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योगी सरकार के नेतृत्व में जगमग रहेगा संगम, 500 सोलर लाइट और 25 हजार LED से रोशन होगा माघ मेले का हर कोना

CM Yogi: माघ मेले में बिजली व्यवस्था को हाईटेक, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा रहा है. प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और वे पूरी आस्था और शांति के साथ संगम स्नान और मेले का आनंद ले सकें.

Image Source: Social Media
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Magh Mela 2026: संगम के किनारे 3 जनवरी से शुरू होने वाले आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माघ मेले को लेकर सभी विभाग पूरी ताकत से तैयारियों में जुटे हुए हैं. 44 दिनों तक चलने वाले इस विशाल मेले में लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए पहुंचते है. ऐसे में व्यवस्थाओं को बेहतर और सुरक्षित बनाना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. खासकर बिजली व्यवस्था को लेकर इस बार प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. 

800 हेक्टेयर में फैले मेले के लिए मजबूत बिजली व्यवस्था

करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले माघ मेले में रेत पर तंबुओं का एक अस्थायी शहर बसाया जा रहा है. इस पूरे इलाके को दिन-रात रोशन रखने के लिए बिजली विभाग ने अपनी लगभग सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं. बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता (माघ मेला) अशोक कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार मेले में 350 किलोमीटर लंबी एलटी लाइन बिछाई जानी है, जिसमें से 320 किलोमीटर लाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है.
मेले में करीब 7.5 लाख बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि श्रद्धालुओं और संतों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे। इसके लिए इस बार कई नए और आधुनिक प्रयोग किए जा रहे हैं.

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पहली बार माघ मेले में “स्कैन टू फिक्स” तकनीक


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इस बार माघ मेले में बिजली विभाग ने पहली बार “स्कैन टू फिक्स” तकनीक को लागू किया है. इसका मकसद है बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करना। इसके तहत मेले में लगाए जाने वाले हर बिजली खंभे, लाइन और कनेक्शन पर क्यूआर कोड (बारकोड) लगाए जाएंगे.
जैसे ही कोई कर्मचारी या श्रद्धालु इस कोड को स्कैन करेगा, उसे उस स्थान से जुड़ी पूरी जानकारी मिल जाएगी और कंट्रोल रूम तक शिकायत तुरंत पहुंच जाएगी. इससे बिजली से जुड़ी शिकायतों का समाधान बहुत कम समय में किया जा सकेगा.

15 हजार बिजली पोल्स पर लगाए जाएंगे क्यूआर कोड


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माघ मेला क्षेत्र में 15 हजार से अधिक बिजली के खंभों पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं. इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर गूगल फॉर्म खुलेगा, जिसमें लोग बिजली कटौती के साथ-साथ पानी की समस्या, टूटी सड़क या अन्य परेशानियों की शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे .इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि अगर कोई श्रद्धालु रास्ता भटक जाए, तो वह अपनी लोकेशन पहचान कर अपने परिवार या गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकेगा.  यानी यह व्यवस्था सिर्फ बिजली ही नहीं, बल्कि पूरे मेले की व्यवस्थाओं में मददगार साबित होगी. 

बिजली गुल होने से बचने के लिए खास इंतज़ाम

मेले में बिजली सप्लाई बाधित न हो, इसके लिए इस बार 5 रिंग मेन यूनिट (RMU) लगाई जा रही हैं, जबकि पिछले माघ मेले में सिर्फ 1 RMU थी. इन यूनिट्स की मदद से अगर कहीं बिजली कटती भी है, तो 10 सेकंड के अंदर दोबारा बिजली बहाल हो जाएगी. 

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सोलर लाइट से रोशन होंगे घाट और चौराहे

माघ मेले की बिजली व्यवस्था के लिए इस बार 32 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो पिछले मेले से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है. पूरे मेले में 47 किलोमीटर एचटी लाइन और 350 किलोमीटर एलटी लाइन बिछाई जाएगी. इसके साथ ही 25 बड़े और 35 छोटे सब-स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें तीन लेयर का पावर बैकअप सिस्टम रहेगा. पूरे मेला क्षेत्र को रोशन रखने के लिए 25 हजार से अधिक एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं. इसके अलावा संगम के स्नान घाटों और प्रमुख चौराहों पर हाइब्रिड सोलर लाइट लगाई जाएंगी, जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए डीजी सेट की भी व्यवस्था की गई है.

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर खास ध्यान


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कुल मिलाकर इस बार माघ मेले में बिजली व्यवस्था को हाईटेक, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा रहा है. प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और वे पूरी आस्था और शांति के साथ संगम स्नान और मेले का आनंद ले सकें.

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