे प्रशासन का मकसद गोरखपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करना है. इसके साथ-साथ लोगों को बेहतर यातायात और स्वच्छ वातावरण देना भी प्राथमिकता है. प्रशासन की इस पहल पर लोगों का कहना है कि, सड़कें पहले से ज्यादा चौड़ी और खुली नजर आ रही हैं. प्रशासन ने दावा किया कि, जल्द ही ये परियोजना अपने मूल रूप में लौटते हुए दिखेगी. इसके साथ ही हेरिटेज कॉरिडोर गोरखपुर की सुंदरता में नए आयाम जोड़ेगा. 

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