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योगी सरकार का पर्यटन विकास योजना, सात जिलों की धरोहरें अब पर्यटकों के लिए खुलेंगी

सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में राज्य की सभी महत्वपूर्ण धरोहरें पर्यटन के लिए खोली जाएं. इससे न केवल पर्यटन और आर्थिक विकास होगा, बल्कि युवाओं को रोजगार और स्थानीय व्यवसायों को भी मजबूती मिलेगी.

Image Source: Social Media
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उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को हेरिटेज होटल और पर्यटन केंद्रों में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है. इसका उद्देश्य है कि इन धरोहरों को सुरक्षित रखा जाए और साथ ही पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए. इसके तहत सबसे पहले लखनऊ का आलमबाग पैलेस सहित सात जिलों की ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज होटल में तब्दील करने की योजना बनाई गई है. पर्यटन विभाग ने 10 धरोहरों को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने के लिए निविदा आमंत्रित की है. निविदा में इच्छुक कंपनियां या संगठन आवेदन कर सकते हैं. इस निविदा की अंतिम तिथि 27 नवंबर रखी गई है.

पीपीपी मॉडल के तहत विकास

इस योजना के तहत धरोहरों को सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा. इसका मतलब है कि सरकार और निजी कंपनियां मिलकर इन जगहों का विकास और संचालन करेंगी. इन धरोहरों को उनकी मूल संरचना और ऐतिहासिक रूप बनाए रखते हुए पर्यटकों के लिए तैयार किया जाएगा.
सरकार का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे इतिहास और संस्कृति का संरक्षण होगा और साथ ही राज्य में पर्यटन का क्षेत्र भी मजबूत होगा. पर्यटन से मिलने वाली आय का इस्तेमाल होटल और पर्यटन केंद्र के संचालन में किया जाएगा, जिससे यह परियोजना स्वावलंबी और लाभकारी बन सकेगी.

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कौन-कौन सी धरोहरें शामिल हैं

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इस परियोजना में कई ऐतिहासिक और प्रमुख धरोहरें शामिल हैं. इनमें लखनऊ के आलमबाग पैलेस, रोशन उद् दौला, और कोठी गुलिस्ता ए इरम प्रमुख हैं. इन इमारतों को हेरिटेज होटल और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा.

इसके अलावा अन्य जिलों की धरोहरें भी इस योजना में शामिल की गई हैं:

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कानपुर नगर: टिकैत राय बारादरी
ललितपुर: बलबेहट
बांदा: भूरागढ़ किला
गोंडा: वजीरगंज की बारादरी
महोबा: मस्तानी महल और सनपति कुल पहाड़
झांसी: टहरौली किला
मथुरा: ऐतिहासिक किला
इन सभी धरोहरों को पर्यटन और हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने की योजना है.

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

धरोहरों को हेरिटेज होटल और पर्यटन केंद्र में बदलने से राज्य में पर्यटन को नई पहचान मिलेगी. पर्यटक इन जगहों पर आकर न केवल ऐतिहासिक स्थल देख सकेंगे, बल्कि इन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ होटल और रेस्टोरेंट के रूप में भी अनुभव कर सकेंगे. साथ ही इस योजना से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. होटल और पर्यटन केंद्र के संचालन, सुरक्षा, सफाई, गाइडिंग और अन्य सेवाओं के लिए स्थानीय लोगों को नौकरी मिल सकती है.

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उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रयास है कि राज्य की धरोहरों को संरक्षित किया जाए और आर्थिक रूप से उपयोगी बनाया जाए. पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी निवेशकों को भी आकर्षित किया जाएगा ताकि इन धरोहरों का विकास तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो. सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में राज्य की सभी महत्वपूर्ण धरोहरें पर्यटन के लिए खोली जाएं. इससे न केवल पर्यटन और आर्थिक विकास होगा, बल्कि युवाओं को रोजगार और स्थानीय व्यवसायों को भी मजबूती मिलेगी.

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