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पहलगाम हमले पर UN की कड़ी प्रतिक्रिया, क्या अब होगा पाकिस्तान पर वैश्विक एक्शन?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को तल्ख मोड़ पर ला खड़ा किया है. इस हमले के बाद पाकिस्तान ने दुनिया की नजरों में खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश की, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने उसकी चाल नाकाम कर दी.

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22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने न केवल भारत को झकझोर कर रख दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता की लहर दौड़ा दी है. इस हमले में दर्जनों निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए और घाटी एक बार फिर से खौफ के साए में आ गई. भारत ने इस हमले की ज़िम्मेदारी सीधे-सीधे पाकिस्तान पर डाल दी, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंध और अधिक बिगड़ गए. अब इस तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की प्रतिक्रिया आई है, जो न केवल हमले की निंदा करती है, बल्कि दोनों देशों को संयम बरतने की कड़ी सलाह भी देती है.

गुटेरेस: सैन्य समाधान कोई समाधान नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस हमले को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि पहलगाम हमला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह मानवीय मूल्यों के खिलाफ है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "कोई गलती न करें, सैन्य समाधान कोई समाधान नहीं है." उनका यह बयान उस समय आया है जब भारत के विभिन्न राजनीतिक और सैन्य हलकों में पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग तेज हो गई है. 

गुटेरेस ने आगे कहा कि उन्हें हमले के बाद भारत में उपजे क्रोध और पीड़ा की पूरी समझ है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे तनावपूर्ण समय में संयम ही सबसे बड़ा हथियार होता है. उनका इशारा इस ओर था कि अगर हालात संभाले नहीं गए तो दोनों परमाणु ताकतें आमने-सामने आ सकती हैं, जिससे पूरे दक्षिण एशिया में तबाही फैल सकती है.

आतंक के खिलाफ गुटेरेस का कड़ा रुख

गुटेरेस ने पहलगाम में मारे गए नागरिकों को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना न केवल अमानवीय है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ भी है. उन्होंने आतंकियों को "मानवता के दुश्मन" करार देते हुए यह भी जोड़ा कि "जिन लोगों ने यह हमला किया, उन्हें वैध और पारदर्शी न्याय प्रक्रिया के जरिए सज़ा दी जानी चाहिए." 

गुटेरेस के इस बयान से स्पष्ट है कि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद को किसी भी प्रकार की वैचारिक या राजनीतिक वजहों से न्यायोचित नहीं मानता. यह संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासतौर पर पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है, जिस पर लंबे समय से आतंकियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं.

कूटनीतिक रास्ता ही शांति का मार्ग

गुटेरेस ने भारत और पाकिस्तान को एक बार फिर कूटनीतिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि "संयुक्त राष्ट्र किसी भी ऐसी पहल का समर्थन करने के लिए तैयार है जो तनाव को कम करे, बातचीत को बढ़ावा दे और शांति को फिर से बहाल करे." उनका यह बयान उस वक्त आया है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और बातचीत की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र पहले भी कई बार भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश कर चुका है, लेकिन भारत हमेशा इस बात पर अड़ा रहा है कि यह मामला पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है. ऐसे में गुटेरेस की यह पहल कितनी कारगर होगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन उनका बयान एक सकारात्मक संकेत जरूर देता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बनाए रखने की गंभीर कोशिशें जारी हैं.

आतंक के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने इस आतंकी हमले के बाद साफ किया है कि वह आतंक के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ से पीछे नहीं हटेगा. भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर पाकिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का सीधा आरोप लगाया है और कहा है कि "जब तक पाकिस्तान आतंक को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक क्षेत्र में शांति असंभव है."

भारत की जनता में भी इस हमले को लेकर भारी आक्रोश है. सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, हर जगह पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है. ऐसे में गुटेरेस की संयम की अपील भारतीय मानस में कितनी जगह बना पाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा.

पाकिस्तान का रुख “हम हमले में शामिल नहीं”
वहीं पाकिस्तान ने इस हमले में अपनी किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा विफलता है और पाकिस्तान को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है. पाकिस्तान ने भी संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि वह निष्पक्ष जांच कराए और बिना सबूत के उस पर आरोप न लगाए जाएं.

यह बयान उस वक्त आया है जब पाकिस्तान पर पहले से ही FATF और अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वह अपने देश में पल रहे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करे. भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करता आया है, और यह हमला उस कोशिश को और धार दे सकता है.

सीमा पर बढ़ी सैन्य हलचल
हमले के बाद भारत और पाकिस्तान की सीमाओं पर सैन्य गतिविधियों में तेज़ी आई है. भारतीय सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती और गश्त को दोगुना कर दिया गया है. उधर LOC पर पाकिस्तान की तरफ से भी हलचल देखी जा रही है.  यह स्थिति साल 2019 की याद दिलाती है जब पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक की थी और दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे. हालांकि गुटेरेस की समय रहते की गई अपील शायद इस बार हालात को नियंत्रण में रखने में मदद कर सके.

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की जटिलता दशकों पुरानी है. हर बार एक आतंकी हमला दोनों देशों को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा करता है. ऐसे समय में जब जनता की भावनाएं उबाल पर होती हैं, तब किसी शांत स्वर की अहमियत और भी बढ़ जाती है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस का यह बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर समय रहते संयम नहीं बरता गया, तो अंजाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.
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