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UP सरकार का बड़ा फैसला, मदरसा टीचर बनने के लिए अब ग्रेजुएशन, B.Ed और TET जरूरी

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम मदरसों की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लाने वाला है. अब शिक्षक बनने के लिए जरूरी होगा कि उम्मीदवार न सिर्फ धार्मिक शिक्षा में जानकार हो, बल्कि आधुनिक शिक्षण विधियों में भी प्रशिक्षित हो.

Image Source: Social Media
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उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है. अब मदरसों में शिक्षक बनने के लिए पुराने नियम नहीं चलेंगे. पहले जहाँ कामिल या फाजिल जैसी पारंपरिक डिग्रियाँ ही काफी मानी जाती थीं, वहीं अब सरकार ने कहा है कि शिक्षक बनने के लिए ग्रेजुएशन (स्नातक), B.Ed और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET या CTET) पास होना जरूरी होगा.

अब क्या है नया नियम?

नए नियम के तहत अगर कोई व्यक्ति मदरसे में शिक्षक बनना चाहता है, तो उसके पास तीन जरूरी योग्यताएँ होनी चाहिए - 
मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री

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शिक्षण प्रशिक्षण की डिग्री (B.Ed)

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  • UP TET या CTET जैसी शिक्षक पात्रता परीक्षा पास होना
  • पहले तक केवल कामिल या फाजिल जैसी डिग्रियों के आधार पर शिक्षक बनाए जा सकते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी गई है. यानी अब हर उम्मीदवार को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था के समान योग्य होना पड़ेगा.

सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद मदरसों में पढ़ाई की गुणवत्ता को सुधारना है. अक्सर यह शिकायत मिलती रही है कि मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास आधुनिक शिक्षा की समझ या प्रशिक्षण नहीं होता. अब जब शिक्षक भी B.Ed और TET पास होंगे, तो वे बच्चों को बेहतर और नई पद्धति से पढ़ा सकेंगे।
इससे मदरसों की पढ़ाई केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वहाँ के बच्चे भी मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इससे आगे चलकर उन्हें अच्छे कॉलेजों और नौकरियों में भी अवसर मिलेंगे.

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बच्चों और समाज को होगा फायदा

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इस सुधार से सबसे ज्यादा फायदा मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को होगा. अब वे वही विषय और वही गुणवत्ता वाली शिक्षा पाएंगे जो बाकी स्कूलों में दी जाती है. इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आगे चलकर किसी भी क्षेत्र में करियर बना सकेंगे. सरकार का मानना है कि अगर शिक्षक योग्य होंगे, तो बच्चे भी अच्छी शिक्षा पाएंगे और पूरा समाज आगे बढ़ेगा.

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम मदरसों की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लाने वाला है. अब शिक्षक बनने के लिए जरूरी होगा कि उम्मीदवार न सिर्फ धार्मिक शिक्षा में जानकार हो, बल्कि आधुनिक शिक्षण विधियों में भी प्रशिक्षित हो. यह सुधार न केवल मदरसों के स्तर को ऊपर उठाएगा, बल्कि वहाँ पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को भी मजबूत बनाएगा.

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