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सनातन को डेंगू-मलेरिया बताने वाले उदयनिधी स्टालिन ने बयान पर मांफी मांगने से किया इंकार!

उदयनीधी ने अपने विवादित बयान पर मांफी मांगने से इंकर कर दिया है। स्टालिन ने कहा, "महिलाओं को पढ़ने की अनुमति नहीं थी। उन्हें घर से बाहर जाने की आजादी नहीं थी और अगर उनके पति का निधन हो जाता था, तो उन्हें भी मरना पड़ता था। थंथाई पेरियार ने इन सबके खिलाफ आवाज उठाई थी। मैंने वही कहा जो पेरियार, अन्ना और कलाईनार ने कहा था।"

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तमिलनाडू के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन का वो विवादित बयान तो याद होगा ही आपको। जिसमें उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया है और इसे समाप्त हो जाना चाहिए। पिछले साल यानी की 2023 में मुख्यमंत्री के बेटे का इतना बड़ा बयान सामने आया था। जिसके बाद इसपर राजनीति खूब हुई थी। हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाकर स्टालिन ने अपनी राजनीतिक रोटी सेकने की कोशिश की। मामला इतना ज्यादा उछाला गया था कि उदयनिधी को 30 सितंबर, 2024 को डिप्टी सीएम बनाया गया। सनातन धर्म विवाद की वजह से ही उन्हें डिप्टी सीएम बनाने में देरी की गई। ताकी मामला शांत हो जाए। 


लेकिन पद पर बैठने के कुछ ही दिनों बाद उदयनिधि स्टालिन एक बार फिर विवादों में घिर गए है। 21 October, 2024 को एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्टालिन अपने उस विवादित बयान पर मांफी मांगने से साफ साफ इंकार कर देते है। जिसमें उन्होंने सनातन धर्म के खात्मे की बात वो यही नहीं रूके उन्होंने राज्य में हिंदी थोपने का आरोप लगाया है। 

ऑपइंडिया के रिपोर्ट में अनुसार एक कार्यक्रम में बोलते वक्त उदयनिधि स्टालिन ने एक ने कहा कि उन्होंने पेरियार, पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई और एम. करुणानिधि जैसे द्रविड़ नेताओं के विचारों को दोहराया है। उन्होंने कहा, “महिलाओं को पढ़ने की अनुमति नहीं थी। उन्हें घर से बाहर जाने की आजादी नहीं थी और अगर उनके पति का निधन हो जाता था, तो उन्हें भी मरना पड़ता था। थंथाई पेरियार ने इन सबके खिलाफ आवाज उठाई थी। मैंने वही कहा जो पेरियार, अन्ना और कलाईनार ने कहा था।”

उदयनिधी स्टालिन अपने बचाव में कहते है कि “मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। न केवल तमिलनाडु में, बल्कि मेरे खिलाफ पूरे भारत में कई अदालतों में मामले दर्ज किए गए। मुझसे माफी माँगने को कहा गया, लेकिन मैं अपने बयान पर कायम हूँ। मैं कलाईनार का पोता हूँ और माफी नहीं मांगूंगा”

उदयनिधि स्टालिन तमिल लोगों को अगल करने की कोशिश करते है। वो तमिल कपल से अपने बच्चे का नाम तमिल में रखने की अपील करते है। केंद्र सरकार पर आरोप लगाते है कि सरकार नई शिक्षा नीति के तहत सरकार राज्य के लोगों पर तमिल थोपने का काम कर रही है। वो कहते है कि तमिलनाडु के राज्य गीत में जानबूझकर कुछ शब्दों को हटाया गया। ताकि विवाद पैदा किया जा सके।  

बता दे कि उदयनिधी स्टालिन ने पिछले साल सितंबर महीने में सनातन धर्म को लेकर बड़ा बयान दे दिया था। जिससे विवाद खड़ा हो गया था। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना “डेंगू” और “मलेरिया” से की और कहा कि इसे सिर्फ विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि "समाप्त" कर देना चाहिए। एक ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ में, उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। उनके इस बयान पर खासकर बीजेपी और हिंदू संगठनों ने तीखा विरोध जताया और उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज किए गए।

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