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ट्रंप का टैरिफ वार बेअसर...अब भारत और रूस के बीच एल्युमीनियम, उर्वरक, रेलवे व खनन क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

भारत और रूस ने एल्युमीनियम, उर्वरक, रेलवे और खनन टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने के लिए एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए. भारत-रूस वर्किंग ग्रुप की 11वीं बैठक में दोनों देशों ने औद्योगिक सहयोग, अपशिष्ट प्रबंधन, खनन उपकरण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी सहमति जताई.

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भारत और रूस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए एल्युमीनियम, उर्वरक, रेलवे और खनन टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. इस दिशा में दोनों देशों ने एक अहम प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे आने वाले समय में औद्योगिक विकास को नया बल मिलेगा.

11वें सत्र में अहम समझौते

यह प्रगति भारत-रूस के बीच आधुनिकीकरण और औद्योगिक सहयोग पर बने वर्किंग ग्रुप के 11वें सत्र में हुई. बैठक में दोनों पक्षों ने एल्युमीनियम, उर्वरक और रेलवे परिवहन के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की और खनन उपकरण, अन्वेषण और अपशिष्ट प्रबंधन में क्षमता निर्माण पर सहमति जताई.

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विज्ञान, तकनीक और अपशिष्ट प्रबंधन पर भी चर्चा

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बैठक में औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और खनन से जुड़ी तकनीकों के विकास जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि साझा तकनीकी सहयोग से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है. भारत की ओर से इस सत्र की सह-अध्यक्षता उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की. वहीं रूस की ओर से सह-अध्यक्षता रूसी संघ के उद्योग एवं व्यापार उप मंत्री एलेक्सी ग्रुजदेव ने निभाई.

पिछली बैठक की प्रगति पर नजर

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इस सत्र में 10वें सत्र के बाद हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई. दोनों देशों ने उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है. बैठक में तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया.

एयरोस्पेस और 3डी प्रिंटिंग में संयुक्त पहल

बैठक का एक अहम हिस्सा एयरोस्पेस विज्ञान और तकनीक में संभावित सहयोग पर केंद्रित रहा. इसमें आधुनिक विंड टनल की स्थापना, छोटे विमान पिस्टन इंजनों का निर्माण, कार्बन फाइबर तकनीक, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और 3डी प्रिंटिंग में संयुक्त विकास पर विशेष चर्चा हुई. भारत और रूस ने रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और दोहन के क्षेत्र में भी साझेदारी के नए अवसर तलाशे. इसके अलावा भूमिगत कोयला गैसीकरण और आधुनिक औद्योगिक ढांचे के निर्माण में संभावनाओं पर भी विचार किया गया.

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प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर के साथ सत्र का समापन

बैठक का समापन दोनों सह-अध्यक्षों द्वारा 11वें सत्र के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर के साथ हुआ. इस दस्तावेज़ में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई.

80 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस सत्र में भारत और रूस के लगभग 80 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, क्षेत्र विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल थे.

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